भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में 21 अक्टूबर 2026 की तारीख एक बहुत बड़ा इतिहास रचने जा रही है. देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम और डिजिटल कंपनी रिलायंस जियो (Reliance Jio Platforms) अपना अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ (IPO) लेकर आ रही है. इस आईपीओ के जरिए कंपनी बाजार से 30,213 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है. आइए, जानते हैं कि 1977 में धीरूभाई अंबानी के एक छोटे से सपने से लेकर आज के इस मेगा आईपीओ तक रिलायंस का यह सफर कैसा रहा है और इसमें आम निवेशकों के लिए क्या खास है.
क्या है जियो के आईपीओ का प्राइस बैंड?
जियो के इस आईपीओ का प्राइस बैंड 1065 से 1119 रुपये तय किया गया है. इस कीमत के हिसाब से पूरी कंपनी की वैल्यू करीब 10.3 लाख करोड़ रुपये आंकी जा रही है. लेकिन यह सिर्फ पैसे जुटाने या शेयर बाजार में लिस्ट होने की खबर नहीं है, बल्कि यह भारत के सबसे बड़े बिजनेस घराने की उस कहानी का नया अध्याय है, जिसने आम आदमियों को देश की तरक्की का हिस्सेदार बनाया.
धीरूभाई अंबानी ने कैसे बदला था भारत का शेयर बाजार?
1932 में गुजरात के एक साधारण परिवार में जन्मे धीरूभाई अंबानी ने पहले छोटे-छोटे काम किए और फिर 1966 में विमल (Vimal) ब्रांड के साथ टेक्सटाइल मिल की शुरुआत की. लेकिन असली क्रांति तब आई जब 1977 में रिलायंस का आईपीओ आया. उस जमाने में शेयर बाजार और बड़े निवेश को केवल अमीर लोगों की जागीर माना जाता था. धीरूभाई ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया. उन्होंने देश के आम मध्यम वर्ग, दुकानदारों और नौकरीपेशा लोगों को शेयर बाजार में पैसे लगाने और कंपनी के मालिक (शेयरधारक) बनने के लिए प्रेरित किया. उनका मानना था कि देश की तरक्की का फायदा भारत के हर आम नागरिक को मिलना चाहिए.
जियो ने कैसे आगे बढ़ाया धीरूभाई का वही पुराना सपना?
धीरूभाई की सोच थी कि चीजें इतनी सस्ती और सुलभ हों कि देश का हर नागरिक उनका इस्तेमाल कर सके. जियो (Jio) ने डिजिटल दुनिया में बिल्कुल यही काम किया है. साल 2016 में जब जियो आया, तब इंटरनेट बहुत महंगा था. जियो ने आते ही हर भारतीय के हाथ में सस्ता और तेज हाई-स्पीड इंटरनेट थमा दिया. आज गांव-देहात का एक आम आदमी भी फोन पर यूपीआई (UPI) से पेमेंट कर रहा है, ऑनलाइन पढ़ाई कर रहा है और वीडियो देख पा रहा है. इसके पीछे जियो का बहुत बड़ा हाथ है. जैसे 1977 में आम लोगों ने रिलायंस के शेयरों में पैसा लगाकर अपनी किस्मत बदली थी, वैसे ही 2026 में आ रहा यह जियो आईपीओ आम निवेशकों को भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था (Digital Economy) में सीधे तौर पर जुड़ने का शानदार मौका दे रहा है.
आकाश और ईशा अंबानी के कंधों पर अगली पीढ़ी की जिम्मेदारी
मुकेश अंबानी के नेतृत्व के बाद अब रिलायंस की कमान तीसरी पीढ़ी यानी आकाश और ईशा अंबानी के हाथों में है. आकाश अंबानी जियो के डिजिटल और टेलीकॉम कारोबार को संभाल रहे हैं. उनके नेतृत्व में ही जियो ने देश का अपना स्वदेशी 5G नेटवर्क तैयार किया है, ताकि भारत को विदेशी टेक्नोलॉजी पर निर्भर न रहना पड़े. 21 से 23 अक्टूबर के बीच खुलने वाला जियो का यह आईपीओ सिर्फ शेयर बाजार का एक नया रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि यह उस 50 साल पुरानी विरासत का अगला कदम है, जिसने आम भारतीयों को शेयर बाजार से जोड़ा था.