अमेरिकी डॉलर (US Dollar) के सामने लगातार रिकॉर्ड गिरावट झेल रही भारतीय मुद्रा (Rupee) के लिए आखिरकार एक बहुत ही राहत भरी खबर आई है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने शनिवार को जो कड़े फैसलों लिए थे उसका असर तुरंत देखने को मिला है और करेंसी मार्केट में रुपये ने जबरदस्त वापसी की है.
लगातार दूसरे दिन भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ ट्रेड कर रहा है. बाजार खुलते ही रुपये में 62 पैसे की बड़ी तेजी देखी गई और यह 95.16 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया, जबकि सोमवार को बाजार 95.78 रुपये पर बंद हुआ था. ट्रेडिंग के दौरान तो रुपया 82 पैसे की तगड़ी उछाल के साथ 94.96 के स्तर तक भी चला गया था.
रुपये में तेजी की असली वजह: RBI के ये 3 मास्टरस्ट्रोक
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने शनिवार को फॉरेक्स डेरिवेटिव्स मार्केट पर शिकंजा कसते हुए कई कड़े नियम लागू किए थे, जिन्होंने रुपये के खिलाफ हो रही सट्टेबाजी (Speculation) की कमर तोड़ दी.
- सट्टेबाजों पर तगड़ी नकेल: आरबीआई ने डॉलर पर दांव लगाने की सीमा 100 मिलियन डॉलर से सीधे घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दी और रिस्क मैनेजमेंट के लिए 20% अतिरिक्त कैश रिजर्व (FERR) रखना अनिवार्य कर दिया.
- कैंसिल कांट्रैक्ट दोबारा री-बुक करने पर रोक: अधिकृत डीलरों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि कोई ग्राहक किसी करेंसी डेरिवेटिव कांट्रैक्ट को रद्द कराता है, तो उसे दोबारा री-बुक नहीं करने दिया जाएगा.
- तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) के लिए अलग व्यवस्था: आरबीआई ने देश की सरकारी तेल कंपनियों की रोजाना की डॉलर जरूरत को सीधे पूरा करने का फैसला किया. इससे ओपन मार्केट में अचानक डॉलर की बहुत बड़ी डिमांड खत्म हो गई और रुपये पर दबाव कम हो गया.
एशियाई मुद्राओं का बुरा हाल, लेकिन भारतीय रुपया चमका
एक तरफ जहां भारतीय रुपया मजबूती की तरफ भागा, वहीं एशिया के बाकी प्रमुख देशों की करेंसी अमेरिकी डॉलर के सामने पस्त नजर आईं:
- दक्षिण कोरियाई वॉन (South Korean Won): 0.214% टूटा.
- ताइवान डॉलर (Taiwan Dollar): 0.175% गिरा.
- फिलीपीन पेसो, थाई बहत, चीनी रेनमिनबी और मलेशियाई रिंगित: इनमें भी गिरावट दर्ज की गई.
- डॉलर इंडेक्स (Dollar Index): दुनिया की 6 प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत आंकने वाला इंडेक्स 0.15% गिरकर 102.43 पर आ गया.
एशिया में केवल जापानी येन (Japanese Yen) और भारतीय रुपया ही मजबूती दर्ज कर पाए.
व्यापारियों और इंपोर्टर्स पर मिला-जुला असर
वित्तीय सलाहकार अविनाश गुप्ता के मुताबिक, रुपये की इस वापसी का बाजार पर अलग-अलग असर दिख रहा है:
छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत: एक महीने के उच्चतम स्तर के करीब रुपया पहुंचने से छोटे व्यापारियों को अपने विदेशी वेंडर्स को पेमेंट करने में काफी आसानी हो रही है.
बड़े इंपोर्टर्स के लिए चुनौती: बड़े आयातकों को अब अपनी पोजीशन हेज (सुरक्षित) करने के लिए बैंकों को FERR के रूप में अतिरिक्त चार्ज देना पड़ रहा है, जिससे उनकी लागत थोड़ी बढ़ी है.
आरबीआई की चुस्त और कड़ी नीतियों ने फॉरेक्स मार्केट में सट्टा लगाने वालों को पीछे धकेल दिया है. रुपये की यह मजबूती आने वाले दिनों में देश में आयातित महंगाई (Imported Inflation) को नियंत्रित करने में मदद करेगी, जिससे कच्चा तेल, मोबाइल-इलेक्ट्रॉनिक्स और विदेश यात्रा की लागत में स्थिरता आएगी.