अडाणी पोर्टफोलियो का हिस्सा अंबुजा सीमेंट्स को ग्लोबल सीमेंट सेक्टर में पहले इंडो-स्वीडिश कार्बन कैप्चर एंड यूटिलाइजेशन (CCU) पायलट के लिए चुना गया है. बता दें कि अंबुजा सीमेंट दुनिया की नौवीं सबसे बड़ी बिल्डिंग मटीरियल सॉल्यूशन प्रोवाइडर है. कंपनी को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बॉम्बे और इको टेक, स्वीडन के साथ मिलकर कार्बन कैप्चर एंड यूटिलाइजेशन (CCU) के लिए प्री-पायलट टेक्नोलॉजी फीजिबिलिटी स्टडी के लिए इंडो-स्वीडिश ग्रांट मिला है.
बुधवार को जारी एक बयान में, कंपनी ने कहा कि कंपनी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बॉम्बे और इको टेक, स्वीडन के साथ मिलकर कार्बन कैप्चर और यूटिलाइजेशन (CCU) के लिए प्री-पायलट टेक्नोलॉजी फीजिबिलिटी स्टडी के लिए इंडो-स्वीडिश ग्रांट पाने वाली पहली सीमेंट कंपनी बन गई है.
यह स्टडी स्केलेबल, सस्टेनेबल और इंडस्ट्री-रेडी CO₂ कैप्चर और यूटिलाइजेशन सॉल्यूशन बनाने पर फोकस करती है, जो पारंपरिक कार्बन स्टोरेज से सर्कुलर कार्बन इकोनॉमी में बदलाव पर जोर देती है जो एमिशन को कम करती है और नए ग्रीन फ्यूल और मटीरियल को मुमकिन बनाती है.
क्या है कंपनी का प्लान
इस प्रोजेक्ट के तहत, अंबुजा सीमेंट्स कैप्चर किए गए CO₂ को ग्रीन हाइड्रोजन पाथवे का इस्तेमाल करके कैल्शियम कार्बोनेट या ग्रीन मेथनॉल जैसे मटीरियल में बदलने का प्लान बना रही है.
यह तरीका सिर्फ कार्बन को कैप्चर और स्टोर करने से लेकर उसे इंडस्ट्रियल इस्तेमाल के लिए रीपर्पस करने की तरफ एक बदलाव को दिखाता है, जो एक सर्कुलर तरीके को सपोर्ट करता है जिससे पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को फायदा होता है.
अडाणी ग्रुप के सीमेंट बिजनेस के CEO, विनोद बहेटी ने कहा: “यह ग्रांट हासिल करना जिम्मेदार इनोवेशन और ग्लोबल सहयोग के लिए हमारे कमिटमेंट को और मजबूत करता है. CCU सस्टेनेबल कंस्ट्रक्शन को फिर से डिफाइन करने के लिए एक स्ट्रेटेजिक लीवर है, और IIT बॉम्बे और इको टेक, स्वीडन के साथ हमारी खास पार्टनरशिप क्लाइमेट-रेजिलिएंट, वैल्यू-क्रिएटिंग सॉल्यूशंस को तेजी देगी. हम रिन्यूएबल एनर्जी इंटीग्रेशन, अल्टरनेटिव फ्यूल और रॉ मटीरियल के विस्तार, और दूसरी पहलों के जरिए अपने नेट-जीरो रोडमैप को आगे बढ़ा रहे हैं. CCU हमारे नेट-जीरो एम्बिशन की ओर आखिरी कदम होगा. FY’26 से TNFD अलाइन्ड डिस्क्लोज़र, बायोडायवर्सिटी पहल, कूलब्रुक की RDHTM टेक्नोलॉजी का दुनिया का पहला कमर्शियल डिप्लॉयमेंट, एजेंटिक AI-ड्रिवन ऑपरेशंस, और अडाणी ग्रुप के इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम का फायदा उठाकर, हमारा लक्ष्य बेहतर स्टेकहोल्डर वैल्यू बनाना और भारत के लो-कार्बन इकोनॉमी में बदलाव में मदद करना है.”
यह स्टडी सीमेंट ऑपरेशंस से CO₂ कैप्चर करने की टेक्निकल और इकोनॉमी वायबिलिटी का मूल्यांकन करेगी. कैप्चर की गई CO₂ को कैल्शियम कार्बोनेट जैसे मटीरियल में या ग्रीन हाइड्रोजन तरीकों का इस्तेमाल करके ग्रीन मेथनॉल बनाने में इस्तेमाल किया जाएगा. पारंपरिक कार्बन कैप्चर और स्टोरेज से एक सर्कुलर कार्बन इकोनॉमी की ओर शिफ्ट होना जो एमिशन को कम करती है और साथ ही नए ग्रीन फ्यूल और मटीरियल को भी मुमकिन बनाती है.
IIT बॉम्बे के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन कार्बन कैप्चर यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज के साथ कोलेबोरेशन, सीमेंट जैसे मुश्किल से कम होने वाले सेक्टर के लिए स्केलेबल, कॉस्ट-इफेक्टिव सॉल्यूशन बनाने के लिए एडवांस्ड CO₂ कैप्चर और मिनरलाइजेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करेगा. इको टेक, स्वीडन एनर्जी डिमांड को ऑप्टिमाइज करने, वेस्ट हीट को रिकवर करने और रिन्यूएबल बिजली और हीट को इंटीग्रेट करने में मदद करेगा.
यह ग्रांट SBTi द्वारा वैलिडेट कंपनी के नेट-जीरो रोडमैप पर आधारित है. कंपनी कूलब्रुक की रोटोडायनामिक हीटर टेक्नोलॉजी के कमर्शियल इस्तेमाल से लो-कार्बन मैन्युफैक्चरिंग में तेजी ला रही है, 1 GW कैप्टिव सोलर-विंड कैपेसिटी के जरिए रिन्यूएबल पावर बढ़ा रही है, 376 MW वेस्ट हीट रिकवरी सिस्टम लगा रही है और सीमेंट इंडस्ट्री में भारत की पहली TNFD अपनाने वाली कंपनी के तौर पर नेचर-पॉजिटिव नतीजों को मजबूत कर रही है.
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