पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) में एक बार फिर युद्ध के बादल गहराने लगे हैं और इसका सीधा असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं, जिसने भारत समेत दुनिया भर की चिंता बढ़ा दी है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल आयात (Import) करता है. ऐसे में तेल की कीमतों में $1 की तेजी भी देश के क्रूड इंपोर्ट बिल को करीब 18,000 करोड़ रुपये बढ़ा देती है. जानिये इस संकट का आपकी जेब, देश की अर्थव्यवस्था और भारत सरकार की तैयारियों पर क्या असर पड़ेगा.
फ्रेट और किराए में 10 गुना तक उछाल
युद्ध के खतरे के कारण समुद्र के रास्ते माल भेजने का भाड़ा आसमान छू रहा है. Drewry World Container Index के अनुसार, 40 फीट के एक कंटेनर का किराया जो पिछले साल तक $1,746 था, वह अब बढ़कर $4,585 हो चुका है. फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) के मुताबिक, पश्चिम एशियाई बंदरगाहों के लिए कंटेनर का भाड़ा $800 से बढ़कर सीधे $8,000 से $10,000 तक पहुंच गया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) जैसे संवेदनशील इलाकों में जहाजों और क्रू का मिलना मुश्किल हो रहा है, जिससे भारत का निर्यात (Export) और जरूरी सामानों की सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है.
क्या महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल?
अक्टूबर महीने में कच्चे तेल की औसत कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल रही है, जो पिछले 12 सालों का सबसे उच्चतम मासिक स्तर है. इसके अलावा डीजल और पेट्रोल के अंतरराष्ट्रीय दाम भी काफी ऊपर हैं, जिससे सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है. फिलहाल सरकार ने टैक्स में कटौती और कंपनियों को कुछ राहत दी थी, लेकिन अगर क्रूड ऐसे ही महंगा बना रहा, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल और ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ना तय माना जा रहा है.
भारत सरकार की कितनी है तैयारी?
वैश्विक संकट के बावजूद भारत सरकार इस बार पहले से बेहतर स्थिति में नजर आ रही है. सरकार और फर्टिलाइजर कंपनियों ने कीमतें कम रहने के दौरान अगले सीजन के लिए पर्याप्त खाद और ईंधन का स्टॉक जमा कर लिया है. केंद्र सरकार को आरबीआई (RBI) से मिलने वाला डिविडेंड और टैक्स कलेक्शन बेहतर रहा है, जिससे सरकार के पास राजकोषीय घाटे को कंट्रोल में रखने का बफर मौजूद है. हालांकि, आयात बिल बढ़ने से चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) और रुपये की कीमत पर दबाव पड़ेगा, जिससे विदेशी निवेशकों (FPI) का रुख प्रभावित हो सकता है.
संबंधित खबरें
ड्राइविंग लाइसेंस के नियमों में बड़ा बदलाव, जानें क्या-क्या बदला
2 hrs agoमहर्षि वाल्मीकि जयंती और लक्ष्मी पूजा पर इन शहरों में बंद रहेंगे आज बैंक
3 hrs agoधनतेरस से पहले सोने-चांदी के दामों में बंपर गिरावट, कौन-सा विकल्प बेहतर?
16 hrs agoJio IPO: 1.39 करोड़ आवेदनों के साथ ₹7.4 लाख करोड़ की बिड्स
16 hrs ago28 अक्टूबर को हो सकता है डीए का ऐलान, 63% तक पहुंचेगा महंगाई भत्ता
1 day agoअब साबुन, बिस्किट, चॉकलेट और तेल खरीदना होगा महंगा, फोन रिचार्ज पर भी असर
2 days agoJK टायर के दाम फिर बढ़ेंगे 5%, जानें क्यों महंगे हो रहे हैं टायर
2 days ago30 अक्टूबर को आएगी पीएम किसान की 24वीं किस्त, जानें किसे मिलेंगे 2000 रुपये
2 days agoसरकार ने किया बड़ा ऐलान, Cancer की दवाएं 70% तक होंगी सस्ती
2 days agoआज चौथा शनिवार, देशभर में बैंक बंद, कल भी छुट्टी
2 days agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines