Brent Oil Price Hike Alert: दुनिया भर में महंगाई का खतरा एक बार फिर मंडराने लगा है. मई के महीने के बाद पहली बार खाड़ी देशों का कच्चा तेल (ब्रेंट क्रूड) 110 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है. बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई कम होने की आशंका के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 3.7% की बड़ी तेजी दर्ज की गई है. क्रूड ऑयल में लगी इस आग के पीछे की असली वजह क्या है और दुनिया पर खासतौर से भारत पर इसका क्या असर पड़ेगा, आइये जानते हैं.
तेल की कीमतें बढ़ने के 3 सबसे बड़े कारण
मिडिल ईस्ट और रूस-यूक्रेन में बढ़ता तनाव:
दुनिया के प्रमुख तेल निर्यातक (Export) केंद्रों के आसपास जंग और तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. ईरान समर्थित हूथी विद्रोही लगातार सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले कर रहे हैं. वहीं दूसरी ओर, रूस और यूक्रेन भी एक-दूसरे के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर यानी रिफाइनरी और पावर ग्रिड को निशाना बना रहे हैं. रूस की रियाजान तेल रिफाइनरी पर हाल ही में हुए हमले के बाद वहां काम रोकना पड़ा है.
अमेरिकी सांसदों ने रोका रूसी डीजल समझौता:
रूस को युद्ध से कमाई करने से रोकने के लिए अमेरिकी सांसदों ने एक नया बिल पेश किया है. इसका मकसद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मास्को के बीच उस डील को रोकना है, जिसके तहत 100 मिलियन बैरल रूसी डीजल जारी किया जाना था. अगर यह डील रुकती है और रूसी डीजल ग्लोबल मार्केट में नहीं आता, तो दुनिया भर की रिफाइनरियों पर क्रूड प्रोसेसिंग बढ़ाने का दबाव बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा.
युद्ध और गहराने का डर:
यूरेशिया ग्रुप के विश्लेषकों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में संघर्ष और गहराने की आशंका 35% से बढ़कर अब 65% हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के एक हालिया इंटरव्यू के बाद यह डर और बढ़ गया है कि चुनाव के बाद ईरान पर अमेरिका कड़े सैन्य कदम उठा सकता है, जिससे फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से होने वाली तेल सप्लाई पूरी तरह ठप हो सकती है.
इस साल 70% तक महंगा हुआ कच्चा तेल
इस साल कच्चे तेल की कीमतों में 70 फीसदी से ज्यादा का उछाल आ चुका है. कच्चे तेल के साथ-साथ डीजल जैसे रिफाइंड ईंधन की कीमतें भी आसमान छू रही हैं. यूरोप में डीजल के फ्यूचर्स रेट इस साल दोगुने से भी ज्यादा हो चुके हैं.
आगे क्या होगा?
अगर वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल और डीजल की सप्लाई इसी तरह बाधित रही, तो आने वाले दिनों में भारत समेत पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल और परिवहन (Transport) की लागत बढ़ना तय है, जिससे रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं.