'भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में अदाणी ग्रुप का बड़ा योगदान', अमेरिकी इकॉनमिस्ट प्रोफेसर जेफरी सैक्स ने बांधे तारीफों के पुल

Adani Group News: अदाणी ग्रुप का भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में बड़ा योगदान रहा है, इस बात पर मशहूर अमेरिकी इकॉनमिस्ट जेफरी डी सैक्स ने भी मुहर लगा दी. उन्होंने वारणासी के ताज गंगा होटल में एक प्रोग्राम के दौरान अपने विचार रखे.

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(Photo-ANI)

Jeffrey Sachs Praises Adani Group: मशहूर अमेरिकी अर्थशास्त्री प्रोफेसर जेफरी डी सैक्स ने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और आर्थिक बदलाव में अदाणी ग्रुप के योगदान की सराहना की है. उन्होंने इस समूह को देश की प्रगति के पीछे एक बड़ी ताकत बताया है. 2 नवंबर को वाराणसी में ‘आधुनिक चुनौतियों के लिए प्राचीन ज्ञान’ विषय पर आयोजित एक वर्ल्ड सिंपोजियम में बोलते हुए, सैक्स ने भारत के बुनियादी ढांचे के विस्तार में ग्रुप की भूमिका को रेखांकित किया और सतत विकास को बढ़ावा देने में अदाणी फाउंडेशन के काम की की.

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‘अदाणी ग्रुप के जरिए भारत का विकास’

जेफरी डी सैक्स, जो यूनाइटेड नेशंस के ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट सॉल्यूशंस नेटवर्क’ के चीफ हैं और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के ‘सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ का संचालन करते हैं. उन्होंने बताया कि बुनियादी ढांचे का विस्तार भारत की आर्थिक वृद्धि का एक अहम आधार रहा है. उन्होंने अदाणी ग्रुप को इस प्रगति में अहम योगदान देने वालों में से एक बताया और बड़े पैमाने के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में समूह की भागीदारी का जिक्र किया.

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इकॉनमिस्ट ने परिवार के स्वामित्व वाले व्यवसायों की खास जिम्मेदारियों पर भी चर्चा की. अदाणी परिवार की मिसाल देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे उद्यम सिर्फ व्यावसायिक हितों तक सीमित नहीं होते, बल्कि इनमें पारिवारिक मूल्य, विरासत और समाज के प्रति जिम्मेदारियां भी शामिल होती हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कंपनियों को सिर्फ वित्तीय प्रदर्शन से आगे बढ़कर समुदायों पर पड़ने वाले अपने असर पर भी विचार करना चाहिए.

कॉर्पोरेट प्रायोरिटी और सामाजिक जिम्मेदारी पर बात

जेफरी डी सैक्स ने सार्वजनिक रूप से लिस्टेड कंपनियों में सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देने में आने वाली परेशानियों को समझाने के लिए यूनिलीवर के पूर्व सीईओ पॉल पोलमैन के तजुर्बे का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि पोलमैन को उन निवेशकों और शेयरधारकों के विरोध का सामना करना पड़ा, जो सिर्फ वित्तीय रिटर्न को प्रायोरिटी देते थे. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी ‘एन्थ्रोपिक’ का जिक्र करते हुए, सैक्स ने सवाल उठाया कि संभावित तकनीकी जोखिमों की चेतावनियों के बावजूद व्यावसायिक मौकों पर इतना अधिक ध्यान क्यों दिया जा रहा है.

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उन्होंने सुझाव दिया कि ताकतवर तकनीक विकसित करने वाले व्यवसायों को सिर्फ कमर्शियल एक्सपेंशन पर फोकस करने के बजाय, सार्वजनिक सुरक्षा और लॉन्ग टर्म रिजल्ट को ज्यादा अहमियत देना चाहिए. उनकी बातों से ये साफ होता है कि व्यावसायिक विकास के साथ-साथ नैतिक नेतृत्व, सामाजिक जिम्मेदारी और सतत विकास के बीच संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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