बहुत से लोगों को लगता है कि अगर वे इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) नहीं भरेंगे, तो वे कागजी कार्रवाई और टैक्स के झंझट से बच जाएंगे. लेकिन यह बहुत बड़ी गलतफहमी है. आज के डिजिटल दौर में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास हाई-टेक डेटा एनालिटिक्स और कंप्यूटराइज्ड सिस्टम हैं, जिससे वे आपकी हर बड़ी लेन-देन पर नजर रखते हैं.
अगर आपकी कमाई टैक्स के दायरे में आती है और आप आईटीआर दाखिल नहीं करते हैं, तो आप पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई हो सकती है. आइए समझते हैं कि किन लोगों के लिए ITR भरना अनिवार्य है और इसे न भरने पर आपको किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.
भारत में किन लोगों के लिए ITR दाखिल करना अनिवार्य है?
इनकम टैक्स एक्ट की धारा 139(1) के तहत नीचे दी गई स्थितियों में आईटीआर भरना अनिवार्य है. अगर आपकी कुल सालाना कमाई बेसिक छूट सीमा से अधिक है यानी न्यू टैक्स रिजीम में 3 लाख रुपये से अधिक और ओल्ड टैक्स रिजीम में आपकी उम्र के अनुसार 2.5 लाख, 3 लाख या 5 लाख रुपये से अधिक है तो आपको आईटीआर भरना ही होगा. इसके अलावा सभी घरेलू कंपनियों, एलएलपी (LLP) और पार्टनरशिप फर्म्स को मुनाफा, नुकसान या शून्य आय होने पर भी हर साल आईटीआर भरना पड़ता है.
भले ही आपकी कमाई बेसिक छूट सीमा से कम हो, लेकिन अगर आप नीचे दी गई शर्तों में आते हैं, तो भी ITR भरना जरूरी है:
- किसी करेंट बैंक अकाउंट में 1 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा जमा किए हों.
- विदेश यात्रा पर 2 लाख रुपये से अधिक खर्च किए हों.
- साल भर में 1 लाख रुपये से अधिक का बिजली बिल चुकाया हो.
- बिजनेस का टर्नओवर 60 लाख रुपये या प्रोफेशनल इनकम 10 लाख रुपये से अधिक हो.
- साल में कुल TDS/TCS 25,000 रुपये या उससे अधिक कटा हो.
- विदेशी संपत्ति (Foreign Assets): यदि आपके पास विदेश में कोई बैंक खाता या संपत्ति है.
- रिफंड या लॉस कैरी फॉरवर्ड: कटा हुआ टीडीएस (TDS) वापस पाने के लिए या शेयर बाजार/बिजनेस के घाटे (Loss) को अगले सालों में एडजस्ट करने के लिए.
ITR न भरने पर लगने वाली पेनल्टी और कानूनी कार्रवाई
समय पर आईटीआर दाखिल न करने से आपको कई वित्तीय और कानूनी नुकसान हो सकते हैं. आप पर लेट फीस पेनल्टी (Section 234F) लग सकती है. अगर आपकी आय 5 लाख रुपये से अधिक है, तो देरी से फॉर्म भरने पर 5000 रुपये की लेट फीस लगेगी. आय 5 लाख से कम होने पर यह पेनल्टी 1000 रुपये होगी.
वहीं सरकार बचे हुए टैक्स पर ब्याज (Section 234A) भी लगाती है. इसका मतलब ये हुआ कि अगर आपकी कोई टैक्स देनदारी बचती है, तो उस पर हर महीने 1% की दर से ब्याज वसूला जाएगा. टैक्स रिटर्न न भरने का एक नुकसान ये भी है कि शेयर बाजार, प्रॉपर्टी या बिजनेस में हुए घाटे को आप अगले सालों के मुनाफे के साथ सेट-ऑफ नहीं कर पाएंगे.
हो सकती है जेल की सजा (Section 276CC):
जानबूझकर टैक्स चोरी करने या रिटर्न न भरने के गंभीर मामलों में जुर्माना लगने के साथ-साथ 3 महीने से लेकर 7 साल तक की जेल भी हो सकती है.
लोन, वीजा और क्रेडिट कार्ड पर क्या पड़ेगा असर?
आईटीआर आपके वित्तीय रिकॉर्ड का सबसे आधिकारिक सबूत होता है. इसे न भरने पर आपकी रोजमर्रा की वित्तीय गतिविधियों पर बुरा असर पड़ता है. होम लोन, कार लोन या बड़े क्रेडिट कार्ड के लिए बैंक पिछले 2-3 सालों का ITR मांगते हैं. इसके बिना आपका लोन रिजेक्ट हो सकता है. कई देशों की एंबेसी वीजा देने से पहले आपकी आर्थिक स्थिति देखने के लिए हालिया ITR की कॉपी मांगती है. जो लोग आईटीआर नहीं भरते, आगे चलकर उनके पेमेंट्स और बैंक ब्याज पर दोगुना या अधिक दर से TDS काटा जाता है.
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