पीएम मोदी की एक अपील से बदल गया पूरा बाजार, जून में खाद्य तेलों के आयात में आई 29% की ऐतिहासिक गिरावट!

Edible Oil Imports in India 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद जून 2026 में भारत का खाद्य तेल आयात 29% घटकर 11.46 लाख टन रह गया है। जानिए पाम और सोयाबीन तेल के आयात में आई कमी के पीछे के कारण और आंकड़े।

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Edible Oil Imports Fall: भारतीय रसोई से गायब हो रहा है विदेशी तेल? पीएम मोदी के कहने पर देशवासियों ने लिया यह बड़ा फैसला!

नई दिल्ली: हाल ही में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से एक खास अपील की थी, तो शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसका इतनी जल्दी और इतना बड़ा असर देखने को मिलेगा। पीएम मोदी की खाद्य तेल (Edible Oil) की खपत कम करने की अपील के बाद, जून 2026 में भारत का खाद्य तेल आयात सालाना आधार पर 29% गिरकर 11.46 लाख टन रह गया है।

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सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा तेल वर्ष (Oil Year) में खाद्य तेल आयात का यह अब तक का सबसे निचला स्तर है। आइए बेहद आसान शब्दों में समझते हैं कि क्या है पूरा मामला और इसके पीछे की असली वजह।

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पीएम मोदी ने की थी कौन सी अपील?

मई 2026 में, पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते तनाव और वैश्विक संकट के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान देशवासियों से राष्ट्र को मजबूत बनाने के लिए 7 बड़ी अपीलें की थीं। इनमें शामिल था:

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1. विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए खाद्य तेल (कुकिंग ऑयल) का इस्तेमाल कम करना।

2. एक साल के लिए सोना खरीदने और विदेश यात्रा करने से बचना।

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3. वर्क फ्रॉम-होम (Work From Home) को फिर से बढ़ावा देना।

4. किसानों से विदेशों से आने वाले रासायनिक उर्वरकों (Chemical Fertilisers) पर निर्भरता कम करने का आग्रह।

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आंकड़ों में समझें: कितनी आई गिरावट?
भारत दुनिया में खाद्य तेलों का सबसे बड़ा आयातक (Importer) है।

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  • जून 2025 में आयात: 16.16 लाख टन था।
  • जून 2026 में आयात: घटकर सिर्फ 11.46 लाख टन रह गया (यानी सीधे 29% की गिरावट)।
  • पाम ऑयल (Palm Oil) में कमी: पाम ऑयल का आयात महीने दर महीने 10.5% गिरकर 4.87 लाख टन पर आ गया।
  • सोयाबीन ऑयल (Soybean Oil): इसका आयात भी मई के मुकाबले जून में 23% गिरकर 3.81 लाख टन रह गया।
  • सनफ्लावर ऑयल (Sunflower Oil): हालांकि, सूरजमुखी के तेल के आयात में थोड़ी बढ़त देखी गई और यह मई के 1.95 लाख टन से बढ़कर जून में 2.42 लाख टन हो गया।

हम आयात पर इतने निर्भर क्यों हैं?
भारत अपनी कुल खाद्य तेल की जरूरत का केवल 44% हिस्सा ही खुद पैदा करता है। बाकी का 56% हिस्सा हमें विदेशों से आयात (Import) करना पड़ता है। यही वजह है कि कृषि उत्पादों में खाद्य तेल भारत के सबसे महंगे आयात बिलों में से एक है।

  • पाम ऑयल: मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से आता है।
  • सोयाबीन ऑयल: अर्जेंटीना और ब्राजील से आयात किया जाता है।
  • सनफ्लावर ऑयल: मुख्य रूप से रूस और यूक्रेन से आता है, जिससे युद्ध जैसी स्थितियों में इसकी सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ता है।

वित्तीय वर्ष 2024-25 (FY25) में भारत का खाद्य तेल का आयात बिल 17.33 अरब डॉलर था, जो देश के कुल कृषि आयात (लगभग 27 अरब डॉलर) का करीब दो-तिहाई हिस्सा है।

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नेपाल का खेल: बिना ड्यूटी के भारत आ रहा तेल
एसईओ (SEA) की रिपोर्ट में एक और दिलचस्प बात सामने आई है। साउथ एशियन फ्री ट्रेड एरिया (SAFTA) समझौते के तहत नेपाल से भारत आने वाले रिफाइंड तेल पर कोई इम्पोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) नहीं लगती। इसका फायदा उठाते हुए नेपाल ने नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच भारत को लगभग 3.38 लाख टन रिफाइंड तेल (मुख्य रूप से सोयाबीन और सूरजमुखी का तेल) एक्सपोर्ट किया। मई में यह करीब 54000 टन और जून में 32000 टन रहा।

आगे क्या?
भले ही जून के महीने में आयात में भारी गिरावट आई हो, लेकिन मौजूदा तेल वर्ष (नवंबर 2025 से जून 2026) के पहले 8 महीनों का कुल आयात अभी भी पिछले साल के मुकाबले ज्यादा (105.7 लाख टन) है। हालांकि, जून की इस गिरावट ने बढ़ती रफ्तार को काफी हद तक नियंत्रित किया है। अगर देशवासी इसी तरह स्वदेशी और सीमित उपभोग के रास्ते पर चलते रहे, तो भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने में बहुत मदद मिलेगी।

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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