मुंबई की धारावी, जिसे दुनिया एशिया की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी (Informal Settlement) के रूप में जानती है, अब एक बड़े और ऐतिहासिक बदलाव की दहलीज पर खड़ी है.
अदानी एंटरप्राइजेज के मैनेजिंग डायरेक्टर (एग्रो, ऑयल एंड गैस) प्रणव अदानी ने धारावी पुनर्विकास परियोजना (Dharavi Redevelopment Project) को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने साफ कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचे) का एक मानवीय दिल होना चाहिए और इस प्रोजेक्ट में लोगों के आत्मसम्मान, रोजगार और पुनर्वास को सबसे ऊपर रखा जाएगा. प्रणव अदानी ने धारावी के विकास और मुंबई 3.0 को लेकर क्या बड़ी बातें कही हैं, यहां जानें
पीपल फर्स्ट अप्रोच: बिना विस्थापन के नया जीवन
प्रणव अदानी के अनुसार, धारावी पुनर्विकास परियोजना सिर्फ बड़ी-बड़ी इमारतें खड़ी करने की योजना नहीं है, बल्कि यह आधुनिक इतिहास की सबसे संवेदनशील शहरी बदलाव की पहल है. इस प्रोजेक्ट में इन बातों पर खास ध्यान दिया जा रहा है:
पहले नया घर, फिर शिफ्टिंग: लोगों को बेघर किए बिना, पहले उनके रहने के लिए आधुनिक और सर्वसुविधायुक्त मकान तैयार किए जाएंगे, जिसके बाद ही उन्हें शिफ्ट किया जाएगा.
छोटे कारोबारियों का बचाव: धारावी में हजारों छोटे-छोटे उद्योग-धंधे (Micro Enterprises) चलते हैं. सरकार और अडानी ग्रुप मिलकर इन्हें औपचारिक (Formal) रूप देंगे ताकि उनका रोजगार न केवल सुरक्षित रहे, बल्कि और आगे बढ़े.
आत्मा से कोई समझौता नहीं: धारावी की जो सबसे बड़ी ताकत है – उसकी एकजुटता और कम्युनिटी स्पिरिट (Community’s Soul), उसे बिना नुकसान पहुंचाए इसे एक आधुनिक आर्थिक हब (Integrated Economic Hub) में बदला जाएगा.
मुंबई 3.0 और महाराष्ट्र की आर्थिक ताकत
प्रणव अदानी ने इस विजन को मुंबई 3.0 का नाम दिया. इसका मकसद केवल मुंबई का क्षेत्रफल बढ़ाना नहीं है, बल्कि एक ऐसा महानगर बनाना है जो बेहतर कनेक्टिविटी वाला, संतुलित और हर वर्ग के लिए समावेशी (Inclusive) हो.
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र देश का इकोनॉमिक पावरहाउस है, अदानी ग्रुप महाराष्ट्र सरकार और वहां की जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है.
महाराष्ट्र के भविष्य को दो स्तंभों पर खड़ा किया जा रहा है – एक तरफ औद्योगिक श्रेष्ठता (Industrial Supremacy) और दूसरी तरफ हर नागरिक का सम्मान (Dignity for Every Citizen). उन्होंने कहा कि जब महाराष्ट्र जीतता है, तो भारत जीतता है.
धारावी का यह कायाकल्प सिर्फ झुग्गियों को हटाकर गगनचुंबी इमारतें बनाना नहीं है, बल्कि वहां रहने वाले लाखों लोगों को एक सम्मानजनक जिंदगी, पक्का घर और उनके काम-धंधे को नया आयाम देना है. अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो यह देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए शहरी विकास का एक बेहतरीन उदाहरण बनेगा.
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