भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए व्यापार समझौते को ‘मदर्स ऑफ ऑल डील’ बताया जा रहा है. इसने दूसरे देशों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. इससे दो अरब लोगों के लिए बाजार तैयार होने की उम्मीद है. यह ग्लोबल जीडीपी का करीब एक चौथाई हिस्सा होगा. इस डील की वजह से यूरोप के भारत आने वाले करीब 97 फीसदी सामानों पर टैरिफ कम होगा.
इस समझौते ने अमेरिका को थोड़ा असहज कर दिया है. अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को उन आरोपों को दोहराया कि रूस से भारत का तेल खरीदने की वजह से यूक्रेन-रूस युद्ध को फंड मिल रहा है.
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यह डील इतनी अहम क्यों?
EU भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है, जिसके साथ साल 2023-24 में $135 बिलियन के सामान का ट्रेड हुआ. FTA से भारत और EU के सदस्य देशों के बीच ट्रेड में काफी बढ़ोतरी होगी. जून 2022 में करीब नौ साल के बाद फिर इस डील पर बातचीत शुरू हुई. मंगलवार को इस डील पर साइन हुए. डील के जरिए 1.9 बिलियन से ज्यादा कंज्यूमर्स को मार्केट मिलेगा. इस डील की वजह से व्यापार को ऐसे समय में बढ़ावा मिलेगा, जब सरकार अमेरिकी टैरिफ का बोझ कम करने पर फोकस कर रही है.
इस ट्रेड डील से टेक्सटाइल, लेदर, केमिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और ज्वेलरी जैसे सेक्टर को भी फायदा होने की उम्मीद है, क्योंकि वे यूरोपियन मैन्युफैक्चरर्स के साथ मुकाबला नहीं करते हैं. भारत के एक्सपोर्टर्स को अभी बांग्लादेश जैसे विकासशील देशों से ड्यूटी-फ्री और कोटा-फ्री शिपमेंट से कड़ी टक्कर मिल रही है.
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भारतीयों के लिए क्या सस्ता होगा?
96.6 फीसदी यूरोपीय प्रोडेक्ट्स के एक्सपोर्ट पर टैरिफ खत्म हो जाएगा या कम हो जाएगा. इससे यूरोपीय प्रोडेक्ट्स पर हर साल 4 बिलियन यूरो तक की ड्यूटी बचेगी. यह ट्रेड डील यूरोपीय कारों पर लगने वाले टैरिफ को 110 फीसदी से घटाकर मात्र 10 फीसदी कर देगा. वहीं, वाइन पर ड्यूटी150 फीसदी से घटकर 20 फीसदी तक आ जाएगी. वर्तमान में 50 फीसदी टैरिफ वाले पास्ता और चॉकलेट जैसे प्रोसेस्ड फूड पर टैरिफ पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा.
ट्रंप टैरिफ का पलटवार
समझौते पर हस्ताक्षर की घोषणा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच साझेदारी का एक आदर्श उदाहरण है. यह समझौता वैश्विक जीडीपी के 25 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के 1/3 हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है.
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यह समझौता रणनीतिक रूप से डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के जवाब के रूप में देखा जा रहा है. बता दें, ट्रंप ने पिछले साल अगस्त में भारतीय आयात पर 25 प्रतिशत टैरिफ और रूसी तेल खरीद पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त ‘जुर्माना’ लगाने का ऐलान किया था. वहीं, EU के लिए, ट्रंप ने स्टील और एल्युमीनियम के इंपोर्ट पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया था.
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