क्या कोई एनआरआई (NRI) बेटी, जिसके पास विदेश की नागरिकता है, अपने पिता से भारत में कृषि भूमि (Agricultural Land) या फार्महाउस विरासत (Inheritance) में पा सकती है? विदेश में बस चुकी बेटियों के मन में यह सवाल अक्सर रहता है कि क्या भारतीय कानून उन्हें पिता की जमीन का हकदार मानते हैं या फेमा (FEMA) और आरबीआई के नियम इसमें कोई रुकावट डालते हैं? जानिये हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act), फेमा (FEMA) और राज्यों के कानून इस मामले में क्या कहते हैं.
क्या कहता है हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956
कानून के मुताबिक, अगर पिता ने वसीयत (Will) नहीं बनाई है, तो उनकी संपत्ति पर क्लास-1 के कानूनी उत्तराधिकारियों का बराबर हक होता है. एक बेटी भी क्लास-1 की ही कानूनी वारिस है, इसलिए उसे बेटे के बराबर ही हिस्सा मिलेगा. बेटी के एनआरआई (NRI) होने या विदेशी नागरिकता (Foreign Citizenship) ले लेने से उत्तराधिकार के इस अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ता. वह पिता की संपत्ति की कानूनी हकदार बनी रहती है.
फेमा (FEMA) और आरबीआई के नियम
फेमा (FEMA) नियमों के अनुसार कोई भी एनआरआई या ओसीआई (OCI) कार्डधारक भारत में नई कृषि भूमि, फार्महाउस या प्लांटेशन प्रॉपर्टी खरीद नहीं सकता है. लेकिन सबसे खास बात यह है कि अगर वही कृषि भूमि या प्रॉपर्टी किसी को विरासत (Inheritance) में मिल रही है, तो फेमा कानून इसकी इजाजत देता है. यानी एक विदेशी नागरिकता प्राप्त बेटी भी भारत में रहने वाले व्यक्ति से विरासत के रूप में कृषि भूमि हासिल कर सकती है.
राज्यों के अपने स्थानीय कानून
क्योंकि भारत में कृषि (Agriculture) राज्य सूची का विषय है, इसलिए हर राज्य को कृषि भूमि और उसके उत्तराधिकार से जुड़े नियम बनाने का अधिकार है. कुछ राज्यों के अपने कृषि भूमि सुधार या टेनेंसी (Tenancy) कानून हैं, जो हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम से ऊपर (Override) माने जाते हैं. इसलिए, यह बहुत जरूरी है कि जमीन जिस भी राज्य जैसे उत्तर प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र आदि में है, वहां के स्थानीय भू-राजस्व कानूनों (State Revenue Laws) की जांच जरूर कर ली जाए कि वे विदेशी नागरिकों को कृषि भूमि के मालिकाना हक की अनुमति देते हैं या नहीं.