'पत्नी को पीटना जायज…' तालिबान में महिलाओं के लिए कानून सख्त, तो जावेद अख्तर का फूटा गुस्सा

बॉलीवुड के जाने-माने गीतकार और राइटर जावेद अख्तर ने अफगानिस्तान में लाए गए नए तालिबानी कानून को लेकर गुस्सा जाहिर किया है. उन्होंने महिलाओं को लेकर सुनाए गए नए फरमान की आलोचना की है. इसमें घरेलू हिंसा की इजाजत दी गई है.

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तालिबान में महिलाओं के लिए कानून सख्त, तो जावेद अख्तर का फूटा गुस्सा (File photo)

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हिंदी सिनेमा जगत के फेमस राइटर और गीतकार जावेद अख्तर किसी ना किसी वजह से चर्चा में रहते हैं. उन्हें उनकी बेबाकी के लिए जाना जाता है. ऐसे में अब वो एक बार फिर से अपने बयान को लेकर सुर्खियों में आ गए हैं. मामला तालिबानी के नए फरमान को लेकर है. उन्होंने अफगानिस्तान में महिलाओं के प्रति होने वाली घरेलू हिंसा को उचित बताया है. वहां पतियों को उन्हें शारीरिक सजा देने की खुली छूट है. इसी पर अब जावेद अख्तर ने गुस्सा जाहिर किया है.

जावेद अख्तर ने एक्स पर शेयर की पोस्ट

अफगानिस्तान में तालिबानियों के फरमान के बाद जावेद अख्तर ने एक्स पर पोस्ट शेयर की है. उन्होंने लिखा कि तालिबान में अब पत्नी की पिटाई को कानूनी रूप दे दिया है. बस शर्त इतनी है कि कोई हड्डी ना टूटे. उन्होंने अपनी पोस्ट में आगे लिखा कि अगर कोई महिला अपने पति की मर्जी के बिना मायके जाती है तो उसे तीन महीने की जेल भुगतनी होगी.

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जावेद अख्तर ने किया सवाल

तालिबान के इसी नियम को लेकर जावेद अख्तर ने अपनी पोस्ट में सीधा सवाल किया कि भारत के मुफ्ती और मुल्ला इस पर चुप क्यों हैं? उन्होंने गुजारिश की कि वो बिना किसी शर्त के इसकी निंदा करें. क्योंकि राइटर का मानना है कि ये सब उनके धर्म की आड़ लेकर किया जा रहा है.

जावेद अख्तर ने शेयर की एक और पोस्ट

इसके साथ ही जावेद अख्तर ने एक्स अकाउंट पर एक और पोस्ट की है. इसमें उन्होंने लिखा कि चाहे जो भी पॉलिटिकल फायदा हो, इन बदतमीज बर्बर तालिबानों को कोई इज्जत नहीं देनी चाहिए. जावेद अख्तर ने उन्हें दुनिया का कूड़ा कहा है.

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तालिबान का कानून 90 पेजों का दस्तावेज

बहरहाल, अगर तालिबान के नए कानून को लेकर बात की जाए तो अफगानिस्तान में नई दंड संहिता लागू की गई है. नए कानून का दस्तावेज 90 पेजों का है. इस संहिता पर तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा के हस्ताक्षर भी हैं और जल्द ही इसे अदालतों में वितरित किया जाएगा. इस कानून में समाज को दो हिस्सों में बांटा गया है. इसमें धार्मिक नेता ऊपर और निचला वर्ग सबसे नीचे है. नए कानून के तहत अपराध की सजा व्यक्ति की सामाजिक स्थिति के मुताबिक तय होगी.

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