दिवाली का त्योहार नजदीक है और घरों में मिठाइयों से लेकर पकवानों की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. लेकिन त्योहारों के इस माहौल में किचन का बजट थोड़ा गड़बड़ा सकता है. इंडियन पल्स एंड ग्रेंस एसोसिएशन (IPGA) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक महीने में देश में चने की कीमत 11%, मूंग 10.6%, तुअर/अरहर 6.5% और मटर के दाम 6% तक बढ़ चुके हैं.
लेकिन सवाल यह उठता है कि जब सरकार के पास दालों का भरपूर स्टॉक मौजूद है, तो फिर त्योहारों से ठीक पहले दालों के भाव क्यों बढ़ रहे हैं?
दालों के दाम में कितना आया उछाल?
थोक मंडियों में पिछले एक महीने और एक हफ्ते में दालों के रेट तेजी से चढ़े हैं. चना 1 महीने में 11% और हफ्ते भर में 5.5% महंगा हुआ है. यानी पिछले साल से तुलना करें तो पिछले साल के मुकाबले 23% महंगा हो गया है.
वहीं मूंग 1 महीने में 10.6% और हफ्ते भर में 4.3% महंगा हुआ है. तुअर या अरहर दाल की बात करें तो 1 महीने में 6.5% और हफ्ते भर में 2.4% महंगी हुई है. जबकि मटर या पीली मटर (Matar) 1 महीने में 6% और हफ्ते भर में 3% महंगी हुई है. ये साल-दर-साल 47% महंगी हो गई है.
अगर खुदरा (Retail) दामों की बात करें, तो सरकारी आंकड़ों के अनुसार चना दाल लगभग 88.72 रुपये प्रति किग्रा, तुअर दाल 125.72 रुपये प्रति किग्रा, मूंग दाल 112.14 रुपये प्रति किग्रा और मसूर दाल 90.43 रुपये प्रति किग्रा के आसपास बिक रही है.
क्या सिर्फ दीवाली की मांग ही वजह है या खेल कुछ और है?
दीपावली पर बेसन, मिठाइयों और पकवानों की वजह से मांग (Demand) बढ़ना तो तय है, लेकिन केवल मांग बढ़ना ही एकमात्र कारण नहीं है. असल खेल भविष्य की फसल और आयात (Imports) को लेकर पैदा हुई आशंकाओं का है.
- चने पर अल-नीनो और ऑस्ट्रेलिया का असर : चना भारत में सबसे ज्यादा खाई जाने वाली दाल है और यह रबी की फसल है. कृषि मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि एल-नीनो (El Nino) और असमान बारिश के कारण इस बार रबी सीजन में मिट्टी में नमी (Soil Moisture) की कमी हो सकती है. दूसरी तरफ, भारत को चना भेजने वाले सबसे बड़े देश ऑस्ट्रेलिया में इस बार चने की पैदावार 40-50% तक घटने का अनुमान है. इस वजह से भारत में चने का आयात 45% तक घट गया है.
- तुअर दाल और बारिश की मार : तुअर खरीफ की फसल है. महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक इलाकों में कम बारिश और सूखे जैसे हालात के कारण पैदावार घटने की आशंका जताई जा रही है.
- रूस-यूक्रेन युद्ध और मटर के दाम : चने के विकल्प के रूप में इस्तेमाल होने वाली पीली मटर की सप्लाई रूस-यूक्रेन युद्ध और अंतरराष्ट्रीय वैश्विक दिक्कतों के कारण प्रभावित हुई है, जिससे मटर भी महंगी हो गई है.
क्या देश में दालों की वाकई कमी है?
बिलकुल नहीं. यह कोई दालों का अकाल या भारी किल्लत नहीं है. साल 2025-26 में भारत में रिकॉर्ड 274.09 लाख टन दालों का उत्पादन हुआ है, जो पिछले साल से 6.7% ज्यादा है.
सरकार के पास बफर स्टॉक के रूप में 45 लाख टन से ज्यादा दालें सुरक्षित रखी हुई हैं, जबकि मानक 35 लाख टन का है. इसमें लगभग 19.5 लाख टन चना और 10 लाख टन तुअर शामिल है. अभी भले ही गोदाम भरे हों, लेकिन जब व्यापारियों को लगता है कि अगली फसल कम आ सकती है, तो वे पहले से ही भाव बढ़ाना शुरू कर देते हैं.
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