8th Pay Commission DA Hike Update : जानें कब और कितनी बढ़ेगी सरकारी कर्मचारियों की सैलरी? चेक करें लेटेस्ट अपडेट
Author: Vandana Bharti
Oct 14, 2025 08:12 PM IST
देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए अक्टूबर का महीना त्योहारों के साथ शुरू हुआ, क्योंकि केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ते (डीए) में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा की, जो दिवाली का तोहफा है. मौजूदा सातवें वेतन आयोग के तहत डीए अब 55 प्रतिशत से बढ़कर 58 प्रतिशत हो गया है.
हालांकि, इस हालिया वेतन वृद्धि से टेक-होम वेतन में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन ध्यान एक और जरूरी सवाल पर केंद्रित हो गया है: आठवां वेतन आयोग कब लागू होगा और कर्मचारियों को वेतन और लाभों में व्यापक संशोधन के लिए कब तक इंतजार करना होगा? आइये जानते हैं.
समय-सीमा की अभी पुष्टि नहीं
आठवां वेतन आयोग केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए अगले बड़े वेतन और पेंशन संशोधन का निर्धारण करेगा. यह मुद्रास्फीति और जीवन-यापन की लागत में बदलाव के अनुरूप वेतन संरचना, भत्ते और समग्र मुआवज़े की समीक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जनवरी, 2025 को आठवें वेतन आयोग के गठन की घोषणा की. हालांकि, अभी तक, सरकार ने इस बारे में कोई आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं किया है कि सिफारिशों को अंतिम रूप कब दिया जाएगा या लागू किया जाएगा.
कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नए वेतन ढांचे के लागू होने में दो से तीन साल लग सकते हैं. यह सातवें वेतन आयोग के दौरान अपनाई गई समय-सीमा के अनुरूप होगा, जिसकी स्थापना 2014 में हुई थी, जिसने 2015 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी और 2016 में लागू हुआ था.
यदि इसी तरह का पैटर्न बना रहता है, तो कर्मचारी 2027 तक आठवें वेतन आयोग के वेतन संशोधन लागू होने की उम्मीद कर सकते हैं. तब तक, महंगाई भत्ते में समायोजन के जरिए वेतन वृद्धि मुद्रास्फीति के खिलाफ आंशिक राहत देती रहेगी.
8वें वेतन आयोग के तहत अपेक्षित वेतन वृद्धि
हालांकि आधिकारिक आंकड़े अभी जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन शुरुआती अनुमान सरकारी कर्मचारियों के मूल वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि का संकेत देते हैं. रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के बाद न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपये से बढ़कर 26,000 रुपये हो सकता है.
इस प्रस्तावित वृद्धि का उद्देश्य मुद्रास्फीति के दबाव को कम करना और लाखों सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के जीवन स्तर में सुधार लाना है. इस कदम से उपभोक्ता खर्च और समग्र आर्थिक धारणा पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है.