मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और तनाव के बीच एक राहत भरी खबर आई है. कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई अब युद्ध से पहले वाले स्तर के करीब (लगभग 98%) पहुंच रही है. सऊदी अरब ने होर्मुज स्ट्रेट की जगह अपनी अल्टरनेटिव ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन से तेल की सप्लाई तेजी से बढ़ा दी है.
लेकिन इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड अभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बना हुआ है. आइए, समझते हैं कि ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल का क्या गणित चल रहा है, किन देशों में डीजल के दाम डबल हो चुके हैं और भारत पर इसका क्या असर पड़ा है.
इंटरनेशनल मार्केट का ताजा हाल
ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव फिलहाल 103 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है.
डब्ल्यूटीआई (WTI Crude): अमेरिकी बेंचमार्क WTI में थोड़ी नरमी आई है और यह 3.5% गिरकर 89 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया है.
जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट के मुताबिक मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल का एक्सपोर्ट बढ़कर 1.75 करोड़ बैरल रोजाना पहुंच गया है, जो युद्ध से पहले का 98% है. हालांकि, रिफाइंड प्रॉडक्ट्स (जैसे पेट्रोल-डीजल) की सप्लाई अभी भी युद्ध से पहले के स्तर का सिर्फ 58% ही है.
किन देशों में डबल हो गए डीजल के दाम?
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की वजह से दुनिया के कई देशों में फ्यूल इंफ्लेशन (ईंधन की महंगाई) ने हाहाकार मचा रखा है. ईरान युद्ध की शुरुआत से अब तक लेबनान और नाइजीरिया में डीजल के दाम 104% तक यानी डबल से भी ज्यादा बढ़ चुके हैं. इंडोनेशिया, पनामा, बोलीविया और ग्वाटेमाला में भी डीजल की कीमतें 81% से 87% तक चढ़ चुकी हैं. मलेशिया में पेट्रोल 72%, नाइजीरिया में 65.9%, फिलीपींस में 63.5%, म्यांमार में 58.9% और हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान में 51.9% तक महंगा हो चुका है.
भारत में क्या हैं पेट्रोल-डीजल के रेट्स?
दुनिया भर में मचे इस गदर के बीच भारत में ईंधन की कीमतें काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं. जहां दुनिया के बाकी देशों में 50% से 100% तक दाम बढ़े हैं, वहीं भारत में यह बढ़ोतरी सिर्फ 8% के आसपास ही सीमित रही है. सरकारी तेल विपणन कंपनियों (HPCL, BPCL, IOCL) ने 30 सितंबर के लिए जारी रेट्स में कोई बदलाव नहीं किया है:
दिल्ली में पेट्रोल: 102.12 रुपये प्रति लीटर
दिल्ली में डीजल: 95.20 रुपये प्रति लीटर
अमेरिका का बड़ा दांव और ओपेक (OPEC) की योजना
अमेरिका जारी करेगा 4 करोड़ बैरल तेल: अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले ईंधन की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए बाइडन प्रशासन अपने इमरजेंसी ऑयल रिजर्व से 4 करोड़ बैरल तक तेल जारी कर सकता है.
ओपेक की बैठक पर नजर: सऊदी अरब और रूस की अगुवाई वाला OPEC+ समूह इस वीकेंड होने वाली बैठक में नवंबर महीने के लिए अपना प्रोडक्शन कोटा स्थिर (Unchanged) रखने का फैसला ले सकता है.
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच कच्चे तेल की सप्लाई सुधरना एक पॉजिटिव संकेत है. हालांकि, ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर के पार रहने से जब तक रिफाइंड पेट्रोल-डीजल का उत्पादन पूरी तरह सामान्य नहीं होता, तब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल बनी रहेगी. भारत में फिलहाल कीमतें स्थिर रहना आम जनता के लिए बड़ी राहत की बात है.