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UPI Payments: क्या अब गूगल पे और फोनपे से पैसे ट्रांसफर करने पर लगेगा चार्ज? PhonePe CEO ने दूर की सभी कंफ्यूजन!

Free UPI Payments Fact Check: यूपीआई पेमेंट पर चार्ज लगने की खबर पर PhonePe CEO समीर निगम और PCI ने दिया बड़ा बयान. जानिए 2000 रुपये से ऊपर के पेमेंट्स और MDR चार्ज का पूरा सच.

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अगर आप भी सब्जी खरीदने से लेकर बड़े-बड़े बिलों का भुगतान करने तक के लिए यूआईपीआई (UPI) का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत राहत देने वाली है. संसद में पास हुए नए टैक्स अमेंडमेंट बिल (Taxation Amendment Bill 2026) के बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेजी से फैल रही थी कि क्या अब आम ग्राहकों को भी ऑनलाइन पेमेंट करने पर एक्स्ट्रा चार्ज (MDR Fee) देना पड़ेगा?

इस अफवाह पर अब फोनपे (PhonePe) के सीईओ समीर निगम और पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने पूरी तरह विराम लगा दिया है. आइए समझते हैं कि नया नियम क्या है और आपकी जेब पर इसका क्या असर पड़ेगा.

आम ग्राहकों के लिए यूपीआई रहेगा पूरी तरह फ्री!

PhonePe के फाउंडर और सीईओ समीर निगम ने साफ शब्दों में कहा है कि यूपीआई भारत के हर आम नागरिक के लिए पूरी तरह फ्री है और हमेशा फ्री ही रहेगा. अगर आप अपने दोस्त, रिश्तेदार या किसी दुकानदार को पैसे भेज रहे हैं (Person-to-Person Transfers), तो आपसे एक भी पैसा नहीं लिया जाएगा. छोटे दुकानदारों और लोकल किराना स्टोर्स को भी पेमेंट रिसीव करने पर कोई मर्चेंट चार्ज (MDR) नहीं देना होगा.

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फिर यह नई चर्चा किस बात को लेकर शुरू हुई है?
हाल ही में संसद में पास हुए टैक्सेशन एंड अदर लॉज अमेंडमेंट बिल 2026 में सरकार को यह अधिकार दिया गया है कि वह कुछ खास बिजनेस पेमेंट्स पर MDR (Merchant Discount Rate) लागू कर सके.

2000 रुपये से अधिक के बड़े बिजनेस पेमेंट्स: 2,000 रुपये से अधिक के बड़े कमर्शियल और बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.25% से 0.4% तक का एमडीआर (MDR) लगाने का प्रस्ताव है.

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एमडीआर (MDR) क्या है?
डिजिटल पेमेंट प्रोसेस करने के बदले बैंक और पेमेंट कंपनियां व्यापारी से जो छोटा सा शुल्क लेती हैं, उसे एमडीआर कहते हैं. यह चार्ज सिर्फ बड़े व्यापारियों और बिजनेस एंटिटीज के लिए है, आम ग्राहकों से इसका कोई लेना-देना नहीं है.

पेमेंट कंपनियों को क्यों पड़ी इस चार्ज की जरूरत?
पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) के अनुसार पिछले 10 सालों से बैंक, फिनटेक कंपनियां, एनपीसीआई (NPCI) और आरबीआई (RBI) बिना कोई चार्ज लिए इस पूरे सिस्टम को चला रहे हैं. ऐप की सुरक्षा, साइबर फ्रॉड से बचाव, नई टेक्नोलॉजी और सर्वर को मेंटेन रखने में बहुत भारी खर्च आता है. इसके अलावा यूपीआई सिस्टम को लंबे समय तक सुरक्षित और मजबूत बनाए रखने के लिए बड़े बिजनेस ट्रांजैक्शंस से यह मामूली फीस लेने पर विचार किया जा रहा है.

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अगर आप रोजाना की खरीदारी, रिचार्ज या किसी को पैसे भेजने के लिए PhonePe, Google Pay या Paytm जैसे यूपीआई ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो आपको बिल्कुल परेशान होने की जरूरत नहीं है. आपके लिए यूपीआई पहले की तरह ही पूरी तरह फ्री रहेगा.

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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