पिछला कुछ समय मार्केट के लिहाज से अनिश्चितता वाला रहा है। डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों के चलते दुनियाभर के निवेशकों के सेंटीमेंट प्रभावित हुए हैं। ऐसे में यह सवाल बेहद महत्वपूर्ण बन जाता है कि शेयर बाजार में निवेश किया जाए या फिर म्यूचुअल फंड ही सही हैं? चलिए इस सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश करते हैं।
दबाव से निकल रहा बाजार
शेयर बाजार ने 5 महीनों तक दबाव झेला है। इस दौरान निवेशकों का पोर्टफोलियो बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ऐसी कंपनियों के शेयर भी कई प्रतिशत नीचे आए हैं, जिनके फंडामेंटल अपेक्षाकृत मजबूत हैं। इस वजह से निवेशकों का बाजार को लेकर विश्वास हिला है। हालांकि, अब स्थिति तेजी से सामान्य हो रही है। मार्केट रिकवरी मोड में आ चुका है। भारत की अर्थव्यस्था मजबूत बनी हुई है, स्टॉक मार्केट के वैल्यूएशन को लेकर जो चिंता थी, वो भी अब खत्म हो गई है। लिहाजा, बाजार के भविष्य में अच्छा करने के संकेत हैं।
फंड मार्केट में सुधर रहे हाल
म्यूचुअल फंड की बात करें, तो शेयर बाजार की गिरावट ने इस मार्केट का भी मूड बिगाड़ दिया था। बड़ी संख्या में निवेशकों के म्यूचुअल फंड में SIP रोकने की जानकारी सामने आई थी। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी, 2025 में 61.33 लाख SIP अकाउंट बंद किए गए। जबकि इस दौरान 56.19 लाख नए SIP पंजीकृत हुए। इस तरह नए शुरू SIP की तुलना में एसआईपी बंद होने के मामले अधिक रहे। बाजार की गिरावट के चलते म्यूचुअल फंड का रिटर्न भी प्रभावित हुआ था। हालांकि, अब जब शेयर बाजार सुधर रहा है, तो म्यूचुअल फंड में भी स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है।
कहां लगाया जाए पैसा?
जब दोनों जगह ही स्थिति सुधरने की उम्मीद दिखाई दे रही है, तो कहां निवेश ज्यादा अच्छा रहेगा? इसका जवाब कई फैक्टर पर निर्भर करता है। जैसे कि आपका लक्ष्य क्या है, आपकी जोखिम उठाने की क्षमता कितनी है और आप कितना समय लेकर चल रहे हैं? कहने का मतलब है कि आप लंबे समय तक निवेश जारी रखना चाहते हैं या शॉर्ट टर्म में पैसा बनाना आपका लक्ष्य है? यदि बाजार का इतिहास देखा जाए तो रिटर्न के मामले में वह म्यूचुअल फंड से बेहतर साबित हुआ है। लेकिन रिटर्न मिलने की गारंटी तब बढ़ती है जब पर्याप्त शोध के बाद पैसा लगाया जाए।
इस बात का रखें ध्यान
जब मार्केट बुल रन में हो, यानी कि उछाल के साथ भाग रहा हो तो पैसा कमाना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है, लेकिन दबाव वाली स्थिति में ऐसा मुश्किल है। लिहाजा अगर आप बिना किसी तैयारी के मैदान में उतरते हैं तो नुकसान की आशंका अधिक रहती है। जबकि म्यूचुअल फंड के मामले में विशेषज्ञ फंड मैनेजर अपने ज्ञान के आधार पर आपके पैसे को निवेश करते हैं। सरल शब्दों में कहें तो स्टॉक मार्केट में निवेश के लिए आपको पूरा रिसर्च करना होता है, जबकि म्यूचुअल फंड में यह जिम्मेदारी फंड मैनेजर उठाते हैं। जोखिम दोनों जगह है, लेकिन शेयर बाजार में इसका स्तर थोड़ा अधिक रहता है।
बाजार ने दिया अच्छा रिटर्न
अधिकांश म्यूचुअल फंड का सालाना रिटर्न ऐतिहासिक रूप से 9% से 12% के आसपास रहा है। कई म्यूचुअल फंड ने इससे अधिक रिटर्न भी दिया है। वहीं दूसरी तरफ शेयर बाजार में सालाना इससे ज्यादा रिटर्न हासिल किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर BSE लिमिटेड के शेयर ने बीते एक साल में अपने निवेशकों को 104.58% का रिटर्न दिया है। 5 साल में यह आंकड़ा 5,500.00% रहा है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक साल या पांच साल पहले इस स्टॉक में बड़ा निवेश करने वालों का पैसा आज कितना हो गया होगा। इसी तरह, बजाज फाइनेंस का शेयर बीते एक साल में 21.13% और पांच सालों में 297.88% का रिटर्न अपने निवेशकों को दे चुका है। बाजार में ऐसे कई शेयर हैं, जिनके रिटर्न ने निवेशकों की झोली एक ही झटके में भर दी है।
फंड बाजार का ऐसा प्रदर्शन
वहीं, म्यूचुअल फंड के प्रदर्शन की बात करें, तो वित्त वर्ष 2025 में लगभग 58 इक्विटी म्यूचुअल फंड्स ने एकमुश्त निवेश पर डबल रिटर्न दिया है। इस अवधि के दौरान 268 इक्विटी म्यूचुअल फंडों में से 242 ने नेगेटिव रिटर्न दिया, जबकि 26 ने पॉजिटिव रिटर्न दिया। अच्छा प्रदर्शन करने वालों में 2 मोतीलाल ओसवाल म्यूचुअल फंड सबसे आगे रहे। मोतीलाल ओसवाल लार्ज कैप फंड ने वित्त वर्ष 25 में किए गए एकमुश्त निवेश पर लगभग 24.03% का रिटर्न दिया। वहीं, मोतीलाल ओसवाल फ्लेक्सी कैप फंड ने वित्त वर्ष 25 में लगभग 16.91% का रिटर्न दिया। इसके बाद इंवेस्को इंडिया मिडकैप फंड ने 16.90%, मोतीलाल ओसवाल स्मॉल कैप फंड और एडलवाइस मिड कैप फंड ने क्रमशः लगभग 16.68% और 16.03% का रिटर्न दिया।
यह रहा निष्कर्ष
कुल मिलाकर यदि आप ज्यादा जोखिम उठाने के लिए तैयार हैं और शोध करने की क्षमता रखते हैं, तो शेयर बाजार से अपेक्षाकृत अधिक रिटर्न कमाया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि ऐसी कंपनियों को अपने पोर्टफिलियो में शामिल किया जाए जिनके फंडामेंटल मजबूत हैं। पेनी स्टॉक्स के बजाए स्थापित कंपनियों पर दांव लगाना अच्छी रणनीति है। पेनी स्टॉक एक ही झटके में अगर बंपर रिटर्न भी दे सकते हैं, लेकिन उसमें पैसा डूबने की आशंका अधिक रहती है। जबकि स्थापित कंपनियों के स्टॉक लॉन्ग रन में अच्छे साबित हो सकते हैं। बाजार में निवेश से पहले पर्याप्त रिसर्च करें, सर्टिफाइड एक्सपर्ट्स से सलाह लें और फिर निवेश करें।
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