आखिरकार 4 साल के इंतजार के बाद IDBI बैंक के निजीकरण पर मुहर लग गई. 14 अक्टूबर बुधवार को मोदी कैबिनेट ने IDBI बैंक में 60.72% हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी दे दी है. ये डील कनाडा की दिग्गज कंपनी Fairfax Financial Holdings की सहयोगी कंपनी Canada Inc. के साथ 52878 करोड़ रुपये में हुई है. जैसे ही ये खबर आई, बैंक के 16 हजार कर्मचारियों और करोड़ों ग्राहकों के मन में एक ही सवाल है – अब हमारी नौकरी और हमारे पैसे का क्या होगा? टेंशन मत लीजिए, सरकार ने सब कुछ क्लियर कर दिया है.
10 सवालों में पूरा मामला समझिए:
IDBI बैंक किसने खरीदा?
कनाडा की कंपनी M/s Canada Inc. ने. इसकी पैरेंट कंपनी Fairfax Financial Holdings है.
Q2. डील कितने की हुई?
कुल 52878.08 करोड़ रुपये में.
Q3. क्या बैंक अब पूरी तरह प्राइवेट हो गया?
नहीं. ये पूरा निजीकरण नहीं, बल्कि रणनीतिक पुनर्गठन है. डील के बाद भी सरकार के पास 15% और LIC के पास 19% हिस्सेदारी रहेगी. मतलब सरकार और LIC मिलाकर 34% हिस्सेदारी अभी भी रखेंगे.
Q4. 16 हजार कर्मचारियों की नौकरी का क्या होगा?
सबसे बड़ा सवाल यही है. सरकार ने कहा है कि नौकरी पूरी तरह सेफ है. 1 साल तक कोई छंटनी नहीं कर सकते, ये डील में लिखा है. आपकी सीनियरिटी, सैलरी, भत्ते सब वैसे के वैसे रहेंगे. ये Going Concern डील है, मतलब बैंक जैसे चल रहा है वैसे ही चलेगा.
Q5. ग्राहकों के FD और लोन पर क्या असर?
आपके पैसे पर जीरो असर होगा. FD, सेविंग अकाउंट सब सेफ है. RBI का 5 लाख वाला बीमा पहले जैसा ही लागू रहेगा. आपके पुराने लोन की EMI और ब्याज में कोई बदलाव नहीं होगा. 3 साल तक बैंक का नाम IDBI Bank ही रहेगा.
Q6. ग्राहकों को फायदा क्या होगा?
नई कंपनी आने से ऐप, नेट बैंकिंग, कस्टमर केयर ज्यादा फास्ट और मॉडर्न होने की उम्मीद है. यानी बेहतर सुविधा की उम्मीद कर सकते हैं.
Q7. सरकार और LIC कितना बेच रहे हैं?
कुल 60.72%. इसमें सरकार का 30.48% और LIC का 30.24% हिस्सा है.
Q8. बैंक की कीमत कैसे तय हुई?
शेयर मार्केट के भाव को नहीं देखा. दो स्वतंत्र एजेंसियों ने सरकारी बैंकों के अकाउंट देखकर कीमत तय की.
Q9. क्या पहले IDBI पर RBI ने रोक लगाई थी?
हां, साल 2017 में हालत खराब होने पर RBI ने PCA में डाल दिया था. फिर हालत सुधरी तो साल 2021 में रोक हटा ली.
Q10. ये पूरी प्रोसेस कब शुरू हुई?
7 अक्टूबर 2022 को. अब 14 अक्टूबर 2026 को कैबिनेट ने फाइनल मंजूरी दी.
सीधे शब्दों में कहे तो ग्राहक और कर्मचारी दोनों के लिए घबराने की कोई बात नहीं है. इस डील से बैंक और मजबूत ही होगा.