जब इंदिरा गांधी ने गाया रवींद्र संगीत एकला चलो रे, सामने बैठकर सुनते रहे संगीतकार पंकज मलिक

इंदिरा गांधी को रवींद्र संगीत से खास लगाव था. जानिए शांतिनिकेतन से जुड़ा वह दिलचस्प प्रसंग, जब उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर का ‘एकला चलो रे’ गाया और पंकज मलिक ने उसे सुना.

Indira Gandhi

इंदिरा गांधी को रवींद्रनाथ टैगोर के गीत 'एकला चलो रे' से खास लगाव था.

भारतीय राजनीति के इतिहास में इंदिरा गांधी का नाम एक सशक्त प्रधानमंत्री के रूप में दर्ज है, लेकिन उनके व्यक्तित्व का एक सांस्कृतिक और संगीतमय पहलू भी था. बहुत कम लोग जानते हैं कि इंदिरा गांधी को रवींद्र संगीत से खास लगाव था और वह खुद भी रवींद्रनाथ टैगोर के प्रसिद्ध गीत गाया करती थीं. ऐसा ही एक यादगार संगीतमय प्रसंग है, जब इंदिरा गांधी ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का कालजयी गीत ‘जदि तोर डाक शुने केउ ना आसे, तबे एकला चलो रे’ गाया और मशहूर संगीतकार पंकज मलिक ने उसे सुना.

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शांतिनिकेतन में विकसित हुआ संगीत और कला के प्रति प्रेम

इंदिरा गांधी ने वर्ष 1934 से 1935 के दौरान पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन स्थित विश्वभारती में अध्ययन किया था. गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित इस शिक्षण संस्थान का वातावरण संगीत, साहित्य, कला और प्रकृति से गहराई से जुड़ा हुआ था. इंदिरा गांधी ने कई मौकों पर बताया था कि शांतिनिकेतन आने से पहले उनके घर में संगीत का माहौल नहीं था. लेकिन यहां बिताए गए समय ने उनके व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव डाला. यहीं से उनका कला, प्रकृति और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति जुड़ाव और मजबूत हुआ.

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पंकज मलिक ने रवींद्र संगीत को जन-जन तक पहुंचाया

पंकज मलिक भारतीय संगीत जगत की एक प्रतिष्ठित हस्ती थे. उन्हें रवींद्रनाथ टैगोर के गीतों को आम लोगों तक लोकप्रिय बनाने का महत्वपूर्ण श्रेय दिया जाता है. रवींद्र संगीत को व्यापक पहचान दिलाने में उनका योगदान बेहद अहम माना जाता है.
इंदिरा गांधी और पंकज मलिक की संगीत से जुड़ी मुलाकातें भी इसी सांस्कृतिक विरासत की याद दिलाती हैं.

एकला चलो रे का संदेश आज भी प्रासंगिक

रवींद्रनाथ टैगोर का गीत ‘एकला चलो रे’ केवल एक संगीत रचना नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, साहस और अकेले संघर्ष करने की प्रेरणा देने वाला संदेश है. इस गीत का भाव है कि यदि आपकी पुकार सुनकर कोई साथ देने नहीं आता, तो भी अपने रास्ते पर अकेले आगे बढ़ते रहिए. इंदिरा गांधी द्वारा इस गीत को गाने और पंकज मलिक द्वारा सुनने का यह संगीतमय प्रसंग भारतीय राजनीति और कला के ऐतिहासिक संबंधों की एक खूबसूरत याद के रूप में देखा जाता है. एक ओर देश की राजनीति में मजबूत नेतृत्व की पहचान रखने वाली इंदिरा गांधी और दूसरी ओर भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले पंकज मलिक—इन दोनों का यह संगीतमय जुड़ाव भारतीय सांस्कृतिक इतिहास के दिलचस्प पन्नों में शामिल है.

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