अगर आपने आज शेयर बाजार में पैसे लगाए थे या अपना पोर्टफोलियो चेक किया है, तो रेड (लाल) निशान देखकर आपका दिल भी थोड़ा धक-धक जरूर हुआ होगा. गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली का माहौल रहा. सेंसेक्स 1200 से ज्यादा अंक टूट गया और निफ्टी गिरकर 23,050 के करीब पहुंच गया. सिर्फ दिग्गज शेयर ही नहीं, बल्कि स्मॉलकैप और मिडकैप शेडो में भी जमकर पिटाई हुई है.
अब आप सोच रहे होंगे कि अचानक बाजार को किसकी नजर लग गई? आइए, समझते हैं कि शेयर बाजार में आज मचे इस बवंडर के पीछे की 7 बड़ी वजहें क्या हैं. सेंसेक्स लगभग 1.61% यानी 1,207.92 अंक गिरकर 73,620.33 के स्तर पर ट्रेड होता दिख रहा है.वहीं निफ्टी लगभग 1.60% यानी 375.40 अंक गिरकर 23,071.40 के आसपास आ गया. मिडकैप और स्मॉलकैप की बात करें तो निफ्टी स्मॉलकैप 1.53% और मिडकैप 2.08% तक टूट गए.
शेयर बाजार में गिरावट के सबसे बड़े कारण
अमेरिका में बॉन्ड यील्ड का उछाल
अमेरिका में बिजनेस एक्टिविटी उम्मीद से ज्यादा तेज हुई है. इसके चलते 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (US Bond Yield) 2007 के बाद के अपने उच्चतम स्तर (5.11% के पार) पर पहुँच गई है. जब अमेरिका में सुरक्षित सरकारी बॉन्ड पर ही तगड़ा ब्याज मिलने लगता है, तो विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिका ले जाने लगते हैं.
कच्चे तेल (Crude Oil) की आग
भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल बाहर से खरीदता है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल $102.5 प्रति बैरल के पार निकल गया है. कच्चा तेल महंगा होने का सीधा मतलब है भारत में महंगाई बढ़ना, आयात बिल का भारी होना और कंपनियों की लागत में इजाफा होना!
कमजोर ग्लोबल संकेत
अमेरिकी बाजारों में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की आशंका से वॉल स्ट्रीट पर तगड़ी बिकवाली हुई. इसका असर एशियाई बाजारों पर भी दिखा, हांगकांग का हैंगसेंग और शंघाई कंपोजिट जैसे बाजार भी लाल निशान में फिसल गए.
ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली
पिछले सत्रों में बाजार अच्छी तेजी दिखा चुका था. ऐसे में जब वैश्विक स्तर पर तनाव और अनिश्चितता दिखी, तो निवेशकों ने पहले अपना मुनाफा लॉक करो की नीति अपनाई और जमकर बिकवाली की.
रुपये में कमजोरी
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 11 पैसे फिसलकर 95.84 के स्तर पर आ गया. रुपये की कमजोरी से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में रिटर्न कम हो जाता है.
इंडिया वीआईएक्स (India VIX) में तूफानी तेजी
बाजार का डर मापने वाला मीटर यानी India VIX 21% से ज्यादा उछलकर 12.56 पर पहुंच गया. VIX का बढ़ना इस बात का साफ इशारा है कि ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स में घबराहट बढ़ गई है और आने वाले दिनों में बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
बैंकिंग और इंश्योरेंस शेयरों की धुनाई
इंश्योरेंस रेगुलेटर (IRDAI) ने एजेंटों के कमीशन नियमों में बदलाव का प्रस्ताव दिया है. इसके बाद से बैंकिंग, NBFCs और इंश्योरेंस कंपनियों के शेयरों में जोरदार बिकवाली देखने को मिली, जिससे निफ्टी को नीचे खींचने में बड़ा योगदान रहा.
आम निवेशक अब क्या करें?
बाजार में इस तरह की गिरावट देखकर पैनिक (घबराहट) में आकर कोई भी फैसला न लें. अगर आप लंबी अवधि के निवेशक हैं, तो अच्छे और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में यह गिरावट खरीदारी का एक मौका भी साबित हो सकती है.