बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड की स्थापना का ऐलान किया है, जो देशभर में रुके हुए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को पटरी पर लाने और फाइनेंसिंग की कठिनाइयों को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. संसद में बजट पेश करते हुए सीतारमण ने बताया कि यह फंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को दिए जाने वाले लोन पर आंशिक क्रेडिट गारंटी देगा, जिससे बैंक बड़े प्रोजेक्ट्स को लोन देने में ज्यादा सहज महसूस करेंगे, खासकर कंस्ट्रक्शन के जोखिम भरे काम में.
क्या है ‘इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड’?
इस घोषणा के साथ ही सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च को बढ़ाने का भी फैसला किया है, जिसमें वित्तीय वर्ष 2027 के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर का लक्ष्य 11.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है. यह फंड सरल शब्दों में लेंडर्स के साथ जोखिम साझा करेगा, अगर कोई प्रोजेक्ट निर्माण या शुरुआती संचालन के दौरान मुश्किल में पड़ जाए.
प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) के मुताबिक, ‘इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और निर्माण चरण में निजी डेवलपर्स के जोखिम को लेकर विश्वास मजबूत करने के लिए वित्त मंत्री ने इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है, जो लेंडर्स को सावधानीपूर्वक तय आंशिक क्रेडिट गारंटी प्रदान करेगा.’ निजी डेवलपर्स को अक्सर देरी, लागत में वृद्धि और लंबी अवधि के कारण फंड जुटाने में परेशानी होती है, और यह फंड उनके हौसले को बढ़ाने का काम करेगा.
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इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग को मिला नया नजरिया
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे बैंक और निवेशक इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग को नए नजरिए से देखेंगे. ईवाई इंडिया के गवर्नमेंट एंड पब्लिक सेक्टर पार्टनर सत्यम शिवम सुंदरम ने कहा, ‘इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क फंड निर्माण और शुरुआती संचालन चरण में अनिश्चितता को काफी कम कर सकता है, जिससे बैंक, इंश्योरेंस कंपनियां और बॉन्ड निवेशक आकर्षित होंगे.’ उन्होंने जोड़ा कि लॉन्ग-टर्म कैपिटल की आसान उपलब्धता निजी क्षेत्र को नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन को ज्यादा अनुकूलता से देखने के लिए प्रेरित करेगी, विशेष रूप से पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल वाले प्रोजेक्ट्स के लिए.
निजी डेवलपर्स के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में वापसी की उम्मीद
हाल के वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर में निजी निवेश चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित रहा है, खासकर प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम्स से जुड़े क्षेत्रों में, जबकि जोखिम वाले पीपीपी प्रोजेक्ट्स में रुचि कम रही. सुंदरम के अनुसार, यह फंड पीपीपी मोड पर प्रोजेक्ट्स की गति तेज करने की क्षमता रखता है. फाइनेंसिंग जोखिम घटने से निजी डेवलपर्स बड़े पैमाने के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में वापसी कर सकते हैं.
बजट ने टियर-2 और टियर-3 शहरों तथा पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरी केंद्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया है. साथ ही, निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर उपकरणों के घरेलू उत्पादन को मजबूत करने की योजना भी घोषित की गई, जो जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन क्षमता बढ़ाएगी. हार्मनी इंफ्रा वेंचर्स के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एचएस कंधारी ने कहा, ‘यह बजट भारत की विकास रणनीति में इंफ्रास्ट्रक्चर को केंद्र में रखने का स्पष्ट संदेश देता है. कैपेक्स में वृद्धि लॉन्ग-टर्म प्रोजेक्ट्स प्लान करने वाले डेवलपर्स को भरोसा देगी.
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