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Melody डिप्लोमेसी! पीएम मोदी ने जॉर्जिया मेलोनी को गिफ्ट की मेलोडी चॉकलेट, कंपनी के शेयर में तेजी; 12 लोगों ने रखी थी नींव

सोशल मीडिया का मशहूर ‘Melodi’ हैशटैग अब हकीकत बन गया है! पीएम मोदी ने इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी को भारत की मशहूर पारले मेलोडी चॉकलेट गिफ्ट की है। जानिए क्या है मेलोडी का इतिहास।

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राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में गिफ्ट डिप्लोमेसी (उपहार देना) कोई नई बात नहीं है। कभी कोई देश दूसरे देश के राष्ट्रपति को कीमती पेंटिंग देता है, तो कभी कोई सोने का ताज। लेकिन, हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को एक ऐसा गिफ्ट दिया है, जिसने भारत के हर 90s के बच्चे को बचपन की याद दिला दी है।

जी हां! पीएम मोदी ने इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी को भारत की सबसे मशहूर और लेजेंड्री टॉफी पारले मेलोडी (Parle Melody) का एक स्पेशल पैकेट गिफ्ट किया है। जैसे ही यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर मीमर्स और फैन्स की बाढ़ आ गई है। इसके साथ ही कंपनी के शेयरों में भी तेजी देखी गई। आइए जानते हैं कि इस मीठी डिप्लोमेसी के पीछे की मजेदार कहानी क्या है और हमारी आपकी बचपन की फेवरेट ‘मेलोडी’ का इतिहास क्या है।

जब Melodi मीम बन गया हकीकत!

पिछले कुछ सालों से जब भी पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी किसी इंटरनेशनल समिट (जैसे G20 या G7) में मिलते हैं, तो सोशल मीडिया पर हैशटैग #Melodi ट्रेंड करने लगता है। दोनों नेताओं की मुस्कुराती हुई तस्वीरें इंटरनेट पर मीम्स का सैलाब ला देती हैं।

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इस बार जब दोनों नेताओं की मुलाकात हुई, तो पीएम मोदी ने इस मीम ट्रेंड को एक बेहद कूल अंदाज में अपना लिया। उन्होंने मेलोनी को भारत की ‘मेलोडी’ चॉकलेट गिफ्ट कर दी। इस गिफ्ट को पाकर इटली की पीएम भी अपनी हंसी नहीं रोक पाईं। सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं— लगता है मोदी जी के पास भी बहुत तगड़ी मीम रिसर्च टीम है!

तो आइए जान ही लेते हैं—”मेलोडी इतनी चॉकोलेटी क्यों है?”
इस मजेदार डिप्लोमेसी के बीच, आइए उस कंपनी के बारे में भी जान लेते हैं जिसने इस मेलोडी को बनाया है। मेलोडी को भारत की सबसे प्रतिष्ठित और पुरानी एफएमसीजी (FMCG) कंपनियों में से एक पारले प्रोडक्ट्स (Parle Products) बनाती है।

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पारले ने ‘मेलोडी’ को 12 लोगों ने म‍िलकर साल 1983 में लॉन्च किया था। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इसके बाहर एक कैरमल (Caramel) की लेयर होती थी और इसके अंदर रिच चॉकलेट भरी होती थी।

मेलोडी का वो विज्ञापन तो आपको याद ही होगा—”मेलोडी इतनी चॉकोलेटी क्यों है? मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ!” इस एक पंचलाइन ने इस टॉफी को भारत के हर घर की पसंद बना दिया था। आज भी यह विज्ञापन भारत के सबसे सफल विज्ञापनों में गिना जाता है।

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पारले: पारले-जी से मेलोडी तक का सफर
जिस पारले कंपनी की मेलोडी खाकर आज इटली की पीएम मुस्कुरा रही हैं, उसकी शुरुआत साल 1929 में मुंबई के विले पार्ले इलाके में एक पुरानी बंद पड़ी फैक्ट्री से हुई थी। चौहान परिवार ने सिर्फ 12 लोगों के साथ बिस्कुट और कैंडीज बनाना शुरू किया था। आज वही पारले कंपनी दुनिया का सबसे ज्यादा बिकने वाला बिस्कुट ‘Parle-G’ और मेलोडी, मैंगो बाइट, किस्मी बार जैसी मशहूर टॉफियां बनाती है।

कुल मिलाकर, पीएम मोदी के इस ‘मेलोडी’ वाले मास्टरस्ट्रोक ने यह साबित कर दिया कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति हमेशा गंभीर और बोरिंग नहीं होती, कभी-कभी यह बेहद चॉकोलेटी और मजेदार भी हो सकती है!

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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