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बीपी, शुगर और सिरदर्द जैसी आम बीमारियों के नाम पर नहीं खारिज होगा इंश्योरेंस क्लेम! उपभोक्ता अदालत का बड़ा फैसला

Health Insurance Claim Verdict: उपभोक्ता अदालत ने साफ किया है कि बीपी, शुगर और सिरदर्द जैसी आम बीमारियों को छिपाने का बहाना बनाकर बीमा कंपनियां क्लेम खारिज नहीं कर सकतीं. जानिए कोर्ट का पूरा आदेश.

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बीपी और शुगर बताकर अब इंश्‍योरेंस कंपन‍ियां क्लेम खारिज नहीं कर सकती. उपभोक्ता अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. (फोटो - एआई )

स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) क्लेम लेने वालों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर आई है. अक्सर बीमा कंपनियां पहले से बीमारी होने (Pre-existing Disease) या बीमारी छिपाने का बहाना बनाकर मरीजों का मेडिकल क्लेम खारिज कर देती हैं. लेकिन अब उपभोक्ता अदालत (Consumer Court) ने इस पर एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाया है.

सेंट्रल जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने साफ कर दिया है कि बीपी (हाई ब्लड प्रेशर), शुगर (डायबिटीज), जोड़ों का दर्द और सिरदर्द जैसी आम बीमारियों के आधार पर कोई भी बीमा कंपनी आपका क्लेम खारिज नहीं कर सकती है.

उपभोक्ता अदालत ने फैसले में क्या कहा?

आयोग की पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज की आधुनिक जीवनशैली और तनावभरी जिंदगी में बीपी, मधुमेह, जोड़ों का दर्द या सिरदर्द होना बेहद आम बात है. इन्हें रोग छिपाना या गंभीर पूर्व बीमारी नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने साफ किया कि अगर बीमा कंपनी क्लेम खारिज करना चाहती है, तो यह साबित करने की जिम्मेदारी कंपनी की होगी कि ग्राहक को पॉलिसी लेते समय बीमारी की पक्की जानकारी थी और उसने जानबूझकर इसे छिपाया था. केवल कयास या मनगढ़ंत तर्कों के आधार पर क्लेम नहीं रोका जा सकता.

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क्या था पूरा मामला?
दिल्ली के रोहिणी इलाके में रहने वाले 65 वर्षीय बुजुर्ग यशपाल बहल ने साल 2019 में चोलामंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस कंपनी से 7.5 लाख का हेल्थ इंश्योरेंस लिया था. जुलाई 2021 में इलाज के दौरान उनका कुल खर्च करीब 4.71 लाख रुपये आया. जब उन्होंने क्लेम जमा किया, तो बीमा कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि मरीज को पिछले 4 साल से हाई बीपी था और उन्होंने यह बात पॉलिसी लेते समय छिपाई थी. बाद में कंपनी ने उनकी पॉलिसी भी कैंस‍िल कर दी.

जब मामला उपभोक्ता अदालत पहुंचा, तो बीमा कंपनी मरीज के 4 साल पुराने बीपी का कोई भी मेडिकल रिकॉर्ड, डॉक्टर की पर्ची या जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश नहीं कर सकी.

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कोर्ट का फैसला: ब्याज और मुआवजे के साथ मिलेगा पैसा
अदालत ने बीमा कंपनी की इस हरकत को सरासर गलत और सेवा में कमी माना. आयोग ने चोलामंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस कंपनी को ये आदेश दिए:

4.71 लाख का भुगतान करें और इसके साथ 6% सालाना ब्याज भी चुकाई जाए.

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मानसिक प्रताड़ना का मुआवजा भी देने को कहा. पीड़ित को हुई परेशानी के लिए 25000 का मुआवजा दिया जाए.

अदालत ने मुकदमा खर्च भी देने को कहा. कोर्ट ने कहा क‍ि कानूनी लड़ाई में हुए खर्च के रूप में 15000 अलग से दिए जाएं.

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कैंसल की गई बीमा पॉलिसी को भी गलत ठहराते हुए उसे बहाल करने का निर्देश दिया.

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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