अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चे तेल (Crude Oil) को लेकर एक बेहद चिंताजनक खबर आ रही है. सऊदी अरब में हुए हालिया हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमत उछलकर $111 प्रति बैरल के पार पहुंच गई है. वहीं, अमरीकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी $99 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है.
पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव और युद्ध के कारण दुनिया भर में ईंधन की सप्लाई ठप होने की आशंका गहरा गई है. जानिये कच्चे तेल में आई इस ताजा तेजी की मुख्य वजहें क्या हैं और इसका ग्लोबल मार्केट पर क्या असर पड़ रहा है.
सऊदी अरब में हमले के बाद क्यों बिगड़े हालात?
सऊदी अरब में हुए घातक हमलों के बाद अमेरिका ने वहां स्थित अपने दूतावासों से कर्मचारियों और उनके परिवारों को वापस लौटने का आदेश दे दिया है. इस घटना ने तेल आपूर्ति (Oil Supply) को लेकर बाजार में भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है.
अगर इस साल के आंकड़ों पर गौर करें तो कच्चा तेल 80% से ज्यादा महंगा हो गया है. इसके पीछे अमेरिका-ईरान संघर्ष और फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से तेल आपूर्ति में आई बाधाएं सबसे बड़ी वजहें हैं. अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा ये तनाव पिछले 9 महीने से चल रहा है.
स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज में खतरा:
तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज के रास्ते जहाजों की आवाजाही पर हमले तेज हो गए हैं. हूती विद्रोहियों और ईरान समर्थित गुटों ने सऊदी अरब और समुद्री तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने से कमर्शियल शिप्स अपनी लोकेशन छुपाकर तेल की सप्लाई करने को मजबूर हैं.
अमेरिका-इजराइल के नए हमले की योजना?
न्यू यॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में होने वाले मिडटर्म चुनावों के बाद अमेरिका और इजराइल ईरान के खिलाफ नए सिरे से सैन्य हमले की योजना बना रहे हैं. इस खबर ने क्रूड ऑयल के दामों में आग में घी का काम किया है.
रूस से अमेरिका जाएगा डीजल:
इन सब के बीच एक राहत भरी खबर यह है कि रूसी डीजल से भरा एक टैंकर अमेरिका के लिए रवाना होने वाला है, जो मॉस्को और अमेरिका के बीच हुए सप्लाई समझौते का हिस्सा है.
आम आदमी पर क्या होगा असर?
कच्चे तेल की कीमतें जब भी 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जाती हैं, तो इसका सीधा असर भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर पड़ता है. पेट्रोल-डीजल और लॉजिस्टिक्स (ट्रांसपोर्ट) का खर्च बढ़ने से खाने-पीने की चीजें और रोजमर्रा का सामान महंगा हो सकता है. दूसरी ओर क्रूड के दामों में बढ़ोतरी से भारतीय शेयर बाजार पर नकारात्मक दबाव देखने को मिल सकता है.