एथनॉल टेंडर में डबल प्रिफरेंस का पेंच! सस्ता एथनॉल होते हुए भी महंगा क्यों खरीद रही हैं तेल कंपनियां?

1,100 करोड़ लीटर एथनॉल टेंडर में LTOA धारकों को डबल प्रिफरेंस देने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. BIEPA ने OMCs और पेट्रोलियम मंत्रालय से की पारदर्शी खरीद की मांग की है. जानिए पूरी रिपोर्ट.

double preference complication in ethanol tenders Why are oil companies buying expensive ethanol when cheaper options are available

BIEPA का कहना है क‍ि हमारे कई स्वतंत्र प्लांट टूटे चावल और FCI चावल से 60-64 रुपये वाला एथनॉल देने को तैयार हैं, जो क्‍वालिटी, रेगुलेटरी और सप्लाई के सारे मानक पूरे करता है. (File Photo)

भारत में पेट्रोल में 20% एथनॉल मिलाने का लक्ष्य लगभग पूरा होने वाला है, लेकिन इस लक्ष्य को पूरा करने वाले एथनॉल उत्पादकों के बीच ही अब झगड़ा शुरू हो गया है. मामला है ESY 2026-27 के 1100 करोड़ लीटर एथनॉल टेंडर का है. इस टेंडर को लेकर स्वतंत्र एथनॉल उत्पादकों के संगठन BIEPA ने पेट्रोलियम मंत्रालय और सरकारी तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) से समीक्षा की मांग की है.

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असली मुद्दा क्या है?

LTOA वालों को डबल फायदा सरकार ने पहले कुछ बड़ी कंपनियों के साथ LTOA – Long Term Offtake Agreement किया था. मतलब, आप प्लांट लगाओ, हम लंबे समय तक आपका एथनॉल खरीदने की कोशिश करेंगे. वाइस प्रेस‍िडेंट अक्षय मोदी ने कहा क‍ि नए टेंडर में इन LTOA धारकों को दो स्तर पर प्राथमिकता दी जा रही है. पहली प्राथमिकता – Clause 6.2 के तहत LTOA वालों को उनकी कॉन्ट्रैक्टेड क्वांटिटी के लिए सबसे पहले एथनॉल सप्लाई का मौका द‍िया जा रहा है, चाहे बाजार में उनसे सस्ता एथनॉल मौजूद हो.

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वाइस प्रेस‍िडेंट अक्षय मोदी ने कहा क‍ि दूसरी प्राथमिकता Annexure-III, Clause B(2)(II)(i)(a) के तहत दी जा रही है. अक्षय मोदी के अनुसार कॉन्ट्रैक्टेड क्‍वांटिटी के अलावा, उनकी EOI में स्वीकृत पूरी डिजाइन क्षमता तक भी best endeavour basis पर प्राथमिकता दी जाती है. BIEPA पूछ रही है क‍ि जब Clause 6.2 में ही कॉन्ट्रैक्टेड क्वांटिटी सुरक्षित है, तो उसके ऊपर अतिरिक्त प्राथमिकता क्यों? और ये Clause 6.8 जो पब्लिक प्रोक्योरमेंट में लगाया जा रहा है, वो तो मूल EOI या टेंडर डॉक्यूमेंट में था ही नहीं.

सस्ता छोड़ महंगा क्यों?

BIEPA का कहना है क‍ि हमारे कई स्वतंत्र प्लांट टूटे चावल और FCI चावल से 60-64 रुपये वाला एथनॉल देने को तैयार हैं, जो क्‍वालिटी, रेगुलेटरी और सप्लाई के सारे मानक पूरे करता है. फिर भी प्राथमिकता के नाम पर 68.86 रुपये वाला महंगा एथनॉल खरीदा जा रहा है. BIEPA अध्यक्ष पुष्पिंदर सिंह मामिक ने कहा क‍ि लॉन्ग टर्म एग्रीमेंट का मतलब क्‍वांटिटी एश्योर करना था, प्राइस एडवांटेज नहीं. जहां सस्ता और कंप्लायंट एथनॉल उपलब्ध है, वहां उसे तवज्जो मिलनी चाहिए. इससे OMCs को और अंत में सरकारी खजाने और आम जनता को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा.

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टेंडर में इस बार कीमतें इस तरह हैं:
मक्का से बना एथनॉल:
68.86 रुपये /लीटर (66.07 + 2.79 रुपये इंसेंटिव)
टूटे चावल : 64.00 रुपये/लीटर
FCI सरप्लस चावल: 60.32 रुपये/लीटर

स्वतंत्र उत्पादकों पर खतरा
BIEPA का सबसे बड़ा डर निवेश को लेकर है. इनमें से ज्यादातर स्वतंत्र डेडिकेटेड एथनॉल प्लांट सरकार की ही Ethanol Blended Petrol Programme और DFPD की ब्याज सब्सिडी स्कीम को देखकर लगे थे. बैंक लोन लेकर लगे. इनको पर्यावरण क्लियरेंस भी इसी शर्त पर मिला था कि ये सिर्फ ब्लेंडिंग के लिए ही एथनॉल बनाएंगे, कहीं और बेच नहीं सकते. अब अगर उन्हें सिर्फ बचा-खुचा (residual) ऑर्डर मिलेगा तो प्लांट अंडर-यूटिलाइज्ड रहेंगे. बैंक लोन चुकाने में दिक्कत आएगी. इनसे जुड़े किसान जो अनाज सप्लाई करते हैं और ग्रामीण रोजगार प्रभावित होगा.

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क्‍या हैं BIEPA की मांगें

  • कीमत को भी कॉन्ट्रैक्ट के साथ तवज्जो दी जाए
  • अतिरिक्त प्राथमिकता को वापस लिया जाए या उसका कानूनी आधार स्पष्ट किया जाए
  • LTOA और Non-LTOA सभी योग्य सप्लायर्स के बीच पारदर्शी और बराबर आवंटन हो
  • इस प्राथमिकता से कितना अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा, उसका खुलासा हो
  • फाइनल आवंटन से पहले टेंडर में संशोधन किया जाए

BIEPA ने साफ कहा है कि वो सरकार के एथनॉल ब्लेंडिंग लक्ष्य के साथ है, लेकिन इसके लिए एक फाइनेंशियली सस्टेनेबल और कॉम्पिटिटिव इंडस्ट्री जरूरी है. ल‍िहाजा ये लड़ाई सिर्फ टेंडर की नहीं, बल्कि पॉलिसी की मंशा की है. अब देखना ये है क‍ि क्या सरकार सस्ती और पारदर्शी खरीद चाहती है, या सिर्फ पुराने कॉन्ट्रैक्ट को बचाने के लिए महंगी खरीद भी करने को तैयार है? ESY 2026-27 का आवंटन इसी सवाल का जवाब देगा.

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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