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बढ़ती इनकम से रियल एस्टेट को सपोर्ट मिल रहा है
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि रेपो रेट में 5.25% से 5.50% तक 25-बेसिस-पॉइंट की बढ़ोतरी से रियल एस्टेट सेक्टर पर कुछ समय के लिए दबाव बन सकता है, क्योंकि इससे घर खरीदने वालों और डेवलपर्स, दोनों के लिए लोन लेने की लागत थोड़ी बढ़ जाएगी. हालांकि होम-लोन की ऊंची दरों की वजह से कुछ खरीदार तुरंत घर खरीदने में थोड़ी सावधानी बरत सकते हैं, लेकिन हमें नहीं लगता कि दरों में मामूली बढ़ोतरी से घरों की कुल मांग पर कोई बड़ा असर पड़ेगा.
अर्थव्यवस्था के मजबूत बने रहने की उम्मीद
संजय मल्होत्रा ने कहा कि MPC ने माना कि जियोपॉलिटिकल घटनाक्रमों की वजह से ग्लोबल हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं. इसके बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत रही है. आर्थिक तेजी का दायरा व्यापक बना हुआ है. उम्मीद है कि अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहेगी.
घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है
MPC के बयान में कहा गया कि दूसरी तिमाही में, जुलाई-अगस्त के लिए उपलब्ध हाई-फ़्रीक्वेंसी इंडिकेटर घरेलू आर्थिक गतिविधियों में लगातार तेजी का संकेत देते हैं. घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है और इसे मजबूत विदेशी मांग का अच्छा सहारा मिल रहा है, क्योंकि सामान के एक्सपोर्ट में दोहरे अंकों (डबल-डिजिट) की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
लग्जरी घरों की मांग मजबूत बनी रहने की उम्मीद
रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी से पता चलता है कि RBI का ध्यान ग्लोबल अनिश्चितताओं, खासकर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वेस्ट एशिया के हालात के बीच महंगाई के दबाव को संभालने पर है. रेजिडेंशियल रियल एस्टेट पर इसका तुरंत असर लोन लेने की लागत के जरिए दिखेगा, लेकिन हमें उम्मीद नहीं है कि इससे घरों की असल मांग पर कोई खास बुरा असर पड़ेगा.
बैंकों के पास पैसे की स्थिति पर क्या बोले RBI गवर्नर?
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने देश के बैंकिंग सिस्टम में मौजूद नकदी (Liquidity) का हाल बताया. पिछली बैठक के बाद से बैंकों के पास औसतन 5.9 लाख करोड़ रुपये का सरप्लस (अतिरिक्त पैसा) मौजूद था. एडवांस टैक्स जमा होने और आरबीआई द्वारा पैसे सोखने के उपायों के बाद सितंबर में यह अतिरिक्त पैसा थोड़ा कम हुआ. बैंकिंग सिस्टम में ज्यादा पैसा होने के कारण अंतर-बैंक कॉल मनी रेट (Weighted Average Call Rate) निचले स्तर पर बना रहा.
महंगाई पर RBI का अलर्ट: 5.2% रह सकती है दर
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई दर (CPI Inflation) का अनुमान बढ़ाकर 5.2% कर दिया है.
महंगाई बढ़ने के मुख्य कारण:
कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून
अल नीनो (El Nino) का असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उतार-चढ़ाव
तिमाही-दर-तिमाही महंगाई का अनुमान:
Q2 (दूसरी तिमाही): 4.9%
Q3 (तीसरी तिमाही): 6.0%
Q4 (चौथी तिमाही): 5.7%
सप्लाई से जुड़ी इन चुनौतियों के कारण आने वाले दिनों में आम जनता पर महंगाई का दबाव बना रह सकता है.
भारत की तरक्की पर RBI की बड़ी खुशखबरी
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने देश की आर्थिक विकास दर (GDP Growth Forecast) का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है.
तिमाही-दर-तिमाही GDP ग्रोथ का अनुमान:
Q2 (दूसरी तिमाही): 7.2%
Q3 (तीसरी तिमाही): 6.9%
Q4 (चौथी तिमाही): 6.8%
अगले साल की Q1: 7.1%
आरबीआई के अनुसार, वैश्विक चुनौतियों और महंगाई के बावजूद भारत की आर्थिक गतिविधियां बेहद मजबूत हैं और अर्थव्यवस्था सही दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है.
देश की आर्थिक सेहत पर क्या बोले RBI गवर्नर?
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति मजबूत बनी हुई है. मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर दोनों में ही बढ़ोतरी जारी है, हालांकि रफ्तार पहले से थोड़ी धीमी हुई है. लोगों का रोजमर्रा का खर्च और बाजार में निवेश मजबूत बना हुआ है. रोजमर्रा के सामानों (Non-Durable Goods) और घरेलू हवाई यात्रा में हल्की सुस्ती दिखी है, लेकिन भारत का एक्सपोर्ट (जुलाई-अगस्त में) दोहरे अंकों में बढ़ा है.
महंगाई से निपटने के लिए RBI की कड़ी लड़ाई
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि यह ध्यान में रखना होगा कि सेकंड-राउंड इफेक्ट यानी महंगाई का असर आगे भी बने रहना और सप्लाई-साइड के दबावों जैसे कि एनर्जी और दूसरे इनपुट की प्रोडक्शन कॉस्ट में बढ़ोतरी के इनडायरेक्ट असर के बीच फर्क करना मुश्किल है, क्योंकि ये दोनों ही कोर इन्फ्लेशन और डिफ्यूजन इंडेक्स जैसे इंडिकेटर्स में मौजूद होते हैं. हालांकि महंगाई की उम्मीदें बढ़ने और महंगाई के व्यापक होने के कुछ सबूत तो हैं, लेकिन सप्लाई-साइड के दबावों के प्राइसिंग बिहेवियर यानी कीमतें तय करने के तरीके में शामिल होने के संकेत सीमित हैं.
रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) ने मुख्य रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी करके इसे 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर दिया है. रेपो रेट वह दर है जिस पर सेंट्रल बैंक बैंकों को लोन देता है. रेपो रेट में बढ़ोतरी से लोन देने की लागत बढ़ जाती है, जिसका मतलब है कि आपके लोन पर ब्याज दर बढ़ जाती है और इससे EMI में भी बढ़ोतरी हो सकती है.
पॉलिसी से पहले शेयर बाजार में गिरावट
आज सुबह 10:00 बजे RBI की MPC के फैसले से पहले, इक्विटी बेंचमार्क निफ्टी 50 और BSE सेंसेक्स गिरावट के साथ खुले. सुबह 9:21 बजे, निफ्टी 50 164 अंक या 0.72% की गिरावट के साथ 22,612.55 पर ट्रेड कर रहा था. BSE सेंसेक्स 456 अंक या 0.62% की गिरावट के साथ 72,611.58 पर था.
गोल्डमैन सैक्स का बड़ा दावा: फिर महंगी हो सकती है लोन की EMI
ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आने वाले दिनों में आम जनता को बड़ा झटका दे सकता है. रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि आरबीआई अक्टूबर और दिसंबर 2026 में रेपो रेट (Repo Rate) में 0.25%-0.25% (कुल 0.50%) की बढ़ोतरी कर सकता है.
गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, आरबीआई की पिछली एमपीसी (MPC) बैठक के मिनट्स से संकेत मिलते हैं कि खाद्य पदार्थों और ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई (Inflation) का दबाव काफी बढ़ गया है. अगर यह महंगाई लगातार बनी रहती है, तो इसे काबू में करने के लिए रिजर्व बैंक को सख्त कदम उठाने पड़ेंगे. अगर ऐसा होता है, तो बैंकों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाएगा और इसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा- आपके होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI महंगी हो जाएगी.
रेपो रेट बढ़ा तो रियल एस्टेट पर कितना पड़ेगा असर? जानें घर खरीदने वालों पर क्या होगा असर
काउंटी ग्रुप के निदेशक अमित मोदी के अनुसार, त्योहारी मौसम में ब्याज दरों का स्थिर रहना घर खरीदने वालों के भरोसे के लिए महत्वपूर्ण होता है. अगर रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी होती है तो इससे होम लोन की ईएमआई बढ़ सकती है. इसका असर खास तौर पर पहली बार घर खरीदने वाले और कीमत को लेकर अधिक संवेदनशील लोगों पर पड़ सकता है.
कुशाग्र अंसल, डायरेक्टर, अंसल हाउसिंग ने कहा कि रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर होम लोन की लागत पर पड़ता है. इससे खरीदार की ईएमआई बढ़ सकती है और कुछ लोग घर खरीदने का फैसला कुछ समय के लिए टाल सकते हैं. लेकिन अगर बढ़ोतरी सीमित रहती है तो इसका असर पूरे रियल एस्टेट बाजार पर बहुत अधिक नहीं होगा. जिन बाजारों में घरों की मांग मजबूत है, वहां खरीदार मामूली बढ़ोतरी के बावजूद खरीदारी जारी रख सकते हैं.
मिगसन ग्रुप के निदेशक यश मिगलानी ने कहा कि ब्याज दर रियल एस्टेट में मांग को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है, लेकिन यह अकेला कारक नहीं है. आज खरीदार बेहतर स्थान, अच्छी कनेक्टिविटी, आधुनिक सुविधाओं और भरोसेमंद डेवलपर को भी महत्व दे रहे हैं. इसलिए रेपो रेट में सीमित बढ़ोतरी से बाजार की रफ्तार कुछ धीमी हो सकती है, लेकिन मांग में बड़ी गिरावट जरूरी नहीं है.
रियल एस्टेट सेक्टर की क्या उम्मीदें हैं?
एसेट्स (Assetz) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुनील पारेक ने कहा कि स्थिर ब्याज दरें रेजिडेंशियल रियल एस्टेट के लिए फायदेमंद होंगी और घर खरीदारों का भरोसा बढ़ा सकती हैं, खासकर त्योहारों का मौसम आने वाला है. पारेक ने कहा कि एक ऐसी संतुलित मॉनेटरी पॉलिसी जो घर खरीदने की लागत को बहुत ज्यादा बढ़ाए बिना महंगाई को काबू में रखे, रेजिडेंशियल सेक्टर के लिए सबसे अच्छा नतीजा होगा.
रेपो रेट बढ़ती है, तो लोन महंगे हो सकते हैं
50 लाख के लोन पर ईएमआई करीब 817 रुपये तक बढ़ सकती है. कार लोन EMI की बात करें तो 10 लाख के लोन पर ईएमआई लगभग 121 रुपये बढ़ सकती है.
नीलकंठ मिश्रा को 25-bps की बढ़ोतरी की उम्मीद है, लेकिन यह रेट बढ़ाने के दौर की शुरुआत नहीं होगी
वर्ल्ड बैंक के नीलकंठ मिश्रा का मानना है कि RBI रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है, लेकिन वे इसे रेट बढ़ाने के दौर की शुरुआत नहीं मानते हैं. नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि मुझे लगता है कि शायद 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हो सकती है. लेकिन मैं इसे रेट बढ़ाने के दौर की शुरुआत के तौर पर नहीं देखता.
RBI के रेट साइज का फैसला तेल की कीमतें, ग्लोबल रेट्स और मॉनसून करेंगे
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के मुताबिक, रेट साइज़ तेल की कीमतों, ग्लोबल मॉनेटरी पॉलिसी और मॉनसून के हालात पर निर्भर करेगा. बैंक का अनुमान है कि अगर जियोपॉलिटिकल तनाव कम होता है, तो दरों में बढ़ोतरी 50-75 बेसिस पॉइंट्स तक सीमित रह सकती है, जबकि तेल की कीमतों में लंबे समय तक उछाल रहने पर यह साइज 100-125 बेसिस पॉइंट्स तक जा सकता है.
RBI 25 bps की बढ़ोतरी करेगा और FY27 तक कुल 75-bps की बढ़ोतरी का दौर चलेगा - यूनियन बैंक
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को उम्मीद है कि MPC मौजूदा समीक्षा में रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर देगी और धीरे-धीरे सख्ती (कैलिब्रेटेड टाइटनिंग) की ओर बढ़ेगी. बैंक ने अपनी रिसर्च रिपोर्ट में कहा कि हमें लगता है कि अक्टूबर में MPC रेट-हाइक (ब्याज दर बढ़ाने) का दौर शुरू करेगी, जिसमें हमारा बेसलाइन अनुमान 75 bps का है और FY27 के आखिर तक रेपो रेट 6% तक पहुंच जाएगा.
आने वाले महीनों में महंगाई 6% से ऊपर जा सकती है
बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस के अनुसार अगस्त के बाद से आर्थिक हालात में कोई खास बदलाव नहीं आया है. उस समय MPC ने आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ने की उम्मीद के बावजूद इंतजार करने का फैसला किया था. महंगाई का ताजा सरकारी आंकड़ा 4.8 प्रतिशत है, जबकि मदन सबनवीस को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में महंगाई 6 प्रतिशत से ऊपर चली जाएगी.
क्या RBI ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला दिसंबर तक टाल सकता है?
कुछ अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि RBI मौजूदा पॉलिसी रिव्यू में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा और दिसंबर से दरें बढ़ाना शुरू करेगा. दरें बढ़ाने से पहले सेंट्रल बैंक महंगाई, खरीफ की फसल और सरप्लस लिक्विडिटी (अतिरिक्त नकदी) के असर के बारे में और साफ जानकारी का इंतजार कर सकता है.
RBI MPC का ब्याज दरों पर फैसला आज सुबह 10 बजे; बढ़ोतरी होगी या दरें स्थिर रहेंगी
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा आज सुबह 10 बजे मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) के ब्याज दरों से जुड़े फैसले की घोषणा करेंगे. अभी भी सस्पेंस बना हुआ है कि सेंट्रल बैंक रेपो रेट को स्थिर रखेगा या उसमें बढ़ोतरी की घोषणा करेगा. अगर RBI आज रेपो रेट बढ़ाता है, तो यह फरवरी 2023 के बाद दरों में पहली बढ़ोतरी होगी, जब MPC ने आखिरी बार बेंचमार्क रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी की थी.
लिक्विडिटी और बाजार के हालात टाइट पॉलिसी की मांग कर रहे हैं: ICICI बैंक
बैंकिंग और वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार आरबीआई का रुख कड़ा हो सकता है. ICICI बैंक के अनुसार, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिस तरह के आर्थिक बदलाव हो रहे हैं, वे नीतिगत सख्ती (Policy Tightening) का संकेत दे रहे हैं. विदेशी मुद्रा के भारी प्रवाह (Foreign Currency Inflows) के कारण बाजार में सिस्टम लिक्विडिटी तेजी से बढ़ी है, जिसे सोखने (Absorption) के लिए सख्त कदमों की जरूरत है. ICICI बैंक को उम्मीद है कि आरबीआई इसके लिए ओपन मार्केट ऑपरेशन्स (OMO) और फॉरेक्स टूल्स का इस्तेमाल जारी रखेगा.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की महत्वपूर्ण बैठक का फैसला हो गया है. आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra) इस नीतिगत फैसले की घोषणा कर दी है. आरबीआई ने रेपो रेट में 25 bps की बढ़ोतरी की है.
रेपो रेट (Repo Rate) क्या होता है और आम इंसान पर इसका क्या असर पड़ता है?
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर रिजर्व बैंक देश के व्यावसायिक बैंकों जैसे कि SBI, HDFC, ICICI को कर्ज देता है. अगर रेपो रेट बढ़ता है (Rate Hike): बैंकों के लिए आरबीआई से कर्ज लेना महंगा हो जाता है. इसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ता है क्योंकि बैंक होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ा देते हैं, जिससे आपकी लोन की EMI महंगी हो जाती है. अगर रेपो रेट स्थिर रहता है (Rate Hold) तो आपकी मौजूदा लोन EMI में कोई तुरंत बदलाव नहीं होगा और ब्याज दरें यथावत बनी रहेंगी.
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