बजट 2026 में रक्षा क्षेत्र (Defence) के लिए कई क्रांतिकारी घोषणाएं होने की उम्मीद है. साल 2025 में हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' और वैश्विक स्तर पर बढ़ते युद्ध के खतरों को देखते हुए, इस बार का रक्षा बजट न केवल बड़ा होगा, बल्कि इसका फोकस पूरी तरह 'टेक्नोलॉजी' पर शिफ्ट हो सकता है. विशेषज्ञों और उद्योग निकायों (जैसे FICCI) का अनुमान है कि इस बार रक्षा बजट में 20% तक की भारी बढ़ोतरी हो सकती है.
कुल बजट 7 लाख करोड़ से 7.5 लाख करोड़ रुपये के पार जा सकता है. नए हथियारों और विमानों की खरीद के लिए आवंटित राशि को 1.8 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख करोड़ रुपये के करीब किया जा सकता है.
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कौन सी नई घोषणाएं हो सकती हैं?
'ईस्टर्न डिफेंस कॉरिडोर' की घोषणा
उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के बाद, सरकार पूर्वी भारत (Eastern India) में एक नए डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की घोषणा कर सकती है. यह 'पूर्वोदय योजना' के तहत पश्चिम बंगाल, ओडिशा या बिहार के औद्योगिक क्लस्टर्स को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम होगा.
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AI और आधुनिक युद्ध (AI-Led Warfare)
भविष्य के युद्धों को देखते हुए, सरकार एक नई 'नेशनल डिफेंस एआई मिशन' या विशेष PLI स्कीम ला सकती है. 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद ड्रोन तकनीक और ड्रोन-रोधी सिस्टम के लिए अलग से भारी फंड आवंटित होने की उम्मीद है. नेटवर्क-केंद्रित ऑपरेशन और ऑटोनॉमस हथियारों के विकास पर जोर रहेगा.
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स्वदेशी लड़ाकू विमानों के लिए बड़ा फंड
भारतीय वायु सेना में फाइटर स्क्वाड्रनों की कमी को पूरा करना इस बजट की प्राथमिकता होगी. 'तेजस Mk1A' के उत्पादन में तेजी लाने और फ्रांस के साथ 114 राफेल विमानों के सौदे को आगे बढ़ाने के लिए शुरुआती फंड का ऐलान हो सकता है. वहीं सुखोई-30 MKI विमानों के आधुनिकीकरण (Super Sukhoi program) के लिए भी विशेष आवंटन संभव है.
DRDO और स्टार्टअप्स के लिए
DRDO के लिए 10000 करोड़ तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी की मांग की गई है.वहीं 'iDEX' जैसी योजनाओं के तहत स्टार्टअप्स और MSMEs को मिलने वाली वित्तीय सहायता और ग्रांट को दोगुना किया जा सकता है.