जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) के प्रस्तावित आईपीओ (IPO) को लेकर शेयर मार्केट में उत्साह बढ़ता दिखाई दे रहा है. कई ब्रोकरेज फर्मों ने कंपनी की मजबूत बाजार स्थिति, बढ़ती कमाई, बेहतर नकदी प्रवाह और तकनीकी क्षमताओं को देखते हुए सकारात्मक रुख अपनाया है. विश्लेषकों का मानना है कि जियो अब केवल दूरसंचार सेवाएं देने वाली कंपनी नहीं रह गई है, बल्कि 5G, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में भी विस्तार कर रही है.
ग्रे मार्केट प्रीमियम से मजबूत लिस्टिंग की उम्मीद
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर का अनौपचारिक ग्रे मार्केट प्रीमियम करीब 251 से 252 रुपये बताया गया. 1,119 रुपये के ऊपरी मूल्य बैंड के आधार पर यह लगभग 22.5 प्रतिशत के संभावित प्रीमियम का संकेत देता है. हालांकि, ग्रे मार्केट के भाव तेजी से बदलते हैं और इन्हें शेयर की वास्तविक लिस्टिंग कीमत या मुनाफे की गारंटी नहीं माना जा सकता.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 30,213 करोड़ रुपये का यह IPO 21 से 23 अक्टूबर तक खुला रहेगा और 28 अक्टूबर को लिस्टिंग प्रस्तावित है. आईपीओ की शरुआती कीमतें 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर बताई गई है. कंपनी की योजना आईपीओ से प्राप्त 27,500 करोड़ रुपये से अपनी प्रमुख सहायक कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम के कर्ज का भुगतान करने की है.
कमाई और ग्राहक आधार कंपनी की ताकत
30 जून 2026 तक जियो के ग्राहकों की संख्या 53.33 करोड़ बताई गई है. वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का परिचालन राजस्व 14.6 प्रतिशत बढ़कर 1,46,885 करोड़ रुपये और शुद्ध लाभ करीब 30,049 करोड़ रुपये रहा. एमके ग्लोबल, जीईपीएल कैपिटल, फिलिपकैपिटल और एसबीआईकैप्स सहित कई विश्लेषकों ने कंपनी की विकास संभावनाओं और मूल्यांकन पर सकारात्मक टिप्पणियां की हैं. वहीं, सेंटरम ब्रोकिंग ने वित्त वर्ष 2026 से 2029 के बीच राजस्व, एबिटा और शुद्ध लाभ में सालाना औसतन दोहरे अंकों की वृद्धि का अनुमान जताया है.
5G, AI और ब्रॉडबैंड से आगे बढ़ने की तैयारी
जियो के पास 10 लाख किलोमीटर से अधिक फाइबर नेटवर्क और 3.60 लाख से ज्यादा नेटवर्क टावर होने की जानकारी दी गई है. जून 2026 तक कंपनी के फिक्स्ड ब्रॉडबैंड ग्राहक 2.86 करोड़ थे, जिनमें 1.4 करोड़ जियोएयरफाइबर ग्राहक शामिल थे. कंपनी का AI प्लेटफॉर्म, क्लाउड सेवाएं और उद्यमों के लिए तकनीकी समाधान भविष्य में कमाई के नए रास्ते खोल सकते हैं. बेहतर नकदी प्रवाह और घटते कैपिटल एक्सपेंड क्योर से भी निवेश की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है.