नामचीन इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन दिलाने के नाम पर कथित तौर पर फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह का पवई पुलिस ने पर्दाफाश किया है. पुलिस ने इस मामले में 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर विज्ञापन देकर छात्रों और उनके परिजनों को देश के जाने-माने इंजीनियरिंग संस्थानों में एडमिशन दिलाने का झांसा देता था.
पवई पुलिस ने मामले की जांच के दौरान पुणे स्थित दो कॉल सेंटरों पर छापेमारी की. कार्रवाई में 22 मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य सामान जब्त किया गया है. जब्त सामान और वाहनों की कुल कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है.
ऐसे करते थे ठगी
पुलिस के मुताबिक, आरोपी दिल्ली, हैदराबाद और देश के अन्य शहरों में स्थित नामचीन संस्थानों में एडमिशन दिलाने के नाम पर छात्रों से संपर्क करते थे. इसके लिए सोशल मीडिया पर विज्ञापन का इस्तेमाल किया जाता था. आरोपियों द्वारा NRI कोटा और मैनेजमेंट कोटा के जरिए एडमिशन दिलाने का दावा किया जाता था.
पवई पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले के एक पीड़ित को कथित तौर पर हैदराबाद भी ले जाया गया था. वहां उसे यह बताया गया कि एडमिशन की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने इसी तरीके से कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और कितनी रकम की ठगी की.
2024 से चल रहा था कथित फर्जीवाड़ा
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि यह कथित फर्जीवाड़ा साल 2024 से चल रहा था. आरोपी कॉल सेंटर के जरिए छात्रों और उनके परिवारों से संपर्क करते थे और नामचीन कॉलेजों में एडमिशन दिलाने का भरोसा देकर पैसे लेते थे.
गिरफ्तार किए गए 10 आरोपियों में से 5 आरोपी B.Tech की पढ़ाई कर चुके हैं, जबकि बाकी 5 आरोपी भी इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से जुड़े बताए जा रहे हैं. आरोपियों की उम्र 25 से 30 साल के बीच है, जबकि कथित मुख्य आरोपी की उम्र करीब 35 साल बताई गई है.
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में चार बिहार, चार उत्तर प्रदेश, एक झारखंड और एक हरियाणा से हैं.
महंगी कारें भी जब्त
पुलिस ने आरोपियों के पास से महंगी गाड़ियां भी जब्त की हैं. इनमें जगुआर, बीएमडब्ल्यू और मारुति सुजुकी एस-क्रॉस शामिल हैं. पुलिस के अनुसार, इन वाहनों में कुछ गाड़ियां आरोपियों के दोस्तों के नाम पर रजिस्टर्ड हैं. पुलिस अब वाहनों की खरीद और पैसों के स्रोत की भी जांच कर रही है.
फिलहाल पवई पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह से कितने लोग जुड़े थे, देशभर में कितने छात्रों को एडमिशन के नाम पर कथित तौर पर ठगा गया और इस नेटवर्क के जरिए कितनी रकम का लेन-देन हुआ.
मामले पर अधिक जानकारी देते हुए मुंबई पुलिस के जोन 10 के डीसीपी दत्ता नालावडे ने बताया कि यह गिरोह 2024 से सक्रिय था. जांच अभी प्राथमिक स्तर पर हैं. कितने लोगों के साथ ठगी की गई है. यह पता लगाया जा रहा है. यह गिरोह एडमिशन के समय सक्रिय होता था. किराए पर दफ्तर लिया जाता था. अभी तक पुणे में दो ठिकानों का पता चला है.
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