क्या आपने कभी सोचा है कि एक वक्त ऐसा भी था जब शेयर बाजार या बड़ी कंपनियों में निवेश करना सिर्फ चंद अमीर लोगों का विशेषाधिकार माना जाता था? गुजरात के एक छोटे से गांव चोरवाड़ के एक स्कूल टीचर के बेटे ने इस सोच को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया. धीरुभाई अंबानी का एक ही मानना था- “सपना देखो, बड़ा देखो और उस सपने में देश के आम आदमी को भी हिस्सेदार बनाओ.”
आज रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) केवल एक कंपनी नहीं, बल्कि भारत के आम नागरिकों की आकांक्षाओं और साझा समृद्धि (Shared Prosperity) की प्रतीक बन चुकी है. जिस सपने की शुरुआत धीरुभाई ने की थी, उसे रिलायंस बदस्तूर जारी रख रही है. 21 अक्टूबर को JIO कंपनी अपना IPO ला रही है. Jio Platforms का IPO भारत का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक ऑफरिंग होने की उम्मीद है, जिसका लक्ष्य लगभग 30,000 करोड़ से 37700 रुपये करोड़ जुटाना है.
1977 का ऐतिहासिक IPO: जब आम आदमी पहली बार बना मालिक
17 साल की उम्र में यमन के एक पेट्रोल पंप पर काम करने वाले धीरुभाई जब मुंबई आए, तो उनके पास सिर्फ दो चीजें थीं – कड़ा परिश्रम और भारत के लोगों पर अटूट विश्वास. साल 1977 में रिलायंस ने जब अपना पहला आईपीओ (IPO) निकाला, तो इतिहास रच दिया.
आम आदमी को हिस्सेदारी: उन्होंने पहली बार भारत के आम मध्यमवर्गीय परिवारों, शिक्षकों और छोटे व्यापारियों को शेयर बाजार में आमंत्रित किया.
साझा संपत्ति (Wealth Creation): जिन आम परिवारों ने उन पर शुरुआती भरोसा जताया, उनके छोटे-छोटे निवेश आगे चलकर करोड़ों की संपत्ति में बदल गए.
विश्वास का रिश्ता: धीरुभाई ने साबित किया कि देश के विकास में आम जनता केवल दर्शक नहीं, बल्कि बराबर की भागीदार है.
जामनगर रिफाइनरी: पिता के सपने को मुकेश अंबानी ने दिया आकार
धीरुभाई के दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी बनाने के सपने को उनके बेटे मुकेश अंबानी ने पूरा किया. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की पढ़ाई बीच में छोड़कर लौटे मुकेश अंबानी ने महज 36 महीने (3 साल) के रिकॉर्ड समय में गुजरात के जामनगर में दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स खड़ा कर दिया.
यह रिलायंस के बड़े पैमाने पर काम करने (Scale) और दीर्घकालिक विजन का सबसे बड़ा सबूत था.
धीरुभाई अंबानी से शुरू हुआ यह सफर आज साबित करता है कि जब कोई कॉर्पोरेट घराना खुद के साथ-साथ देश और उसके लोगों को आगे बढ़ाता है, तो इतिहास रचा जाता है.