अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बार फिर परमाणु हमले की आशंका चर्चा में है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु ठिकाने ‘पिकएक्स माउंटेन’ को निशाना बनाने की बात कही है. वहीं, पूर्व अमेरिकी टीवी होस्ट टकर कार्लसन ने दावा किया है कि अमेरिका इस ठिकाने पर परमाणु हमला करने पर विचार कर सकता है. हालांकि, उनके दावे की पुष्टि के लिए कोई ठोस सबूत या आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. इस बीच सवाल उठ रहा है कि अगर ऐसा हमला हुआ तो क्या उसकी रेडियोएक्टिव रेज भारत तक पहुंच सकती है?
क्यों अमेरिका के निशाने पर है पिकएक्स माउंटेन?
ईरान के इस्फहान प्रांत में स्थित पिकएक्स माउंटेन को एक बेहद संवेदनशील परमाणु ठिकाना माना जाता है. खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि ईरान ने अपने संवर्धित यूरेनियम के भंडार का कुछ हिस्सा इस पहाड़ के नीचे बने भूमिगत परिसर में रखा है. हालांकि, इस संबंध में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी सीमित है.
बताया जाता है कि यह ठिकाना पहाड़ के करीब 328 फीट नीचे स्थित है. इसकी तुलना में ईरान के फोर्डो और नतांज परमाणु केंद्र अपेक्षाकृत कम गहराई पर हैं. अमेरिका ने पहले इन ठिकानों को निशाना बनाने के लिए बंकर बस्टर बमों का इस्तेमाल किया था, लेकिन बंकर के भेदने में असफल रहा.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर पिकएक्स माउंटेन को निशाना बना सकता है. हालांकि, उन्होंने परमाणु हथियार के इस्तेमाल की स्पष्ट घोषणा नहीं की है. इससे पहले भी वह कह चुके हैं कि ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों की जरूरत नहीं है.
क्या भारत तक पहुंच सकती हैं रेडियोएक्टिव रेज?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि किसी परमाणु विस्फोट का असर कितनी दूर तक पहुंचेगा, ये उस बम की क्षमता पर निर्भर करता है. साथ ही धमाके का समय और मौसम की स्थिति पर भी रेडियोएक्टिव रेज के फैलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. ईरान का पिकएक्स माउंटेन भारत से करीब 2,500 किलोमीटर दूर है. अगर विस्फोट के बाद हवाएं पूर्व दिशा में बहती हैं, तो रेडियोएक्टिव कण अफगानिस्तान और पाकिस्तान तक पहुंच सकते हैं.
भारत के किन राज्यों पर होगा असर?
एक्सपर्ट के मुताबिक कुछ परिस्थितियों में इनका बेहद कम हिस्सा भारत के उत्तर-पश्चिमी इलाकों तक भी पहुंचने की आशंका है. ऐसी परिस्थिति में पंजाब, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और गुजरात जैसे राज्यों में इसका असर देखने को मिल सकता है. हालांकि, दूरी बढ़ने के साथ रेडियोएक्टिव रेज की मात्रा और उनका प्रभाव काफी कम हो सकता है. बारिश भी इसमें अहम भूमिका निभाती है, क्योंकि बारिश में रेडियोएक्टिव कण कुछ खास इलाकों में जमा हो सकते हैं.