शेयर बाजार अपने बुरे दौर से गुजर रहा है. लगातार 5 सेशन में बाजार दबाव में रहा. सेंसेक्स 605 अंक या 0.72% गिरकर 83576.24 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50, 194 अंक या गिरकर 25683.30 पर बंद हुआ. BSE मिडकैप इंडेक्स 0.90% गिरा जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स 1.74% लुढ़क गया. ये पिछले चार महीने का सबसे खराब परफॉर्मेंस है.
पांच दिनों में इन्वेस्टर्स को 13 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है, क्योंकि BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 2 जनवरी को 481 लाख करोड़ रुपये से घटकर 468 लाख करोड़ रुपये से नीचे आ गया. अकेले 9 जनवरी को ही इन्वेस्टर्स की दौलत में 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी आई.
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निफ्टी 50 इंडेक्स में टॉप गेनर
निफ्टी 50 इंडेक्स में एशियन पेंट्स (1.88% ऊपर), ONGC (1.16% ऊपर) और HCL टेक (0.94% ऊपर) टॉप गेनर रहे.
निफ्टी 50 इंडेक्स में टॉप लूजर
इंडेक्स में 35 स्टॉक लाल निशान में बंद हुए, जिनमें अडाणी एंटरप्राइजेज (2.59% नीचे), NTPC (2.29% नीचे), और अडाणी पोर्ट्स (2.10% नीचे) टॉप लूजर रहे.
बाजार में गिरावट क्यों
ट्रंप की '500% टैरिफ' धमकी और अमेरिकी कानून
बाजार में मची इस तबाही का सबसे बड़ा कारण अमेरिका का प्रस्तावित रूस सेंक्शंस बिल है, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन प्राप्त है. इस बिल के तहत रूस से कच्चा तेल या यूरेनियम खरीदने वाले देशों पर 500% तक का टैरिफ लगाने का प्रावधान है.
क्योंकि भारत रूस का एक प्रमुख तेल खरीदार है, निवेशकों को डर है कि भारत के $85 बिलियन के अमेरिकी निर्यात बाजार (विशेषकर टेक्सटाइल, फार्मा और आईटी) पर इसका विनाशकारी असर पड़ सकता है.
विदेशी निवेशकों (FIIs) की रिकॉर्ड बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं. केवल जनवरी 2026 के पहले कुछ दिनों में ही विदेशी निवेशकों ने 8000 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेच दिए हैं. वे भारत के महंगे वैल्युएशन को छोड़कर अमेरिकी बाजार और डॉलर की ओर भाग रहे हैं.
'डर' का सूचकांक (India VIX) बढ़ा
बाजार में अनिश्चितता को मापने वाला India VIX इस हफ्ते करीब 16% उछल गया है. यह दिखाता है कि ट्रेडर्स आने वाले दिनों में और ज्यादा उतार-चढ़ाव की उम्मीद कर रहे हैं. जब VIX बढ़ता है, तो बाजार में 'पैनिक सेलिंग' (घबराहट में बिकवाली) बढ़ जाती है.
तकनीकी स्तर: निफ्टी 25,700 के नीचे
तकनीकी चार्ट पर 25,700 का स्तर एक बहुत मजबूत 'सपोर्ट' (Support) माना जा रहा था. इसके नीचे जाने का मतलब है कि अब बाजार 25450 - 25300 के स्तर की ओर फिसल सकता है. सबसे ज्यादा गिरावट ऑटो, बैंकिंग (ICICI, HDFC Bank) और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में देखी गई.
तीसरी तिमाही (Q3) के नतीजों का डर
कंपनियों के अक्टूबर-दिसंबर तिमाही (Q3) के नतीजे आने शुरू होने वाले हैं. निवेशकों को डर है कि मांग में कमी के कारण कॉर्पोरेट आय की वृद्धि धीमी रह सकती है, जिसकी शुरुआत अगले हफ्ते TCS और Infosys जैसे बड़े नामों से होगी.