केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बहुत ही काम की और बड़ी खबर सामने आ रही है. 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की दो दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक मुंबई में चल रही है, जो आज यानी 23 अक्टूबर 2026 को समाप्त हो रही है. इससे पहले आयोग की पहली बैठक 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में हुई थी. सूत्रों के मुताबिक, इस मीटिंग में सबसे बड़ा फोकस बेसिक पे (Basic Pay) और फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) के संशोधन पर है. जानिये यूनियनों की क्या मांगें हैं और इसका कर्मचारियों के करियर व सैलरी पर क्या असर पड़ेगा.
यूनियनों की क्या है बड़ी मांग?
बढ़ती महंगाई और खर्चों को देखते हुए देश की प्रमुख कर्मचारी यूनियनों ने 8वें वेतन आयोग के सामने अपनी जोरदार मांगें रखी हैं. नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मैकेनिज्म (NC-JCM) स्टाफ साइड ने न्यूनतम बेसिक पे 69,000 रुपये और फिटमेंट फैक्टर 3.833 करने की मांग की है. वहीं BPMS ने न्यूनतम बेसिक पे 72,000 रुपये और फिटमेंट फैक्टर 4 करने का प्रस्ताव दिया है. दोनों यूनियनों ने सालाना इंक्रीमेंट (Annual Increment) को 3% से बढ़ाकर 6% करने की भी मांग की है.
ज्यादा बेसिक पे से 20 साल के करियर पर क्या असर पड़ेगा?
Narayan Kumar & Co के सीए एक्सपर्ट नारायण कुमार झा के अनुसार, बेसिक पे में बढ़ोतरी का असर कंपाउंडिंग (Compound Interest) की तरह काम करता है. अगर शुरुआती बेसिक पे ज्यादा होगी, तो हर साल मिलने वाला 3% या नया इंक्रीमेंट भी काफी बड़ा अमाउंट बनकर जुड़ेगा. महंगाई भत्ता (DA) और मकान किराया भत्ता (HRA) सीधे बेसिक पे से जुड़े होते हैं, इसलिए बेसिक बढ़ने पर हर महीने मिलने वाली कुल सैलरी काफी बढ़ जाएगी. ग्रेच्युटी (Gratuity), लीव एनकैशमेंट और पेंशन जैसी सुविधाएं रिटायरमेंट के समय आखिरी बेसिक पे के आधार पर तय होती हैं, जिससे कर्मचारियों को बुढ़ापे में बहुत बड़ा वित्तीय लाभ मिलेगा.
आगे क्या होगा और रिपोर्ट कब आएगी?
इस 3 सदस्यीय पैनल की अध्यक्ष जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई हैं, जबकि प्रोफेसर पुलक घोष और सदस्य-सचिव पंकज जैन इसके अन्य सदस्य हैं. 8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को हुआ था. आयोग की अंतिम रिपोर्ट इसके गठन के 18 महीने बाद यानी मई-जून 2027 के आसपास आने की संभावना है. तब तक कर्मचारियों को यूनियनों की इन सभी मांगों को सिर्फ प्रस्ताव (Proposals) ही मानना चाहिए, क्योंकि सरकार की अंतिम मुहर लगना अभी बाकी है.