देश के उच्च शिक्षण संस्थानों (Higher Education Institutions) में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए बनाए गए यूजीसी इक्विटी नियमों (UGC Equity Regulations 2026) पर एक बड़ा अपडेट सामने आया है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को जानकारी दी है कि वह यूजीसी के इन नियमों पर फिर से विचार करने के लिए एक विशेष समिति (Committee) गठित करने की योजना बना रही है.
इस साल की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने इन नए नियमों पर रोक लगा दी थी. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि हर छात्र का ख्याल रखा जाए और देश की युवा पीढ़ी या किसी भी वर्ग में असंतोष या डर का माहौल न रहे.
सुप्रीम कोर्ट में क्या बोले सॉलिसिटर जनरल?
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच के सामने केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार इन नियमों की समीक्षा (Revisit) के लिए एक कमेटी बनाने पर विचार कर रही है. सरकार का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी वर्ग का छात्र खुद को उपेक्षित या असुरक्षित महसूस न करे और हर युवा के हितों की रक्षा हो. मुख्य न्यायाधीश ने भी हर छात्र के हितों की सुरक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया. इसके बाद शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई 4 सप्ताह के लिए स्थगित कर दी.
क्या है इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि?
यह पूरा मामला अबेदा सलीम तड़वी बनाम भारत संघ और उससे जुड़ी अन्य याचिकाओं से जुड़ा हुआ है. यह याचिका साल 2019 में रोहित वेमुला और पायल तड़वी की माताओं ने दायर की थी. दोनों छात्रों ने परिसरों में कथित जातिगत भेदभाव से तंग आकर आत्महत्या कर ली थी. याचिका में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव से निपटने के लिए सख्त दिशा-निर्देश और सुरक्षा उपाय बनाने की मांग की गई थी. इसी के तहत यूजीसी (UGC) ने जनवरी 2026 में 2012 के पुराने ढांचे को बदलते हुए UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 अधिसूचित किया था.
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाई थी 2026 के नियमों पर रोक?
जनवरी 2026 में ही सुप्रीम कोर्ट ने इन नए नियमों के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी और आदेश दिया था कि फिलहाल 2012 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे. नियम 3(1)(c) में जाति-आधारित भेदभाव को मुख्य रूप से अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों के साथ होने वाले अनुचित व्यवहार के रूप में परिभाषित किया गया था.
सामान्य वर्ग (General Category) के याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यह परिभाषा भेदभावपूर्ण और एकतरफा है, जिससे गैर-आरक्षित छात्रों (Non-Reserved Students) के साथ भेदभाव हो सकता है या इस नियम का गलत इस्तेमाल हो सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने भी पहली नज़र में इन नियमों को अस्पष्ट और दुरुपयोग के योग्य माना था, जिसके बाद सरकार ने अगस्त 2026 में इस पर पुनर्विचार करने की बात कही थी.
संबंधित खबरें
क्या 10वीं के बोर्ड एग्जाम में फेल होने से बचाएगा AI? जानिए CBSE का नया रूल
1 day agoNEET-PG में परसेंटाइल सिस्टम होगा खत्म! अब रैंक के आधार पर मिलेगा एडमिशन
1 day agoUP Special TET Admit Card 2026 जारी, ऐसे करें डाउनलोड, देखें एग्जाम शिफ्ट
3 days agoCBSE 10वीं-12वीं की डेटशीट कब आएगी? बोर्ड ने पेपर पैटर्न को लेकर दिया अपडेट
3 days agoजामिया मिल्लिया इस्लामिया का बड़ा फैसला, 24 नवंबर तक चलेंगी ऑनलाइन कक्षाएं
7 days agoचक्रवाती तूफान अर्नब से बढ़ी चिंता, 28-29 तारीख को यहां बंद रहेंगे स्कूल!
9 days agoजारी हुआ DSSSB का एडमिट कार्ड, इस डायरेक्ट लिंक से करें डाउनलोड
9 days agoएनटीए ने जारी किया संशोधित एग्जाम कैलेंडर, जानें अपनी परीक्षा की तारीख
9 days agoआज 26 अक्टूबर को किन राज्यों में बंद रहेंगे स्कूल? चेक करें पूरी लिस्ट
10 days agoJEE Main के एप्लीकेशन फॉर्म पर बड़ा अपडेट, जानें कब शुरू होंगे रजिस्ट्रेशन
12 days agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines