रिलायंस इंडस्ट्रीज के संस्थापक धीरूभाई अंबानी ने जिस सपने के साथ रिलायंस की नींव रखी थी, मुकेश अंबानी ने उसे देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल करने तक पहुंचाया. अब आकाश अंबानी नई पीढ़ी के नेतृत्व के साथ इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. रिलायंस की इस लंबी यात्रा में 1977 का पहला IPO एक अहम पड़ाव रहा, जब 10 रुपये प्रति शेयर के भाव पर आम निवेशकों को कंपनी की विकास यात्रा में भागीदार बनने का अवसर मिला था. अब रिलायंस के आगामी IPO को लेकर चर्चा के बीच एक बार फिर रिलायंस की विरासत, निवेशकों की भागीदारी और जियो के बदलते स्वरूप पर नजरें हैं.
10 रुपये के शेयर से आम निवेशकों तक पहुंची रिलायंस
रिलायंस के अभी आने वाले IPO के बारे में बात करें और रिलायंस के पुराने IPO को याद करें तो आपको जानकर हैरानी होगी कि कंपनी के एक शेयर की कीमत 10 रुपये थी. धीरूभाई की दूरदर्शी की वजह से लोगों ने अपने सपनों को पूरा करने के लिए इससे फायदा उठाया और उनकी संपत्ति कई गुना बढ़ गई. कई लोगों के लिए यह पीढ़ियों तक चलने वाली दौलत बन गई. वही मौका एक बार फिर सामने आ रहा है.
एक ऐसी कंपनी जिसने धीरूभाई अंबानी से लेकर मुकेश अंबानी और आकाश अंबानी तक एक विरासत बनाई है. उस कंपनी ने देश को आगे बढ़ाने और उसकी तरक्की में अहम भूमिका निभाई है. रिलायंस Jio सिर्फ एक टेलीकॉम कंपनी नहीं है, बल्कि एक टेक्नोलॉजी कंपनी है. यह सिर्फ सिम कार्ड तक सीमित नहीं है.
रिलायंस Jio सिर्फ एक टेलीकॉम कंपनी नहीं
एक ऐसी कंपनी जिसने धीरूभाई अंबानी से लेकर मुकेश अंबानी और आकाश अंबानी तक एक विरासत बनाई है. उस कंपनी ने देश को आगे बढ़ाने और उसकी तरक्की में अहम भूमिका निभाई है. रिलायंस Jio सिर्फ एक टेलीकॉम कंपनी नहीं है, बल्कि एक टेक्नोलॉजी कंपनी है. यह सिर्फ सिम कार्ड तक सीमित नहीं है. समय के साथ रिलायंस के कारोबार और शेयर प्राइस में हुए बदलावों से कई शुरुआती निवेशकों को बड़ा फायदा मिला. कुछ परिवारों के लिए यह निवेश लंबी अवधि में संपत्ति बनाने का जरिया भी बना. हालांकि, यह भी जानना जरूरी है कि शेयर बाजार में निवेश से मिलने वाला लाभ निश्चित नहीं होता और भविष्य में शानदार रिटर्न की भी गारंटी नहीं दी जा सकती.
धीरूभाई से मुकेश और आकाश तक बढ़ता कारोबारी सफर
धीरूभाई अंबानी ने कारोबार को बड़े स्तर पर ले जाने की जो नींव रखी, उसे मुकेश अंबानी के नेतृत्व में रिफाइनिंग, पेट्रोकेमिकल्स, खुदरा कारोबार और दूरसंचार जैसे क्षेत्रों में विस्तार मिला. जामनगर रिफाइनिंग परिसर ने भारत की औद्योगिक क्षमता को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके बाद रिलायंस जियो ने वर्ष 2016 में दूरसंचार बाजार में प्रवेश किया. किफायती डेटा और मुफ्त वॉयस कॉल की पेशकश ने मोबाइल सेवाओं के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ाई और इंटरनेट की पहुंच का विस्तार किया.
Jio सिर्फ सिम कार्ड नहीं, तकनीक का बड़ा मंच
गौरतलब है कि जियो की पहचान अब सिर्फ मोबाइल कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है. डिजिटल नेटवर्क, ब्रॉडबैंड, क्लाउड सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों पर बढ़ता जोर इसे टेक्नोलॉजी कारोबार के रूप में स्थापित करने की दिशा दिखाता है. आकाश अंबानी की लीडरशिप में जियो (Jio) की डिजिटल रणनीति भारत की तकनीकी जरूरतों और नए अवसरों से जुड़ी है.