केंद्रीय बजट को लेकर संसद में पेश होने से पहले जितनी हलचल बाहर दिखती है, उतनी ही खामोशी और प्राइवेसी के बीच इसकी तैयारी नॉर्थ ब्लॉक के भीतर होती है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश करेंगी, लेकिन उससे पहले महीनों तक चलने वाली इस तैयारी का बड़ा हिस्सा टॉप सीक्रेट माहौल में होता है. बजट महज खर्च और कमाई का डेटाबेस नहीं है, बल्कि सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं, टैक्स ढांचे, सब्सिडी और आम लोगों की जेब पर असर डालने वाला डॉक्यूमेंट होता है.
बजट का सीक्रेट रखना क्यों है जरूरी?
बहुत कम लोगों को पता होगा कि आजाद भारत का पहला बजट 26 नवंबर, 1947 को पेश किया गया था. देश की संसद में बजट पेश होने से पहले इसे सीक्रेट रखना बेहद जरूरी है क्योंकि इसके किसी भी हिस्से के समय से पहले लीक होने से बाजार, शेयर बाजार और नीतिगत फैसलों पर गहरा असर पड़ सकता है. साल 1950 में ऐसा ही कुछ हुआ था जब, सदन में पेश होने वाला बजट पहले ही लीक हो गया.
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1950 में लीक हुआ था बजट
बजट को सीक्रेट रखने की अहमियत उस समय पता चली जब 1950 में इससे जुड़े कई जरूरी डॉक्यूमेंट्स लीक हो गए. उस समय बजट की छपाई राष्ट्रपति भवन में होती थी. माना जाता है कि गणतंत्र भारत के शुरुआती दौर में ही, 28 फरवरी 1950 को तब के वित्त मंत्री जॉन मथाई के बजट भाषण के कुछ हिस्से इसके संसद में पेश होने से पहले बाहर आ गए. बजट लीक के इस विवाद ने इतना तूल पकड़ा कि मथाई को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा.
1950 के बाद बदल गए कई नियम
इस घटना ने सरकार को साफ संकेत दे दिया कि बजट जैसे संवेदनशील दस्तावेज के साथ किसी तरह की ढिलाई बाजार और सरकार, दोनों के लिए बेहद महंगी साबित हो सकती है. इसी विवाद के बाद दो बड़े बदलाव किए गए. पहला, बजट की छपाई की पूरी प्रक्रिया राष्ट्रपति भवन से हटाकर पहले मिंटो रोड स्थित प्रेस और बाद में नॉर्थ ब्लॉक की सरकारी प्रेस में स्थानांतरित की गई. दूसरा, बजट से जुड़ी हर जानकारी को सीमित लोगों के दायरे में रखने के लिए कड़े प्रोटोकॉल बनाए गए, जिन्हें आगे चलकर ‘लॉक-इन पीरियड’ की रूपरेखा मिली.
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क्या है ‘लॉक-इन पीरियड’?
‘लॉक-इन पीरियड’ के दौरान बजट दस्तावेज को तैयार करने और प्रिंट करने में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों को बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह काट दिया जाता है. ‘लॉक-इन पीरियड’ बजट की गोपनीयता की रीढ़ है. जैसे ही बजट का अंतिम ड्राफ्ट तैयार होने की प्रक्रिया शुरू होती है, वित्त मंत्रालय और प्रेस से जुड़े चुनिंदा अधिकारी-कर्मचारी नॉर्थ ब्लॉक के भीतर एक तरह से ‘सीमित आवागमन’ वाले दायरे में चले जाते हैं.
ना घर…. ना मोबाइल फोन
इस अवधि में न तो वे अपने घर जा सकते हैं, न ही किसी बाहरी व्यक्ति से आमने-सामने मिल सकते हैं. मोबाइल, निजी फोन, इंटरनेट और कुछ मामलों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध रहता है. परिवार से संपर्क तक अत्यंत सीमित चैनलों के माध्यम से ही संभव होता है. यह स्थिति तब तक जारी रहती है, जब तक वित्त मंत्री संसद में जाकर बजट भाषण नहीं पढ़ देतीं और दस्तावेज औपचारिक रूप से सार्वजनिक नहीं हो जाता.
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