त्योहारों के इस सीजन में आम जनता की रसोई के बजट पर बड़ा झटका लग सकता है. आने वाले दिनों में सरसों, सोयाबीन और पाम ऑयल समेत सभी तरह के खाने के तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है दुनिया में पाम तेल के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता देश इंडोनेशिया में पड़ रहा सूखा और अल नीनो का असर. इंडोनेशिया में पाम तेल का उत्पादन घट गया है. जानिये इंडोनेशिया के सूखे का असर आपकी रसोई और जेब पर क्यों पड़ने वाला है.
इंडोनेशिया में सूखा और बायोडीजल की मांग
इंडोनेशियाई पाम ऑयल एसोसिएशन के अनुसार, सूखे के कारण पाम तेल का उत्पादन करीब 50 लाख टन तक घट सकता है. इंडोनेशिया अपनी नई B50 नीति लागू करने जा रहा है, जिसके तहत पाम तेल का इस्तेमाल घरेलू बायोडीजल बनाने में ज्यादा होगा. बायोडीजल के लिए 1.63 से 1.7 करोड़ टन पाम तेल की जरूरत पड़ेगी, जिससे भारत जैसे देशों को निर्यात करने के लिए तेल कम बचेगा.
भारत की रसोई पर इसका क्या असर होगा?
भारत अपनी कुल जरूरत का करीब 55-60% खाने का तेल दूसरे देशों से आयात करता है. पाम तेल मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से आता है. जब पाम तेल महंगा होगा, तो लोग सोयाबीन और सरसों तेल की तरफ रुख करेंगे. मांग बढ़ने के कारण सरसों और सोयाबीन तेल के दाम भी तेज हो जाएंगे, जिसका असर कीमतों पर होगा.
सितंबर महीने में ही वैश्विक बाजार में खाद्य तेलों की कीमतें 11.2% तक बढ़ चुकी हैं. कच्चा पाम तेल 1285 डॉलर प्रति टन और सोयाबीन तेल 1314 डॉलर प्रति टन के स्तर पर पहुंच गया है.
बहरहाल, इंडोनेशिया में वैश्विक आपूर्ति घटने और बायोडीजल के लिए पाम तेल का इस्तेमाल बढ़ने से आने वाले महीनों में भारत में रिफाइंड, सरसों और सोयाबीन तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल सकता है.