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रूठे विदेशी निवेशकों को मनाने के लिए क्या बदले जाने चाहिए टैक्स कानून? SEBI चीफ ने कही ये बात

भारतीय शेयर बाजार की उड़ान में विदेशी निवेशकों की भूमिका हमेशा से अहम रही है। इसलिए तमाम एक्सपर्ट्स कैपिटल गेन टैक्स में कमी की मांग कर चुके हैं, ताकि रूठे विदेशी निवेशकों को वापस भारत की तरफ आकर्षित किया जा सके।

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SEBI

भारत से रूठे विदेशी निवेशकों की वापसी के लिए कैपिटल गेन टैक्स में कमी की मांग उठती रही है। कुछ वक्त पहले हेलियोस कैपिटल (Helios Capital) के संस्थापक और चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर (CIO) समीर अरोड़ा ने कैपिटल गेन टैक्स को सरकार की सबसे बड़ी गलती करार दिया था। उन्होंने कहा था कि इससे विदेशी निवेशकों का मनोबल कमजोर हुआ है और वह लगातार बिकवाली कर रहे हैं। गौरतलब है कि भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहां विदेशी निवेशकों को भी शेयर बाजार से हुए मुनाफे पर टैक्स देना पड़ता है।

टैक्सेशन में बदलाव की जरूरत नहीं

हालांकि, बाजार नियामक सेबी (SEBI) के चीफ तुहिन कांत पांडे को नहीं लगता कि ऐसा कुछ करने की जरूरत है। TOI की रिपोर्ट के अनुसार, पांडे का कहना है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए टैक्सेशन कानूनों में बदलाव की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि भारत ने पिछले कुछ समय में काफी अच्छा रिटर्न दिया है। उन्होंने कहा कि डॉलर के संदर्भ में भारत ने डबल डिजिट रिटर्न दिया है, इसलिए टैक्स संबंधी कानूनों में किसी बदलाव की जरूरत नहीं है।

4 प्रमुख सिद्धांतों पर दिया जोर

तुहिन कांत पांडे ने संतुलित रेगुलेशन की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सेबी का फोकस विश्वास, पारदर्शिता और प्रौद्योगिकी पर है। उन्होंने कहा कि सेबी अपनी निगरानी प्रणालियों द्वारा चिन्हित भ्रामक खुलासों के लिए कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा। सेबी प्रमुख ने कहा कि मेरा मानना ​​है कि हमारे पास दुनिया की सबसे अच्छा कैपिटल मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर में से एक है। हमारी भूमिका गतिशील वातावरण में चुनौतियों का लगातार सामना करना है। पांडे ने सेबी के 4 प्रमुख सिद्धांतों – विश्वास, पारदर्शिता, टीमवर्क और प्रौद्योगिकी – के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और इस बात पर जोर दिया कि नियामक निर्णयों और बाजार सहभागियों के साथ जुड़ाव में विश्वास महत्वपूर्ण है।

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कितना है कैपिटल गेन टैक्स?

तमाम एक्सपर्ट्स यह कह चुके हैं कि सरकार को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (LTCG) सिर्फ विदेशी ही नहीं, भारतीय निवेशकों के लिए भी खत्म कर देना चाहिए। हालांकि, सरकार रेवेन्यू के चलते ऐसा नहीं करेगी. लिहाजा ऐसा किया जा सकता है कि होल्डिंग पीरियड को 1 साल से बढ़ाकर 2-3 साल कर दें और उसके बाद टैक्स को हटा दें। बता दें कि पिछले साल बजट में शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म दोनों कैपिटल गेन पर टैक्स में इजाफा किया गया। शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) पर टैक्स को 15% से 20% किया गया। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) के मामले में इसे 10% से बढ़ाकर 12.5% किया गया और 1 लाख छूट के दायरे को बढ़ाकर 1.25 लाख कर दिया गया। एक वर्ष के भीतर दर्ज किए गए लाभ को अल्पकालिक लाभ यानी शॉर्ट टर्म गेन माना जाता है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली घटी

उधर, एक अच्छी बात यह है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी आ रही है। यह भी एक वजह है कि मार्केट पिछले कुछ सत्रों से लगातार तेजी से भाग रहा है। 5 महीनों के दबाव ने वैल्यूएशन को लेकर विदेशी निवेशकों की चिंताओं को कम किया है। जानकारों का कहना है कि चीनी बाजार को लेकर सामने आई चेतावनी भी विदेशी निवेशकों का मिजाज बदलने का कारण हो सकती है। हाल ही में आशंका जताई गई थी कि चीन का शेयर मार्केट बड़ी गिरावट देख सकता है।

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