गुरुग्राम के मशहूर कमर्शियल प्रोजेक्ट '32nd Avenue' के संस्थापक और सीईओ ध्रुव दत्त शर्मा को पुलिस ने धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है. उन पर आरोप है कि उन्होंने एक ही बिल्डिंग के एक फ्लोर को 25 से ज्यादा अलग-अलग लोगों को बेचकर करीब 500 करोड़ रुपये का चूना लगाया है. शुक्रवार को हुई इस गिरफ्तारी के बाद आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे पूछताछ के लिए छह दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है. यह मामला सामने आने के बाद रियल एस्टेट जगत में हड़कंप मच गया है.
कैसे खुला धोखाधड़ी का यह पूरा खेल?
इस बड़े घोटाले का खुलासा तब हुआ जब 'ट्रैम वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड' नाम की कंपनी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत के मुताबिक साल 2021 में आरोपी ने अपनी कंपनी '32 Milestone' के पहले फ्लोर पर 3000 स्क्वायर फीट का एक यूनिट बेचने का ऑफर दिया था. सौदा 2.5 करोड़ रुपये में तय हुआ और कंपनी ने पूरी रकम चुका भी दी. पैसा देने के बाद भी जब जरूरी दस्तावेज नहीं मिले, तो कंपनी ने छानबीन शुरू की. जांच में पता चला कि जिस फ्लोर का सौदा उनसे हुआ था, वही हिस्सा 2022 और 2023 के बीच 25 अन्य लोगों के नाम पर भी चढ़ा दिया गया था.
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लीज के जरिए रची गई शातिर साजिश
आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की जांच में सामने आया कि आरोपी ध्रुव दत्त शर्मा ने केवल फ्लोर बेचा ही नहीं, बल्कि इसे घुमाने के लिए एक और कंपनी का सहारा लिया. पुलिस के अनुसार फ्लोर को 25 लोगों को बेचने के बाद, उनकी ही एक दूसरी कंपनी 'ग्रोथ हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड' के नाम पर उस जगह को 30 साल की लीज पर वापस ले लिया गया. इस तरह कागजों में हेरफेर कर निवेशकों के करोड़ों रुपये हड़प लिए गए. पुलिस अब इस मामले में शामिल अन्य करीबियों और सहयोगियों की तलाश कर रही है ताकि घोटाले की पूरी परतें खुल सकें.
निवेशकों को लगा करोड़ों का फटका
ध्रुव दत्त शर्मा से अभी पुलिस हिरासत में पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि उन्होंने और कितने लोगों को इसी तरह शिकार बनाया है. गुरुग्राम पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि शुरुआती जांच में आरोपी ने 2021 में किए गए सौदे की बात कबूल कर ली है. इस घटना ने उन निवेशकों को डरा दिया है जिन्होंने नामी प्रोजेक्ट्स में अपनी मेहनत की कमाई लगाई थी. फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह आंकड़ा 500 करोड़ रुपये से भी ऊपर जाने की आशंका जताई जा रही है.