Crude Oil Crisis: कच्चा तेल $115 के पार, क्या भारत में महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल और राशन? जानें सरकार की क्या है तैयारी

Crude Oil Surge 2026: पश्‍च‍िम एशिया में तनाव के बीच कच्चा तेल $115 के पार पहुंच गया है. भारत के आयात बिल में उछाल, फ्रेट भाड़े में 10 गुना बढ़ोतरी और पेट्रोल-डीजल की स्थिति पर जानिए ड‍िटेल.

Crude Oil Price Above 115 Dollars Impact on Indian Economy Petrol Diesel Freight Rates and Government Preparation in Hindi.

ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत $115 के पार पहुंच गई है. (Photo - AI)

पश्‍च‍िम एशिया (मध्य पूर्व) में एक बार फिर युद्ध के बादल गहराने लगे हैं और इसका सीधा असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं, जिसने भारत समेत दुनिया भर की चिंता बढ़ा दी है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल आयात (Import) करता है. ऐसे में तेल की कीमतों में $1 की तेजी भी देश के क्रूड इंपोर्ट बिल को करीब 18,000 करोड़ रुपये बढ़ा देती है. जान‍िये इस संकट का आपकी जेब, देश की अर्थव्यवस्था और भारत सरकार की तैयारियों पर क्या असर पड़ेगा.

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फ्रेट और किराए में 10 गुना तक उछाल

युद्ध के खतरे के कारण समुद्र के रास्ते माल भेजने का भाड़ा आसमान छू रहा है. Drewry World Container Index के अनुसार, 40 फीट के एक कंटेनर का किराया जो पिछले साल तक $1,746 था, वह अब बढ़कर $4,585 हो चुका है. फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) के मुताबिक, पश्‍च‍िम एशियाई बंदरगाहों के लिए कंटेनर का भाड़ा $800 से बढ़कर सीधे $8,000 से $10,000 तक पहुंच गया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) जैसे संवेदनशील इलाकों में जहाजों और क्रू का मिलना मुश्किल हो रहा है, जिससे भारत का निर्यात (Export) और जरूरी सामानों की सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है.

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क्या महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल?
अक्टूबर महीने में कच्चे तेल की औसत कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल रही है, जो पिछले 12 सालों का सबसे उच्चतम मासिक स्तर है. इसके अलावा डीजल और पेट्रोल के अंतरराष्ट्रीय दाम भी काफी ऊपर हैं, जिससे सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है. फिलहाल सरकार ने टैक्स में कटौती और कंपनियों को कुछ राहत दी थी, लेकिन अगर क्रूड ऐसे ही महंगा बना रहा, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल और ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ना तय माना जा रहा है.

भारत सरकार की कितनी है तैयारी?
वैश्‍व‍िक संकट के बावजूद भारत सरकार इस बार पहले से बेहतर स्थिति में नजर आ रही है. सरकार और फर्टिलाइजर कंपनियों ने कीमतें कम रहने के दौरान अगले सीजन के लिए पर्याप्त खाद और ईंधन का स्टॉक जमा कर लिया है. केंद्र सरकार को आरबीआई (RBI) से मिलने वाला डिविडेंड और टैक्स कलेक्शन बेहतर रहा है, जिससे सरकार के पास राजकोषीय घाटे को कंट्रोल में रखने का बफर मौजूद है. हालांकि, आयात बिल बढ़ने से चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) और रुपये की कीमत पर दबाव पड़ेगा, जिससे विदेशी निवेशकों (FPI) का रुख प्रभावित हो सकता है.

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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