Strike Alert: आज फ‍िर हड़ताल पर हैं ऑनलाइन डिलीवरी एप्स और प्लेटफॉर्म; जानें क्‍या है वजह

हालांकि दिल्ली जैसे कुछ शहरों में कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार हड़ताल का असर मिला-जुला है, लेकिन कई बड़े शहरों जैसे हैदराबाद और बेंगलुरु में बड़े स्तर पर प्रदर्शन की खबरें हैं.

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ऑनलाइन डिलीवरी एप्स और प्लेटफॉर्म से जुड़े गिग वर्कर्स आज हड़ताल पर

आज 3 फरवरी 2026 को देशभर के गिग वर्कर्स जैसे जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट और जेप्टो के राइडर्स ने अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरने और काम बंद करने का ऐलान किया है. यह विरोध प्रदर्शन Gig and Platform Service Workers Union (GIPSWU) के नेतृत्व में हो रहा है. इससे पहले 26 जनवरी को भी उन्‍होंने हड़ताल की थी, लेक‍िन उनका कहना है क‍ि तब कोई समाधान नहीं न‍िकला था. आइये जानते हैं क‍ि ग‍िग वर्कर्स ये हड़ताल क्‍यों कर रहे हैं और उनकी क्‍या मांगे हैं.

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हड़ताल क्यों हो रही है?

गिग वर्कर्स का कहना है कि वे लंबे समय से सिस्टम के शोषण का शिकार हो रहे हैं. उनकी बड़ी शिकायतों में से एक कम आमदनी और सुरक्षा की कमी होना भी है. इसके अलावा और भी कई वजहें हैं.

बिना बताए ID ब्लॉक करना: कंपनियां बिना किसी ठोस जांच या नोटिस के वर्कर्स की आईडी ब्लॉक कर देती हैं, जिससे उनकी रोजी-रोटी छिन जाती है.

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असुरक्षित 10-मिनट डिलीवरी : हालांक‍ि इसमें काफी हद तक राहत म‍िली है, लेक‍िन अब भी कई जगहों पर 10 मिनट में सामान पहुंचाने के दबाव की वजह से राइडर्स की जान जोखिम में रहती है और दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं.

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कम आमदनी और कोई सुरक्षा नहीं: पेट्रोल के दाम बढ़ रहे हैं, लेकिन प्रति ऑर्डर मिलने वाला पैसा कम होता जा रहा है. साथ ही, उन्हें न तो पेंशन मिलती है और न ही बीमा (Insurance) की सही सुविधा.

महिलाओं की सुरक्षा: महिला गिग वर्कर्स खासकर अर्बन कंपनी जैसी ब्यूटी और घरेलू सेवाओं वाली ने सुरक्षा और कार्यस्थल पर सम्मान की कमी को लेकर अपनी आवाज उठाई है.

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क्‍या चाहते हैं ग‍िग वर्कर्स ?
केंद्रीय कानून:
गिग वर्कर्स को मजदूर के रूप में औपचारिक पहचान मिले और उनके लिए एक अलग केंद्रीय कानून बने.

न्यूनतम वेतन: कम से कम 20 रुपये प्रति किलोमीटर का भुगतान या 24,000 रुपये मासिक वेतन तय हो.

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ID ब्लॉकिंग पर रोक: बिना पारदर्शी जांच के आईडी ब्लॉक करने के सिस्टम को तुरंत खत्म किया जाए.

सामाजिक सुरक्षा: ईएसआई (ESI), पीएफ (PF) और दुर्घटना बीमा जैसी सुविधाएं अनिवार्य हों.

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पारदर्शी एल्गोरिदम: कंपनियां अपने उस ‘सॉफ्टवेयर/एल्गोरिदम’ को पारदर्शी बनाएं जिससे राइडर्स की रेटिंग और कमाई तय होती है.

आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?
जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट और जेप्टो से खाना या राशन मंगाने वालों को देरी या Service Unavailable जैसे मैसेज दिख सकते हैं. इसके अलावा ओला और उबर जैसी सेवाओं पर भी इसका आंशिक असर हो सकता है. ई-कॉमर्स जैसे अमेजन, फ्लिपकार्ट आद‍ि की डिलीवरी भी कुछ इलाकों में प्रभावित हो सकती है.

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लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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