भारतीय मल्टीनेशनल ग्रुप एस्सार (Essar Group) अमेरिका में $18 बिलियन (लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये) का भारी-भरकम निवेश करने जा रहा है, जिसमें आयवा (Iowa) में $15 बिलियन का अमेरिका का सबसे बड़ा स्टील प्लांट भी शामिल है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद वाइट हाउस में इसका ऐलान किया और इस दौरान रुइया परिवार (Ruia Family) के सदस्य उनके साथ मौजूद थे.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि एस्सार ग्रुप को इस मुकाम तक पहुंचाने वाला रुइया परिवार कौन है? चेन्नई पोर्ट के एक छोटे से 2.5 करोड़ रुपये के ठेके से शुरू हुई इस कंपनी का नाम एस्सार (Essar) कैसे पड़ा? आइए, रुइया परिवार की 3 पीढ़ियों की पूरी कहानी जानते हैं.
Essar नाम के पीछे की दिलचस्प कहानी
आपको जानकर हैरानी होगी कि एस्सार (Essar) कोई पुराना ऐतिहासिक शब्द नहीं है. सन 1969 में दो भाइयों, शशि रुइया (Shashi Ruia) और रवि रुइया (Ravi Ruia) ने मिलकर इस कंपनी की शुरुआत की थी. अंग्रेजी का पहला अक्षर S (Shashi) और दूसरा अक्षर R (Ravi) है. जब दोनों अक्षरों S और R को एक साथ बोला जाता है (S & R), तो उसकी आवाज आती है – एस्सार(Essar).
यानी दो भाइयों के नाम के पहले अक्षरों को मिलाकर इस विशाल ग्रुप का नाम रखा गया.
चेन्नई पोर्ट से अमरीकी ड्रीम तक: रुइया परिवार की 3 पीढ़ियां
शशि रुइया (Shashi Ruia): नींव रखने वाले कैप्टन
शशि रुइया ने 1965 में अपने पिता नंद किशोर रुइया के गाइडेंस में काम शुरू किया था. सन 1969 में उन्होंने अपने छोटे भाई रवि के साथ मिलकर एस्सार की स्थापना की. एस्सार ने अपना पहला काम चेन्नई पोर्ट के आउटर ब्रेकवाटर कंस्ट्रक्शन के रूप में शुरू किया, जो उस समय केवल 2.5 करोड़ रुपये का था.
उनके नेतृत्व में कंपनी ने कंस्ट्रक्शन से निकलकर स्टील, ऑयल एंड गैस, पावर, पोर्ट्स और टेलीकॉम सेक्टर में पैर पसारे और वो FICCI और इंडो-यूएस जॉइंट बिजनेस काउंसिल जैसी बड़ी संस्थाओं से भी जुड़े रहे. हालांकि दुर्भाग्य से, नवंबर 2024 में 80 साल की आयु में उनका निधन हो गया.
रवि रुइया (Ravi Ruia): ग्लोबल विस्तार के मास्टरमाइंड
रवि रुइया, पेशे से इंजीनियर हैं और उन्होंने एस्सार ग्रुप के विदेशी कारोबार को फैलाने में सबसे अहम भूमिका निभाई. अमेरिका, अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य पूर्व (West Asia) के बाजारों में बड़े-बड़े निवेश और सौदों को अंजाम देने का श्रेय रवि रुइया को ही जाता है.
रेवंत रुइया (Rewant Ruia): अमरीकी मिशन का नया युवा चेहरा
रवि रुइया के बेटे रेवंत रुइया एस्सार की तीसरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं. स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए करने वाले रेवंत मेसाबी मेटालिक्स (Mesabi Metallics) के चेयरमैन हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप के साथ वाइट हाउस में खड़े होकर $15 बिलियन के स्टील प्रोजेक्ट का ऐलान करने वाले रेवंत ही थे. उन्होंने कहा कि मिनेसोटा की खदान से लेकर आयवा की फैक्ट्री तक, हम एक पूरी तरह एकीकृत अमरीकन सप्लाई चेन बनाएंगे.
आज कहां खड़ा है एस्सार ग्रुप?
एक वक्त में 2.5 करोड़ रुपये के ठेके से शुरू हुआ एस्सार ग्रुप आज एस्सार ग्लोबल फंड (Essar Global Fund) के जरिए ऑपरेट होता है. एनर्जी, इंफ्रास्ट्रक्चर, मेटल्स-माइनिंग, टेक्नोलॉजी और रिटेल में फैले इस ग्रुप का सालाना रेवेन्यू करीब $15 बिलियन यानी लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपये है.
भारतीय उद्यमियों की दूरदर्शिता और मेहनत का ही नतीजा है कि आज चेन्नई के पोर्ट से शुरू हुआ एक बिजनेस अमेरिका में $18 बिलियन का इतिहास रच रहा है.