Top Medical Course: BAMS और BUMS में क्या हैं अंतर? जानिए 12वीं के बाद कौन सा मेडिकल कोर्स है बेस्ट 

Medical Career Tips: BAMS और BUMS मेडिकल कोर्स में अंतर जानें. 12वीं के बाद आयुर्वेद या यूनानी चिकित्सा में करियर बनाने के लिए पात्रता नियम, फीस और बेस्ट करियर स्कोप की पूरी जानकारी.

BUMS and BAMS Career Opportunities

BAMS और BUMS मेडिकल कोर्स में क्या हैं अंतर?

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कोर्स से जुड़ी जरूरी जानकारी:

  • बाम्स कोर्स पूरी तरह से प्राचीन भारतीय आयुर्वेद पर आधारित है, जबकि बुम्स यूनानी चिकित्सा प्रणाली पर काम करता है.
  • दोनों ही डिग्रियों को पूरा करने की कुल समय सीमा एक साल की इंटर्नशिप मिलाकर साढ़े पांच साल की होती है.
  • भारत के किसी भी सरकारी या प्राइवेट कॉलेज में इन कोर्स में दाखिला लेने के लिए नीट परीक्षा पास करना जरूरी है.
  • बुम्स कोर्स में प्रवेश पाने के लिए छात्र को 10वीं या 12वीं स्तर पर उर्दू भाषा की बुनियादी जानकारी होना आवश्यक है.
  • बाम्स कोर्स के पाठ्यक्रम में आयुर्वेदिक सिद्धांतों को समझने के लिए संस्कृत भाषा का भी अध्ययन कराया जाता है.

Top Medical Course: मेडिकल के क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले 12वीं साइंस (पीसीबी) के छात्रों के पास आज के समय में पारंपरिक और प्राकृतिक चिकित्सा प्रणालियों के कई बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं. इनमें सबसे प्रमुख नाम बाम्स और बुम्स कोर्स के आते हैं, जो आयुष मंत्रालय के अंतर्गत संचालित होते हैं. बाम्स का पूरा नाम बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी है, जो पूरी तरह से प्राचीन भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति पर आधारित है. दूसरी तरफ, बुम्स का पूरा नाम बैचलर ऑफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी है, जो यूनानी चिकित्सा प्रणाली के जरिए मरीजों का इलाज करना सिखाता है. दोनों ही प्रणालियों का मुख्य उद्देश्य बिना किसी साइड-इफेक्ट के बीमारी को जड़ से खत्म करना है.

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BAMS और BUMS के सिलेबस में क्या है अंतर?

अगर इन दोनों प्रतिष्ठित कोर्स की अवधि और उनकी पढ़ाई के तौर-तरीकों की बात करें, तो दोनों ही डिग्रियों को पूरा करने में साढ़े पांच साल का समय लगता है. इसमें साढ़े चार साल की कॉलेज की क्लासरूम पढ़ाई और उसके बाद एक साल की अनिवार्य हॉस्पिटल इंटर्नशिप शामिल होती है. बाम्स कोर्स के दौरान छात्रों को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ-साथ प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों, जड़ी-बूटियों और एनाटॉमी की पढ़ाई मुख्य रूप से हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत भाषा में कराई जाती है. इसके विपरीत बुम्स कोर्स में छात्रों को यूनानी सिद्धांतों, प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और कपिंग थेरेपी की शिक्षा दी जाती है, जिसके लिए छात्र को उर्दू, अरबी या फारसी भाषा का बुनियादी ज्ञान होना बेहद जरूरी है.

BAMS और BUMS एडमिशन का पूरा प्रोसेस

भारत में बाम्स और बुम्स दोनों ही मेडिकल कोर्स में एडमिशन लेने की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और राष्ट्रीय स्तर पर आधारित है. इन दोनों ही पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने के लिए छात्रों को नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट यानी नीट की प्रवेश परीक्षा पास करना पूरी तरह अनिवार्य होता है. नीट परीक्षा की काउंसलिंग के जरिए ही छात्रों को उनकी रैंक के हिसाब से सरकारी या प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में सीटें आवंटित की जाती हैं. फीस के मामले में सरकारी कॉलेजों में दोनों कोर्स का खर्च बेहद कम और किफायती होता है. वहीं निजी यानी प्राइवेट संस्थानों में बाम्स और बुम्स की सालाना फीस कॉलेज की साख और सुविधाओं के आधार पर अलग-अलग हो सकती है.

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BAMS और BUMS कोर्स में स्कोप

करियर और भविष्य की संभावनाओं के लिहाज से दोनों ही कोर्स अपने-अपने क्षेत्र में बहुत ही शानदार और सुरक्षित स्कोप प्रदान करते हैं. बाम्स की डिग्री पूरी करने के बाद आप एक रजिस्टर्ड आयुर्वेदिक डॉक्टर बन सकते हैं और सरकारी अस्पतालों में आयुर्वेदिक मेडिकल ऑफिसर के रूप में काम कर सकते हैं. इसके अलावा पतंजलि या डाबर जैसी बड़ी कंपनियों में कंसलटेंट भी बन सकते हैं. दूसरी तरफ, बुम्स ग्रेजुएट्स को यूनानी चिकित्सा अधिकारी, हकीम या रिसर्च वैज्ञानिक बनने का बेहतरीन मौका मिलता है. वर्तमान समय में प्राकृतिक और हर्बल इलाजों की बढ़ती वैश्विक मांग को देखते हुए दोनों ही क्षेत्रों का भविष्य बहुत उज्जवल है, और छात्र अपनी भाषा व रुचि के अनुसार बेस्ट विकल्प चुन सकते हैं.

छात्रों के लिए करियर गाइड:

  • नाम के आगे लगेगा डॉक्टर: दोनों ही डिग्रियों को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद छात्रों को कानूनी रूप से डॉक्टर लिखने का पूरा अधिकार मिलता है.
  • बजट में पूरी होगी पढ़ाई: एमबीबीएस के महंगे प्राइवेट कॉलेजों के मुकाबले बाम्स और बुम्स कोर्स काफी किफायती दरों पर पूरे किए जा सकते हैं.
  • साइड-इफेक्ट रहित इलाज की मांग: पूरी दुनिया में हर्बल और नेचुरल थेरेपी की लोकप्रियता बढ़ने से इन डॉक्टरों की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है.
  • हायर स्टडीज के बेहतरीन विकल्प: ग्रेजुएशन करने के बाद दोनों ही क्षेत्रों के छात्र एमडी या एमएस करके अपने विषय के विशेषज्ञ बन सकते हैं.
  • आत्मनिर्भर करियर का मौका: इस पढ़ाई के बाद छात्र अपना खुद का आयुर्वेदिक या यूनानी क्लिनिक और वेलनेस सेंटर खोलकर आत्मनिर्भर बन सकते हैं.

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लेखक के बारे में

Raja Alam

Raja Alam

राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में चार वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.
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