इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर 'मेक इन इंडिया' को अगले स्तर पर ले जाने के लिए केंद्र सरकार ने अब सख्त रुख अख्तियार किया है. केंद्रीय आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत भाग लेने वाली कंपनियों को साफ संदेश दिया है कि यदि उन्हें सरकारी सहायता जारी रखनी है, तो उन्हें भारत में प्रोडेक्ट्स की 'डिजाइनिंग' में सार्थक निवेश करना ही होगा.
'डिजाइन क्षमता' बनाना अनिवार्य
दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि कंपनियों के लिए अपनी इन-हाउस डिजाइन क्षमताओं में निवेश करना अनिवार्य होगा. उन्होंने चेतावनी दी कि यह कदम उन कंपनियों को बाहर का रास्ता दिखाएगा जो एक मजबूत डोमेस्टिक इकोसिस्टम बनाने के प्रति गंभीर नहीं हैं. वैष्णव ने इंडस्ट्री की अब तक की प्रतिक्रिया पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि प्रगति उम्मीदों से काफी कम रही है.
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फंड रोकने की दी चेतावनी
मंत्री ने कंपनियों को क्वालिटी और डिजाइन क्षमताओं को मजबूत करने की धीमी गति पर आगाह किया. उन्होंने कहा, 'अगर उद्योग सरकार की मांगों के अनुरूप कदम नहीं उठाता है, तो हम आगे के भुगतान या मंजूरी को रोकने के लिए तैयार हैं.' सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उन्होंने उन परियोजनाओं के लिए भी फंड रोकने की बात कही जिन्हें पहले ही मंजूरी मिल चुकी है.
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मंत्री ने चेतावनी दी, 'जिन एप्लीकेशन को मंजूरी मिल चुकी है, अगर शर्तें पूरी नहीं की तो हम पैसे भी नहीं देंगे.'
बता दें, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने अब तक सब्सिडी योजना के चौथे चरण के तहत 29 आवेदनों को मंजूरी दी है, जिसमें कुल 7,104 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है. ECMS के तहत कुल 59,350 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक 61,671 करोड़ रुपये की मंजूरियां दी जा चुकी हैं.