नई दिल्ली: क्या आपने कभी सोचा है कि अगर आपका नोट पानी में भीग जाए, जेब में मुड़ जाए या फिर गलती से वॉशिंग मशीन में धुल जाए और फिर भी बिल्कुल कड़क और नया बना रहे, तो कितना अच्छा होगा? जी हां, दुनिया के करीब 60 देशों में ऐसा सच में होता है, क्योंकि वहां कागज के बजाय प्लास्टिक यानी पॉलीमर के नोट (Polymer Banknotes) इस्तेमाल किए जाते हैं.
आजकल दुनियाभर में इन प्लास्टिक के नोटों का क्रेज बहुत तेजी से बढ़ रहा है. ये नोट न तो आसानी से फटते हैं, न ही इन पर पानी या गंदगी का कोई असर होता है. आइए, बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि दुनिया में प्लास्टिक करेंसी का क्या हाल है और हमारा देश भारत इसे लेकर क्या तैयारी कर रहा है.
सबसे पहले किस देश ने की शुरुआत?
प्लास्टिक के नोटों की शुरुआत करने का श्रेय ऑस्ट्रेलिया को जाता है. ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला ऐसा देश था जिसने पारंपरिक कागजी नोटों को अलविदा कहकर प्लास्टिक के नोटों की तकनीक अपनाई थी. उसके बाद से दुनिया के कई देशों ने इस रास्ते पर चलना शुरू कर दिया.
इन देशों में पूरी तरह चलते हैं प्लास्टिक के नोट
दुनिया में कई ऐसे देश हैं जिन्होंने अपने यहां कागज के नोटों को पूरी तरह से बंद कर दिया है और अब वहां सिर्फ प्लास्टिक के नोट ही चलते हैं. इस लिस्ट में शामिल हैं:
- ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, रोमानिया और वियतनाम.
- ब्रुनेई, पापुआ न्यू गिनी, मालदीव, मॉरिटानिया, निकारागुआ और वानुअतु.
- ईस्टर्न कैरेबियन स्टेट्स, यूनाइटेड किंगडम (UK) और बारबाडोस.
- ओमान भी साल 2026 में 1-रियाल का नया प्लास्टिक नोट जारी करके इस खास लिस्ट में शामिल हो चुका है.
सिंगापुर, मलेशिया और भारत: जहां आधा काम हो चुका है
दुनिया के कई बड़े देश ऐसे भी हैं जो अभी पूरी तरह तो नहीं, लेकिन कुछ खास मूल्य (Denominations) के लिए प्लास्टिक नोटों का इस्तेमाल कर रहे हैं और बाकी के लिए कागज के नोट चला रहे हैं. सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, इंडोनेशिया, फिलीपींस, चीन, हॉन्गकॉन्ग, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल में कुछ नोट प्लास्टिक के आ चुके हैं.
इसके अलावा नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका, मैक्सिको, ब्राजील, चिली, यूएई, सऊदी अरब, कुवैत और इजराइल भी इस लिस्ट में हैं.
भारत का क्या है प्लान? क्या जल्द आएंगे प्लास्टिक के नोट?
भारत ने अभी तक पूरी तरह से प्लास्टिक करेंसी को नहीं अपनाया है, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस दिशा में कदम आगे बढ़ा रहा है. आरबीआई (RBI) ने पहले 10 रुपये के प्लास्टिक नोटों का एक पायलट टेस्ट (ट्रायल) किया था. अब खबर है कि बैंक एक और बड़े ट्रायल की तैयारी में है, जिसकी शुरुआत 10 रुपये और 20 रुपये के प्लास्टिक नोटों से हो सकती है.
फिलहाल पूरे देश में इसे एक साथ लागू करने की कोई तारीख तय नहीं हुई है, लेकिन छोटे नोटों से इसकी शुरुआत जल्द देखने को मिल सकती है.
कागज के मुकाबले क्यों बेस्ट हैं ये प्लास्टिक के नोट?
लाइफ होती है लंबी: ये नोट कागज के मुकाबले कई गुना ज्यादा चलते हैं, जिससे सरकार का नोट छापने का बार-बार का खर्च बचता है.
नकली नोटों पर लगाम: प्लास्टिक के नोटों में पारदर्शी विंडो (Transparent Window) और खास स्याही जैसी ऐसी तकनीक इस्तेमाल होती है, जिसकी हूबहू नकल करना नामुमकिन होता है.
वॉटरप्रूफ और डर्टप्रूफ: इन पर पानी, चाय या पसीने का कोई असर नहीं होता. इन्हें साफ रखना बेहद आसान है.
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