Isha Ambani On Reliance Jio: कॉलेज का असाइनमेंट ऑनलाइन सबमिट करने की एक नाकाम कोशिश, बातचीत की एक ऐसी शुरुआत बनी, जिससे आगे चलकर रिलायंस जियो का जन्म हुआ. ईशा अंबानी ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को कंपनी के प्रपोज्ड इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) से पहले, कंपनी के सफर के बारे में चर्चा करते हुए ये किस्सा शेयर किया.
जियो का विचार कैसे आकार लेने लगा?
2009-2010 के दिनों को याद करते हुए ईशा अंबानी ने बताया कि वो और उनके जुड़वां भाई, आकाश अंबानी, अमेरिका में पढ़ाई कर रहे थे और कॉलेज की छुट्टियों में मुंबई आए हुए थे. जब उन्होंने अपना असाइनमेंट अपलोड करने की कोशिश की, तो इंटरनेट काम नहीं कर रहा था, जिस वजह से वो अपना असाइनमेंट सबमिट नहीं कर पाईं.
इस घटना के बाद इस बात पर चर्चा शुरू हुई कि आखिर भारत में पश्चिमी देशों जैसी डिजिटल कनेक्टिविटी क्यों नहीं है. ईशा के मुताबिक, आकाश का मानना था कि एक डिजिटल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म कंपनी बनाने से इस कमी को दूर किया जा सकता है.
इसके बाद साल 2016 में जियो लॉन्च हुआ. जियो प्लेटफॉर्म्स की डायरेक्टर ईशा ने बताया कि ये पहल रिलायंस इंडस्ट्रीज की उस कार्यशैली का विस्तार है, जिसमें लंबे समय के लिए निवेश करना, बड़े पैमाने पर काम करना और अनुशासित तरीके से योजनाओं को लागू करना शामिल है.
रिलायंस का विजन और लॉन्ग टर्म अप्रोच
ईशा ने अपने दादा धीरूभाई अंबानी की विरासत को भी याद किया, जिन्होंने 1977 में रिलायंस इंडस्ट्रीज को पब्लिक कंपनी बनाया था. उन्होंने कहा कि समूह का व्यापक विजन यह सुनिश्चित करना था कि भारतीय भी देश की आर्थिक वृद्धि और समृद्धि में हिस्सेदार बन सकें.
उन्होंने परिवार की ‘ग्रोथ ही जीवन है’ (Growth is Life) वाली सोच को दोहराते हुए कहा कि कारोबार खड़ा करने के लिए तात्कालिक लक्ष्यों से आगे सोचना पड़ता है और आने वाले दशकों के लिए निवेश करना पड़ता है. ईशा ने कहा, ‘रिलायंस में हम सिर्फ आज या कल के लिए नहीं, बल्कि आने वाले दशकों के लिए निर्माण करते हैं.’
उन्होंने फाइनेंशियल डिसिप्लिन और कारोबार बनाने, कैश जनरेट करने और फिर फ्यूचर ग्रोथ में उसे दोबारा निवेश करने की रणनीति पर भी जोर दिया. उन्होंने बताया कि जियो के मूल सिद्धांतों में बड़ी सोच रखना, निडर होकर फैसले लेना, लगातार इनोवेशन करना और एक्सिलेंस हासिल करने की कोशिश करना शामिल है.
जियो IPO का इंतजार
जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपने प्रपोज्ड IPO के लिए 1065 से 1119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है, जिसमें 27 करोड़ तक फ्रेश शेयर शामिल होंगे. प्राइस बैंड के अपर लेवल पर, इस इश्यू से तकरीबन 30213 करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं, जो इसे अब तक का भारत का सबसे बड़ा पब्लिक ऑफरिंग बना सकता है. ये प्रपोज्ड इश्यू अक्टूबर 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के 27870 करोड़ रुपये के IPO से भी बड़ा है. ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से, जियो प्लेटफॉर्म्स का अनुमानित मार्केट वैल्यूएशन तकरीबन 10.3 लाख करोड़ रुपये बैठता है.
मौजूदा जानकारी के मुताबिक बोलियां 21 से 23 अक्टूबर के बीच लगाई जाएंगी, जबकि एंकर इंवेस्टर्स के लिए बोलियां 19 अक्टूबर को होंगी. शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को होने की उम्मीद है. इससे मिलने वाली रकम का इस्तेमाल टेलीकॉम सब्सिडियरी रिलायंस जियो इंफोकॉम के कर्ज को चुकाने और कंपनी की सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा.