दिग्गज एक्टर मनोज कुमार ने शुक्रवार सुबह मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में अपनी आखिरी सांस ली। अभिनेता पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे और उनका इलाज चल रहा था। अपने लंबे करियर में उन्होंने कई फिल्मों में काम किया। अपने अभिनय के दम पर लाखों फैंस को दीवाना बनाया। अब रह गई हैं तो सिर्फ एक्टर की यादें। आखिरी बार जब एक्टर की न्यूज 24 से बात हुई थी तो उन्होंने क्या कुछ कहा था, चलिए आपको बताते हैं।
न्यूज 24 के साथ आखिरी इंटरव्यू
न्यूज 24 से आखिरी बार मनोज कुमार ने तब बात की थी जब उन्हें दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से नवाजा जा रहा था। इस दौरान एक्टर ने अपनी जिंदगी और करियर के कई पहलुओं पर बात की थी।
भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और निर्देशक मनोज कुमार को सिनेमा जगत के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से नवाजा गया था। ये सम्मान उन्हें भारतीय सिनेमा में दिए गए उनके अविस्मरणीय योगदान के लिए दिया गया था। इस पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें इस प्रतिष्ठित सम्मान की जानकारी एक फोन कॉल के जरिए मिली। जब मधुर भंडारकर और अशोक पंडित ने उन्हें फोन कर बधाई दी, तो पहले तो उन्होंने इसे मजाक समझा। उन्होंने सोचा कि शायद कोई गलतफहमी हुई है, लेकिन जब उन्होंने टीवी चैनलों पर इस खबर को देखा, तो उन्हें यकीन हुआ कि ये सच है।
इस पर बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘पहले तो मुझे लगा कि कोई मजाक कर रहा है। जब चैनल ऑन किया, तो सच में मेरी आंखें आश्चर्य से भर आईं। ये मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान है।’
माता-पिता को किया था याद
मनोज कुमार ने इस अवॉर्ड के मिलने पर सबसे पहले अपने माता-पिता को याद किया था। उन्होंने बताया था कि जैसे ही उन्हें ये खबर मिली, उनकी नजरें सबसे पहले ऊपर आसमान की ओर उठीं और फिर माता-पिता की तस्वीर की तरफ चली गईं। एक्टर ने कहा, ‘ये अवॉर्ड सिर्फ मेरा नहीं है, ये मेरे माता-पिता, मेरे चाहने वालों और उन सभी का है जिन्होंने मेरे काम को सराहा।’
देरी से मिलने के सवाल पर क्या बोले?
कई लोगों का मानना था कि उन्हें ये सम्मान पहले ही मिल जाना चाहिए था। इस पर मनोज कुमार ने कहा था, ‘मैंने कभी ये नहीं सोचा कि मुझे ये अवॉर्ड कब मिलेगा। लेकिन जब ये मिला, तो ये मेरे लिए गर्व की बात है। शायद मैंने कुछ अच्छा काम किया होगा जो सरकार ने मुझे इस लायक समझा। मैं उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूं।’
सिनेमा के प्रति समर्पण
मनोज कुमार ने भारतीय सिनेमा को हमेशा समाज के लिए एक जरिया माना है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पहली बार दादा साहब फाल्के के बारे में पढ़ा था, तो उनके विचारों से बहुत प्रभावित हुए थे। मनोज कुमार ने कहा था, ‘फाल्के साहब का सपना था कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता को फिल्म के माध्यम से दुनिया तक पहुंचाया जाए। उनकी सोच ने मुझे हमेशा प्रेरित किया है। मैंने हमेशा ऐसी फिल्में बनाने की कोशिश की हैं जो समाज को एक संदेश दें।’
देशभक्ति गीतों की याद
अवॉर्ड मिलने की खुशी में जब उनसे पूछा गया था कि वो अपने प्रशंसकों को कौन सा गाना डेडिकेट करना चाहेंगे, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के कहा, ‘मेरा रंग दे बसंती चोला। ये गीत सिर्फ एक गाना नहीं है, ये मेरे दिल की आवाज है। मैंने हमेशा अपने देश से प्यार किया है और करता रहूंगा।’
मनोज कुमार के निधन से पसरा मातम
मनोज कुमार का यूं चले जाना भारतीय फिल्म जगत के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं है। उनके अभियन कौशल और निर्देशन को हमेशा याद रखा जाएगा। वो अपने पीछे समाज के लिए बेहद प्यारे-प्यारे संदेश छोड़ गए हैं।
यह भी पढ़ें: एक सीन के जब महज 11 रुपये लेते थे मनोज कुमार, जिदंगी से जुड़ी 10 दिलचस्प बातें
संबंधित खबरें
'बिग बॉस 20' में स्काउट ने किया लव को नॉमिनेट, सुबक-सुबक कर रोईं एक्ट्रेस
49 mins agoहॉलीवुड में छाया 'रामायण' का जादू, यश, रणबीर कपूर-साई पल्लवी का शाही अंदाज
2 hrs agoदिलजीत दोसांझ के दिल्ली कॉन्सर्ट में सुरक्षा का पहरा, 2 हजार गार्ड्स तैनात
3 hrs agoBigg Boss 20 Grand Finale: कब होगा सलमान खान के शो 'बिग बॉस 20' का फिनाले?
4 hrs agoश्रीदेवी की ऑनस्क्रीन बेटी की टूटी सगाई, 6 महीने में टूटा रिश्ता
5 hrs agoLIVE: श्रद्धा कपूर की 'ईठा' का नया पोस्टर हुआ रिलीज
5 hrs ago'जेलर 2' की कमाई में 13वें दिन आई गिरावट, फिर भी मेकर्स की हुई चांदी-चांदी
6 hrs agoभारत छोड़ो नोटिस पर इमरान खान को बॉम्बे हाईकोर्ट से मिली राहत, टली सुनवाई
23 hrs agoCID बनाने वाले बीपी सिंह का 77 की उम्र में हुआ निधन, हार्ट अटैक से गई जान
1 day ago'बिग बॉस 20' में फूट-फूटकर रोईं लव गिल, स्काउट ओपी संग खेला ब्लेम गेम!
1 day agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines