ब्रिक्स देश “BRICS Pay” जैसी डिजिटल भुगतान प्रणालियों और स्थानीय मुद्राओं (जैसे रुपया-रुबल व्यापार) पर अधिक ध्यान दे रहे हैं. साल 2026 के भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में इस दिशा में किसी ‘गोल्ड-बैक्ड’ (सोने पर आधारित) यूनिट या डिजिटल करेंसी की घोषणा की संभावना जताई जा रही है. ऐसे में ब्रिक्स (BRICS) देश (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका + नए सदस्य) अगर एक नई कॉमन मुद्रा (Common Currency) लाते हैं तो इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा और डॉलर को यह कितना कमजोर कर सकता है? आइये जानते हैं:
यदि ब्रिक्स करेंसी हकीकत में आती है, तो इसके परिणाम कुछ इस तरह हो सकते हैं:
डॉलर का एकाधिकार (Dominance) कम होगा
अभी दुनिया का लगभग 80-90% व्यापार डॉलर में होता है. अगर ब्रिक्स देश (जो दुनिया की 40% से ज्यादा आबादी और करीब 30% GDP का प्रतिनिधित्व करते हैं) अपनी करेंसी में व्यापार शुरू कर देते हैं, तो डॉलर की मांग वैश्विक बाजार में तेजी से गिरेगी. इसे ‘डी-डॉलराइजेशन’ (De-dollarization) कहा जाता है.
यह भी पढ़ें : RBI ने CIBIL को लेकर बनाया नया नियम, इस दिन से दिखने लगेगा असर
डॉलर की मांग घटने से उसकी कीमत गिर सकती है, जिससे अमेरिका में महंगाई बढ़ सकती है क्योंकि उनके लिए आयात महंगा हो जाएगा.
‘शस्त्रीकरण’ (Weaponization) का डर खत्म होगा
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका ने रूस को डॉलर के ग्लोबल पेमेंट सिस्टम (SWIFT) से बाहर कर दिया था. ब्रिक्स देश अपनी करेंसी लाकर खुद को ऐसे अमेरिकी प्रतिबंधों से सुरक्षित करना चाहते हैं. इससे देशों की ‘आर्थिक संप्रभुता’ बढ़ेगी.
भारत के लिए फायदे और चुनौतियां
भारत को कच्चा तेल या अन्य सामान खरीदने के लिए बार-बार डॉलर नहीं खरीदने पड़ेंगे, जिससे ट्रांजेक्शन फीस बचेगी और विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) पर दबाव कम होगा. भारत को यह संतुलन बनाना होगा कि नई करेंसी पर कहीं चीन (युआन) का दबदबा न हो जाए. भारत अपनी करेंसी ‘रुपये’ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने को प्राथमिकता दे रहा है.
यह भी पढ़ें : Gold Silver Rate: सोना, चांदी रिकॉर्ड ऊंचाई पर, ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की टैरिफ धमकी का दिखा असर
क्या डॉलर पूरी तरह खत्म हो जाएगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर को पूरी तरह रिप्लेस करना फिलहाल नामुमकिन है. क्योंकि अमेरिकी डॉलर के पीछे दुनिया की सबसे पारदर्शी और स्थिर कानूनी प्रणाली है. ब्रिक्स देशों (जैसे रूस और चीन) की अर्थव्यवस्थाओं में उतनी पारदर्शिता की कमी है. डॉलर हर जगह स्वीकार्य है. नई करेंसी को इस स्तर तक पहुंचने में दशकों लग सकते हैं.
संबंधित खबरें
G7 देशों का बड़ा फैसला, 10 करोड़ बैरल तेल जारी करने पर हुए सहमत; क्या घटेंगी पेट्रोल-डीजल की कीमतें?
4 hrs agoDharavi Redevelopment Project: लोगों को पहले मिलेगा घर, सुरक्षित रहेंगे छोटे कारोबार- जानिए अदानी ग्रुप का धारावी मेकओवर विजन
9 hrs agoGold Silver Rate: क्या दिवाली तक 1.80 लाख से महंगा हो जाएगा सोना? जानिए क्या हैं आज के रेट्स
9 hrs agoPM Kisan 24th Installment Update: दिवाली से पहले आएगी पीएम किसान की 24वीं किस्त! लिस्ट में अपना नाम पक्का करने के लिए तुरंत करें ये 3 काम
10 hrs agoBank Open or Closed Tomorrow: क्या कल 3 अक्टूबर को खुलेंगे बैंक? जाने से पहले देख लें RBI की यह लिस्ट
11 hrs agoEPFO Wage Ceiling Increase 2026: कटकर आई सितंबर की सैलरी? EPFO के नए नियम से घटी इन-हैंड सैलरी
12 hrs agoDA Hike: 8वें वेतन आयोग से पहले सिक्किम सरकार का बड़ा तोहफा! DA 5% बढ़ा, जानिए किसे कितना फायदा मिलेगा
15 hrs agoGandhi jayanti: स्वदेशी का प्रतीक खादी कैसे बना करोड़ों का बिजनेस मॉडल? जानिए 2 अक्टूबर पर बिजनेस का बड़ा ट्रेंड
15 hrs agoiPhone Users Good News: भारत में शुरू हुई Apple Pay सर्विस, जानिए बिना OTP और PIN के कैसे होंगे पेमेंट
16 hrs agoNew Property Tax : हरियाणा में 11 अक्टूबर से लागू होगा नया प्रॉपर्टी टैक्स, जानिए 10 अक्टूबर तक कैसे उठाएं छूट का फायदा
19 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines