भारत की पहली बुलेट ट्रेन (Mumbai-Ahmedabad Bullet Train Project) का काम तेजी से चल रहा है. 320 किमी प्रति घंटे की तूफानी रफ्तार से दौड़ने वाली यह ट्रेन न केवल यात्रा का समय घटाएगी, बल्कि इसमें टेक्नोलॉजी का ऐसा तगड़ा तड़का लगाया जा रहा है, जो भारतीय रेलवे में पहली बार देखने को मिलेगा.
अक्सर जब हमारी सामान्य ट्रेनें पटरी (ट्रैक) बदलती हैं, तो जोर का झटका लगता है और ट्रेन की स्पीड काफी धीमी करनी पड़ती है. लेकिन सोचिए, 320 की स्पीड में अगर झटका लगा तो क्या होगा?
इसी झटके और थरथराहट (Vibrations) को खत्म करने के लिए प्रोजेक्ट की कमान संभाल रही NHSRCL (National High-Speed Rail Corporation Ltd) एक खास टेक्नोलॉजी लेकर आई है, जिसे कहते हैं- Canted Turnouts.
आइए, इस अद्भुत टेक्नोलॉजी का पूरा गणित और बुलेट ट्रेन से जुड़ी लेटेस्ट टाइमलाइन के बारे में जानते हैं.
Canted Turnout क्या है और यह झटके कैसे रोकती है?
जब कोई ट्रेन मोड़ पर मुड़ती है, तो आपने ध्यान दिया होगा कि बाहर वाली पटरी थोड़ी ऊपर उठी हुई होती है. इसे Cant (Banking) कहते हैं, जो ट्रेन को पलटने या छिटकने से बचाती है. जब नॉर्मल ट्रेन ट्रैक बदलती है (Turnout सेक्शन), तो वहां यह बैंकिंग नहीं होती. इस वजह से पहियों पर अचानक से दबाव पड़ता है, ट्रेन हिलती है और ड्राइवर को स्पीड काफी कम करनी पड़ती है.
बुलेट ट्रेन के ट्रैक-चेंजिंग पॉइंट (Turnout) पर भी बैंकिंग यानी झुकाव को बनाए रखा जाता है. इससे ट्रेन 320 की स्पीड में भी जब पटरी बदलती है, तो यात्रियों को झटके का अहसास तक नहीं होता और सफर बिल्कुल मक्खन की तरह स्मूथ रहता है. पटरियों को हाई-स्पीड पर मजबूती से लॉक करने और सही दिशा में मोड़ने के लिए स्पेशल हाई-स्पीड पॉइंट मशीन्स लगाई जा रही हैं. इससे पटरियों और पहियों की घिसावट भी कम होगी.
टनल से निकलते ही क्यों होता है बम जैसा धमाका?
जब कोई हाई-स्पीड ट्रेन टनल (सुरंग) में घुसती है, तो वह हवा को किसी पिस्टन की तरह आगे धकेलती है. जब ट्रेन टनल के दूसरे छोर से बाहर निकलती है, तो हवा के भारी दबाव की वजह से सोनिक बूम या तेज धमाके (Booming Sound) जैसी आवाज होती है.
इस धमाके और एयर प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए मुंबई-अहमदाबाद रूट की 8 पहाड़ी सुरंगों के एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर 16 वेंटिलेटेड हुड्स (Ventilated Hoods) बनाए जा रहे हैं. भारतीय रेलवे के इतिहास में यह तकनीक भी पहली बार इस्तेमाल हो रही है.
कब पटरी पर दौड़ेगी देश की पहली बुलेट ट्रेन?
फिलहाल बुलेट ट्रेन की बॉडी, बोगी, प्रोपल्शन सिस्टम और व्हील्स का Squeeze Test चल रहा है ताकि 320 की स्पीड पर इसकी मजबूती को परखा जा सके.
पहला सेक्शन (दिसंबर 2026): कॉरिडोर के पहले सिविल सेक्शन का काम दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है.
पहली कमर्शियल राइड (15 अगस्त 2027): सुरत से वापी के बीच (लगभग 100 किमी) पहली बुलेट ट्रेन सेवा 15 अगस्त 2027 को शुरू करने का प्लान है. यह दूरी ट्रेन महज 20 मिनट में तय कर लेगी.
पूरा प्रोजेक्ट (दिसंबर 2029): मुंबई (BKC) से अहमदाबाद (साबरमती) तक का पूरा 508 किमी का रूट दिसंबर 2029 तक तैयार होने की उम्मीद है.
14 सितंबर 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के तत्कालीन पीएम शिंजो आबे द्वारा शुरू किया गया यह ड्रीम प्रोजेक्ट अब धरातल पर उतर रहा है. यह सिर्फ एक ट्रेन नहीं, बल्कि भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर का एक नया युग है.