E-85, E-100 Fuel Approval: सरकार ने E-85 और 100% एथनॉल ईंधन को दी हरी झंडी, क्या सस्ता होगा पेट्रोल? जानिए पूरी डिटेल

E-100 Ethanol Fuel Approval: केंद्र सरकार ने 100% एथनॉल (E-100) और E-85 ईंधन को मंजूरी दे दी है. फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए नए नियम जारी हुए हैं. जानिए क्या इससे पेट्रोल सस्ता होगा और आपकी कार पर क्या असर पड़ेगा.

Government Approves E85 and E100 Ethanol Fuel Central Motor Vehicles Rules Amendment Flex Fuel Vehicles Details in Hindi.

सरकार ने 100% एथनॉल ईंधन को मंजूरी दे दी है. सौ फीसदी एथनॉल वाला तेल फ्लेक्‍स कारों में इस्‍तेमाल होगा. (फोटो - एआई)

कच्चे तेल (Crude Oil) के बढ़ते दामों और प्रदूषण से राहत पाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने 100 फीसदी शुद्ध एथनॉल (E-100) और E-85 जैसे अधिक एथनॉल मिश्रण वाले बायोफ्यूल (Biofuel) के इस्तेमाल को आधिकारिक मंजूरी दे दी है. इसके लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियम-1989 (Central Motor Vehicles Rules) में संशोधन की अधिसूचना जारी की गई है.

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सरकार के इस फैसले से न केवल देश की विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम होगी, बल्कि गाड़ियों से निकलने वाले जहरीले धुएं और प्रदूषण में भी भारी कमी आएगी. जान‍िये E-100 ईंधन क्या है, क्या इससे पेट्रोल सस्ता होगा और आपकी मौजूदा कार पर इसका क्या असर पड़ेगा.

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क्या है E-100 और E-85 ईंधन?

E-100 तेल 100% शुद्ध एथनॉल ईंधन है, जिसमें 1% भी पेट्रोल नहीं मिलाया जाता. एथनॉल मुख्य रूप से गन्‍ने, मक्के और अन्य फसलों के अवशेषों से तैयार होने वाला एक पर्यावरण के अनुकूल बायोफ्यूल है. E-85 में 85% एथनॉल और 15% सामान्य पेट्रोल का मिश्रण होता है. ई-20 फ‍िलहाल पेट्रोल पंपों पर सामान्य पेट्रोल मिल रहा है, उसमें 20% तक एथनॉल म‍िलाया जा रहा है.

क्या आपकी पुरानी कार में डल सकेगा E-100?
नहीं! सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के अधिकारियों ने साफ किया है कि E-100 या E-85 ईंधन का इस्तेमाल केवल उन्हीं फ्लेक्स-फ्यूल (Flex-Fuel) वाहनों में किया जा सकेगा, जिन्हें इसके लिए खास तौर पर डिजाइन और प्रमाणित किया गया हो. साधारण पेट्रोल या E-20 पर चलने वाली पुरानी कार में E-100 नहीं डाला जा सकता, क्योंकि एथनॉल के कारण सामान्य इंजन के फ्यूल पंप, सील और पाइप खराब हो सकते हैं.

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फ्लेक्स-फ्यूल कारों के इंजन, फ्यूल इंजेक्टर और इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट (ECU) को इस तरह बनाया जाता है कि वे 100% पेट्रोल से लेकर 100% एथनॉल तक किसी भी अनुपात में बिना किसी रुकावट के चल सकें.

क्या सस्ता पड़ेगा पेट्रोल और आम आदमी को क्या होंगे फायदे?
एथनॉल का उत्पादन देश के भीतर होता है, इसलिए इसकी कीमत कच्चे तेल आयात करने की तुलना में काफी कम होती है. एथनॉल-आधारित गाड़ियां चलाने की लागत सामान्य पेट्रोल के मुकाबले कम आ सकती है. E-100 के इस्तेमाल से गाड़ियों से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड और जहरीले हाइड्रोकार्बन में बहुत कमी आएगी.

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भारत अपना 90% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है, जिस पर लाखों करोड़ रुपये खर्च होते हैं. एथनॉल बढ़ने से देश का पैसा देश में ही रहेगा. हालांक‍ि इससे फ‍िलहाल पेट्रोल की कीमत पर कोई खास असर नहीं द‍िखने वाला है. लेक‍िन भव‍िष्‍य में पेट्रोल पर न‍िर्भरता कम होने के कारण भारतीय खर्चों पर इसका असर जरूर द‍िख सकता है. इसके अलावा गन्‍ने और मक्के की मांग बढ़ने से देश के किसानों की आमदनी बढ़ेगी और एथनॉल प्लांट लगाने से नए रोजगार पैदा होंगे.

एथनॉल ईंधन की चुनौतियां
एथनॉल की ऑक्टेन रेटिंग तो अधिक होती है, जिससे इंजन पर दबाव कम पड़ता है, लेकिन सामान्य पेट्रोल के मुकाबले इसमें प्रति लीटर ऊर्जा थोड़ी कम होती है. इस वजह से प्रति लीटर माइलेज में हल्की गिरावट आ सकती है. गाड़ियों के पुर्जों को एथनॉल-फ्रेंडली बनाना जरूरी है, इसल‍िए ऑटोमोबाइल कंपनियां नए मॉडल पेश कर रही हैं, जैसे क‍ि मारुति सुजुकी ने फ्लेक्स-फ्यूल कार पेश की है.

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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